कुछ राज्य सरकारों की ओर से अपने चुनिंदा शहरों में रात का कर्फ्यू और सप्ताहांत लॉकडाउन लगाए जाने के चलते लंबे लॉकडाउन की आशंका ने सिर उठा लिया है। इस आशंका को और बल दिया है विभिन्न मुख्यमंत्रियों की इन घोषणाओं ने कि मजबूरी में लॉकडाउन का सहारा लेना पड़ सकता है। पता नहीं उनकी ओर से ऐसा कोई कदम उठाया जाएगा या नहीं, लेकिन यह देखना दुखद और चिंताजनक है कि कई राज्यों और विशेष रूप से महाराष्ट्र, गुजरात एवं दिल्ली-एनसीआर से मजदूरों के पलायन का सिलसिला कायम हो गया है। इस सिलसिले को न केवल रोका जाना चाहिए, बल्कि ऐसे उपाय भी किए जाने चाहिए, जिससे मजदूरों में घबराहट न फैलने पाए। कम से कम यह तो सुनिश्चित किया ही जाए कि कोरोना के बढ़ते संक्रमण की वजह से विभिन्न प्रांतों में जो सख्ती बरती जा रही है, उसके परिणामस्वरूप वैसी स्थिति न बनने पाए, जैसी पिछले वर्ष देशव्यापी लॉकडाउन के बाद बनी थी। राज्यों को इसकी अनदेखी नहीं करनी चाहिए कि तब कामगारों में किस कदर अफरातफरी फैली थी और वे किन दारुण परिस्थितियों में अपने घरों को लौटने के लिए विवश हुए थे? तमाम कामगार तो पैदल ही सैकड़ों किलोमीटर का सफर करने के लिए बाध्य हुए थे। उस दौर के हृदयविदारक दृश्यों को विस्मृत नहीं किया जाना चाहिए।

चूंकि कामगारों ने लॉकडाउन के अंदेशे के चलते पलायन करना शुरू कर दिया है, इसलिए केंद्र सरकार को राज्यों को ऐसे निर्देश देने में देरी नहीं करनी चाहिए कि वे उन्हें पलायन करने से रोकें और कोरोना संकट के इस दूसरे दौर में उनके रहने एवं खाने-पीने की पर्याप्त व्यवस्था भी करें। कायदे से तो राज्य सरकारों को यह काम अपने स्तर पर खुद ही करना चाहिए। वे इससे अपरिचित नहीं हो सकतीं कि कामगारों के पलायन की सूरत में उद्योग-धंधों पर बुरा असर पड़ेगा और उसके नतीजे में पटरी पर आती अर्थव्यवस्था फिर संकट में आ सकती है। इसी के चलते उद्योग जगत लॉकडाउन के कदम को खारिज करने के साथ यह रेखांकित कर रहा है कि कोराना संक्रमण से बचाव के आजमाए हुए उपायों पर सही ढंग से अमल पर्याप्त है। समझना कठिन है कि राज्य सरकारें इन उपायों पर जोर देने के बजाय रात के कर्फ्यू अथवा सप्ताहांत लॉकडाउन का सहारा लेने में क्यों लगी हुई हैं? उन्हें जितनी जल्दी यह आभास हो तो बेहतर कि रात के कर्फ्यू अथवा हफ्ते में कुछ दिन लॉकडाउन लगाने से कोरोना संक्रमण पर लगाम लगने वाली नहीं। राज्य सरकारों के लिए यह आवश्यक है कि वे कामगारों को दिलासा देने, जरूरी सूचनाएं उपलब्ध कराने और लॉकडाउन को लेकर असमंजस के माहौल को दूर करने के कदम उठाएं।

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