कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव का समय जैसे-जैसे निकट आता जा रहा है, वैसे-वैसे पार्टी की राज्य इकाइयों में इस आशय के प्रस्ताव पारित करने की होड़ मची है कि राहुल गांधी को ही फिर से अध्यक्ष बनना चाहिए। अब तक लगभग आठ प्रदेश कांग्रेस समितियां ऐसे प्रस्ताव पारित कर चुकी हैं। इन समितियों ने अन्य राज्यों के कांग्रेस नेताओं पर यह दबाव बढ़ा दिया है कि वे भी अपने यहां से ऐसे ही प्रस्ताव पारित करें। यदि ऐसा ही हो तो आश्चर्य नहीं, क्योंकि मौजूदा माहौल में किसी प्रदेश कांग्रेस समिति के लिए अलग राह पर चलना संभव नहीं दिखता।

कोई प्रदेश कांग्रेस समिति यह कहने का साहस शायद ही जुटा सके कि पार्टी की कमान गांधी परिवार के बाहर के नेता को मिलनी चाहिए। यह स्थिति इसलिए बन रही है, क्योंकि भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने अध्यक्ष बनने के प्रश्न पर गोलमोल उत्तर दिया था। उन्होंने कहा था कि मैं कांग्रेस का अध्यक्ष बनूंगा या नहीं, यह तब स्पष्ट हो जाएगा, जब अध्यक्ष पद के लिए चुनाव होंगे। मैंने तय कर लिया है कि मैं क्या करूंगा और इसे लेकर मेरे मन में कोई भ्रम नहीं है। यह संभव है कि उन्होंने तय कर लिया हो कि उन्हें क्या करना है, लेकिन उनका यह कथन कुछ स्पष्ट नहीं करता।

भले ही यह कहा जा रहा हो कि प्रदेश कांग्रेस समितियों की ओर से राहुल गांधी के पक्ष में जो प्रस्ताव पारित किए जा रहे हैं, उनका कोई अर्थ नहीं है, लेकिन सच यह है कि इन प्रस्तावों के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है कि वही पार्टी के सबसे सक्षम और लोकप्रिय नेता हैं। एक संदेश यह भी है कि यदि राहुल गांधी अध्यक्ष नहीं बनते तो भी वह कांग्रेस के सबसे प्रभावी नेता बने रहेंगे। प्रश्न यह है कि क्या किसी अन्य के अध्यक्ष बनने से वह स्वंतत्र रूप से निर्णय करने में सक्षम होगा?

इसके आसार नहीं दिखते, क्योंकि गांधी परिवार यही प्रकट करता चला आ रहा है कि कांग्रेस उसकी निजी जागीर है। इसी कारण अध्यक्ष पद छोड़ने के बाद भी राहुल गांधी पार्टी के सारे निर्णय स्वयं ही करते आ रहे हैं। एक तरह से वह पर्दे के पीछे से पार्टी चला रहे हैं। इसमें संदेह है कि गांधी परिवार के बाहर के किसी नेता के अध्यक्ष बनने से स्थिति में परिवर्तन आएगा। कहना कठिन है कि कांग्रेस का नया अध्यक्ष कौन बनेगा, लेकिन पार्टी की दशा और दिशा तब सुधरेगी, जब वह अपनी रीति-नीति बदलने के साथ आम जनता के समक्ष अपनी विचारधारा को स्पष्ट करने और जनता को आकर्षित करने वाला कोई ठोस विमर्श खड़ा करने में समर्थ होगी? आज तो स्थिति यह है कि कांग्रेस के आम कार्यकर्ता भी यह समझ पाने में असमर्थ हैं कि पार्टी की विचारधारा क्या है?

Edited By: Praveen Prasad Singh