यह बिल्कुल अच्छा नहीं हुआ कि राज्यों के ढुलमुल रवैये के कारण घरेलू विमान सेवा ढंग से नहीं शुरू हो सकी। चूंकि 80 से ज्यादा उड़ानें स्थगित हुईं इसलिए सैकड़ों लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कुछ राज्य अभी भी विमान सेवाओं को अनुमति देने को तैयार नहीं। उन्हें लगता है कि विमान यात्रियों की आवाजाही से कोरोना वायरस का संक्रमण फैलेगा। जब विमान यात्रियों की सेहत की फौरी जांच की जा रही, वे आरोग्य सेतु एप से लैस किए जा रहे और यात्रा के दौरान सभी आवश्यक सावधानी भी बरती जा रही तब फिर विमान सेवाओं के लिए राज्य सरकारों की आनाकानी समझना कठिन है।

यह सही है कि कोरोना वायरस के संक्रमण से कोई भी ग्रस्त हो सकता है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि विमानन कंपनियों और विमान यात्रियों की ओर से हरसंभव सतर्कता बरते जाने के बाद भी हवाई यात्रा को हतोत्साहित किया जाए। कई राज्य सरकारें यही कर रही हैं और वह भी तब जब वे इस तथ्य से परिचित हैं कि आवाजाही में सख्ती जारी रहने से आर्थिक हालात और खराब होंगे।

केंद्र सरकार ने खराब होते आर्थिक हालात से उबरने के लिए ही कारोबारी गतिविधियों को बढ़ाने के उद्देश्य जो कदम उठाने शुरू किए हैं उनमें पहले कदम के रूप में आवाजाही को प्रोत्साहित किया जा रहा है। यह ठीक नहीं कि राज्य सरकारें इसमें सहभागी बनने के बजाय बाधक बन रही हैं। इनमें वे राज्य सरकारें भी हैं जो इस फेर में हैं कि उनके यहां रह रहे दूसरे राज्यों के कामगार जितनी जल्दी और जैसे भी हो, अपने गांव-घर लौट जाएं तो बेहतर। इन राज्यों का प्रशासन इसकी तो बहुत चिंता कर रहा है कि विमान और रेल यात्रियों के जरिये कोरोना का संक्रमण न फैलने पाए, लेकिन इसकी तनिक भी परवाह नहीं कर रहा कि घर जाने को तत्पर कामगार सुरक्षित तरीके से लौटें।

यही कारण है कि श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में उनकी रवानगी के समय शारीरिक दूरी के पालन की कहीं कोई फिक्र नहीं की जा रही है। एक तथ्य यह भी है कि जो राज्य विमान और रेल सेवाओं की बहाली को लेकर अनिच्छा दिखा रहे वही अपने यहां के प्रमुख शहरों और बाजारों में शारीरिक दूरी के नियम के पालन को लेकर गंभीर नहीं। यदि राज्य सरकारें कोरोना संक्रमण के प्रसार को रोकने को लेकर वास्तव में गंभीर हैं तो वे उन पर ध्यान केंद्रित करें जो शारीरिक दूरी के पालन को लेकर बेपरवाह हैं, न कि उन पर जो सतर्कता बरतने को तैयार हैं, जैसे कि विमान और रेल यात्री। राज्य सरकारों को इसका आभास होना चाहिए कि कारोबार को आगे बढ़ाना बहुत आवश्यक हो चुका है।

Posted By: Bhupendra Singh

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