सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में रहस्यमय बुखार से करीब डेढ सौ बच्चों की मौत पर राज्य सरकार के साथ-साथ केंद्र सरकार से जवाब तलब करके बिल्कुल सही किया। यह इसलिए आवश्यक था, क्योंकि मुजफ्फरपुर और आसपास के इलाके में गंभीर किस्म के इंसेफलाइटिस की चपेट में आकर बच्चों के मरने का सिलसिला कायम रहने के बावजूद राज्य सरकार और साथ ही केंद्र सरकार की ओर से वैसे कदम नहीं उठाए गए जैसे अपेक्षित थे।

यह सही है कि उन कारणों की तह तक जाने में मुश्किल हो रही है जिनसे बच्चे उस रहस्यमय बीमारी का शिकार बन रहे हैैं जिसे चमकी बुखार अथवा एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम के तौर पर परिभाषित किया जा रहा है, लेकिन अगर इस बीमारी से निपटने की प्रबल इच्छाशक्ति दिखाते हुए हर संभव उपायों का सहारा लिया गया होता तो शायद आज हालात कुछ दूसरे होते। यह मानने के अच्छे-भले कारण हैैं कि एक सीमित दायरे में रहकर ही इस बीमारी से निपटने के प्रयास किए गए।

आखिर इस बीमारी के कहर से बचने के लिए वैसे ही कदम क्यों नहीं उठाए जा सके जैसे इबोला अथवा निपाह वायरस से बचने के लिए उठाए गए? इससे इन्कार नहीं कि अतीत में भी मुजफ्फरपुर क्षेत्र में बारिश के पहले रहस्यमय बुखार ने अपना सिर उठाया और उसके चलते कई बच्चों की मौत भी हुई, लेकिन अतीत के उदाहरण देकर हाथ पर कामचलाऊ रवैया अपनाने का कोई मतलब नहीं था। यह सामान्य बात नहीं कि दर्जनों बच्चों की मौत के बाद भी शासन-प्रशासन के स्तर पर यही रेखांकित करने की कोशिश हुई कि यहां तो ऐसा होता ही रहता है।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को भी नोटिस जारी कर दिया है, लेकिन इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती कि इस बार गोरखपुर और आसपास के इलाके में एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम अथवा जापानी बुखार का वैसा कहर नहीं दिखा जैसा कुछ वर्षों पहले तक दिखता था। समझना कठिन है कि बिहार सरकार उत्तर प्रदेश सरकार के तौर-तरीकों से कोई सीख क्यों नहीं ले सकी? सवाल यह भी है कि मुजफ्फरपुर के हालात को लेकर केंद्र सरकार समय रहते सक्रिय क्यों नहीं हुई? एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम के लिए गंदगी और कुपोषण के अतिरिक्त अन्य अनेक कारण जिम्मेदार बताए जा रहे हैैं। नि:संदेह कई बार किसी बीमारी के मूल कारणों का पता लगाना मुश्किल होता है, लेकिन अगर उससे बचाव और उपचार के बेहतर उपाय किए जा सकें तो हालात काबू करने में मदद मिलती है।

बिहार और केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट के सवालों का चाहे जो जवाब दें, यह एक सच्चाई है कि मुजफ्फरपुर का श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज अस्पताल पर्याप्त संसाधनों से लैस नहीं दिखा। ऐसा तब हुआ जब यह उत्तरी बिहार का प्रमुख मेडिकल कॉलेज है और पिछले कई वर्षों से एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम के मरीजों का गवाह बनता रहा है। संसाधनों के अभाव का सामना कर रहा यह मेडिकल कॉलेज अस्पताल देश में सरकारी स्वास्थ्य ढांचे की खराब स्थिति को ही बयान करता है। आवश्यक केवल यही नहीं कि बिहार में बच्चों की मौत का सिलसिला थमे, बल्कि यह भी है कि केंद्र और राज्य सरकारी स्वास्थ्य ढांचे को दुरुस्त करने के लिए कमर कसें।

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Posted By: Bhupendra Singh

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