केंद्रीय बजट में हिमाचल प्रदेश के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान या एम्स का ऐलान एक सपने जैसा रहा है। हालांकि वह कब पूरा होगा और उसमें कितना समय लगेगा, यह कहना बड़ा कठिन है लेकिन याद रखना चाहिए कि यह वही हिमाचल है जहां चिकित्सा की दृष्टि से आपदा की स्थिति में लुधियाना या चंडीगढ़ या ऐसे ही दीगर शहर मजबूरी में नजदीक लगते रहे हैं। यह हिमाचल प्रदेश जैसे भौगोलिक स्थितियों के मारे प्रदेश के लिए नितांत आवश्यक था क्योंकि यहां मौसम भी अपना रूप इस तरह दिखाता है कि उससे निपटने के लिए कई बार प्रबंध छोटे दिखाई देने लगते हैं। आज सारा विश्व हृदय दिवस मना रहा है लेकिन हिमाचल प्रदेश इस योग्य नहीं हुआ है कि यहां दिल के बड़े ऑपरेशन हो सकें। इसीलिए तो आम आदमी से लेकर बड़े लोगों तक को चंडीगढ़ जाना पड़ता है। प्रदेश का आलम यह है कि जनजातीय क्षेत्रों में दमे के रोगी बढ़ रहे हैं और ऐसा भी नहीं है कि दिल के रोग अब अवस्था बढऩे पर ही होंगे। चेतावनी यह है कि दिल के रोग अब जवानों में भी होने लगे हैं। ऐसे में जीवन शैली बदलना, आरामपरस्ती से बचना और व्यायाम तो बेहतर विकल्प हैं ही, उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं भी मुहैया होनी चाहिए। एक उच्च स्तरीय अस्पताल जो घोषित हो चुका है, उसे जल्द ही जमीन पर भी दिखना चाहिए। हिमाचल प्रदेश के लिए इन हालात की रोशनी में एम्स का ऐलान और उसके लिए बजटीय प्रावधान हौसला बढ़ाने वाले थे। इस प्रकार के केंद्रीय संस्थानों की आभा से प्रदेश और उसका मानस आलोकित होते हैं लेकिन राष्ट्रीय संस्थानों के संदर्भ में सच यह भी है कि हिमाचल एम्स पाकर प्रसन्न है जबकि अपने केंद्रीय विश्वविद्यालय को किराये के भवन से मुक्ति अब तक नहीं दिला सका। हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय पर सियासी रस्साकशी खेलता रहा और जम्मू-कश्मीर एम्स के साथ-साथ एक आइआइएम भी पा गया। यह तुलना इसलिए स्वाभाविक है क्योंकि हिमाचल और जम्मू-कश्मीर में लगभग एक साथ केंद्रीय विश्वविद्यालय शुरू हुए थे और अब जम्मू कश्मीर पुन: आगे बढ़ा है। हिमाचल प्रदेश चार वर्षों में एक केंद्रीय विश्वविद्यालय को नहीं संभाल सका तो आइआइएम के लिए सदिच्छा पर संदेह स्वाभाविक है। बहरहाल, उम्मीद करनी चाहिए कि कम से कम एम्स अब अस्तित्व में आए। हिमाचल प्रदेश में रोग बढ़ रहे हैं तो सुविधाएं भी बढऩी ही चाहिए। इसी से विकास का दिल धड़केगा।

[स्थानीय संपादकीय: हिमाचल प्रदेश]

Posted By: Bhupendra Singh