भवन, सड़क व अन्य निर्माण कार्यों में बालू, ईंट व पत्थर की आपूर्ति करने के व्यवसाय (सिंडिकेट) को लेकर लगभग हर दिन तृणमूल कांग्रेस के अंदर खून-खराबा, बमबाजी से लेकर गोलीबारी व संघर्ष और यहां तक कि हत्याएं भी हो रही हैं। इसे लेकर तृणमूल प्रमुख व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी काफी नाराज हैं। उन्होंने 21 जुलाई की सभा के बाद गुरुवार को प्रशासनिक बैठक में अधिकारियों को साफ कहा कि सिंडिकेट राज को खत्म कर दें। इसके कारण हमलोगों की मान-मर्यादा खत्म हो रही है। वहीं बद्र्धमान, बांकुड़ा, वीरभूम समेत अन्य जिलों में अवैध बालू कारोबार में संबंधित विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत को लेकर ममता इतनी खफा हुईं कि उन्होंने कहा कि ऐसे अधिकारियों को पीटकर लाल कर दें और उन सभी को हटा दें लेकिन ममता की चेतावनी और यथार्थ में जमीन-आसमान का अंतर बना हुआ है। ऐसा नहीं है कि ममता ने पहली बार सिंडिकेट या फिर अवैध बालू खदान को लेकर बात कही है। पिछले चार वर्षों में दर्जनों बार पार्टी नेताओं व कार्यकर्ताओं की रैली व सभाओं में वह चेतावनी दे चुकी हैं लेकिन स्थिति वही 'ढाक के तीन पातÓ वाली कहावत को चरितार्थ कर रही है। न ही पार्टी नेता व कार्यकर्ता मान रहे हैं और न ही पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी इस दिशा में ठोस कार्रवाई करने की हिम्मत कर रहे हैं। राज्य सचिवालय नवान्न में गुरुवार को प्रशासनिक समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सिंडिकेट व बालू के अवैध कारोबार को लेकर काफी खफा थीं। वह सभी विभागों के मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों से विकास कार्यों का एक-एक कर हिसाब ले रही थीं। बालू व सिंडिकेट के मुद्दे पर जब लोक निर्माण विभाग के मुख्य सचिव ने बताया कि कोई भी कार्य करने के लिए सिंडिकेट समस्या से जूझना पड़ता है। यह सुनते ही मुख्यमंत्री गुस्से में आ गईं। उन्होंने कहा कि वह सिंडिकेट राज किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगी। सिंडिकेट राज को खत्म करने के लिए जितनी सख्ती बरतनी पड़े, बरती जाए। बालू के अवैध धंधे में कुछ अधिकारियों के मिलीभगत की बात सामने आई तो वह बैठक में ही बोल पड़ीं कि ऐसे अधिकारियों को पीटकर लाल कर दिया जाएगा। बार-बार ममता पार्टी कार्यकर्ताओं व नेताओं को सभा में कहती आ रही हैं कि सिंडिकेट व अवैध बालू व्यवसाय करने वाले तृणमूल छोड़ दें। साथ ही पार्टी से निकालने तक की धमकी दी थी। इसके बावजूद तृणमूल के भीतर सिंडिकेट छोडऩे को लेकर किसी तरह की कोई पहल नहीं हुई है। इसकी वजह यह भी है कि इस मलाईदार धंधे को कोई भी तृणमूल नेता व कार्यकर्ता हाथ से नहीं जाने देना चाहता क्योंकि इसमें मोटी कमाई हो रही है। ऐसे में ममता के निर्देश व चेतावनी की उन्हीं की पार्टी के नेता व कार्यकर्ता धज्जियां उड़ा रहे हैं। पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं।

[स्थानीय संपादकीय: पश्चिम बंगाल]

Posted By: Bhupendra Singh