मोदी सरकार - 2.0 के 100 दिन

निजी अस्पतालों में चिकित्सा के नाम पर मोटी रकम वसूलने पर लगाम लगाने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने निजी शिक्षण संस्थानों पर भी नकेल कसने की कोशिश की हैं। जगजाहिर है कि निजी शिक्षण संस्थान बच्चों के अभिभावकों से कई तरह की फीस वसूलते हैं। यही नहीं मोटी राशि डोनेशन के रूप में भी लेते हैं। जो अमीर हैं वे तो रुपये देकर अपने बच्चों को भर्ती करा लेते हैं लेकिन गरीब ऐसा नहीं कर पाते। इसीलिए अब ममता ने निजी शिक्षण संस्थानों के प्रबंधन के साथ बैठक करने बाद इस पर रोक लगाने की घोषणा की है। साथ ही निगरानी के लिए 10 सदस्यीय सेल्फ रेगुलेटरी कमीशन गठित किया है। निजी शिक्षण संस्थानों द्वारा तैयार किए गए रेगुलेटरी कमीशन में शिक्षा सचिव, पुलिस महानिदेशक और पुलिस आयुक्त सरकारी प्रतिनिधि के तौर पर रखे गए हैं। कमीशन शिक्षकों के वेतन और स्कूल की बैलेंस शीट आदि की समीक्षा करेगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा है कि एक साल के बाद वह स्वयं कमीशन की बैठक करेंगी और उसके कामकाज की समीक्षा करेंगी।
महानगर के कुछ प्रतिष्ठित स्कूलों पर मोटी रकम डोनेशन और अधिक शुल्क वसूलने का आरोप है। मुख्यमंत्री ने हेरिटेज स्कूल के शुल्क के तौर पर 1 लाख 85 हजार और लॉ मार्टिनियर के 2 लाख 47 हजार शुल्क के तौर पर वसूलने पर आपत्ति जताई। उन्होंने सेंट जेविर्यस के अधिकतम 5 लाख रुपये तक शुल्क लेने पर भी नाराजगी जताई। लॉ मार्टिनियर पर 30 लाख तक डोनेशन लेने की शिकायत की जांच कराने की धमकी भी दी।
गौर करनेवाली बात यह है कि अधिक शुल्क और डोनेशन लेने पर निजी शिक्षण संस्थानों पर नाराजगी जाहिर करने के बावजूद मुख्यमंत्री ने उनके कैंपस का विस्तार करने की जरूरत बताई। उन्होंने स्वीकार किया कि शिक्षा की मांग के अनुपात में स्कूल कम है।
स्कूलों के अधिक शुल्क लेने पर रोक लगाने और डोनेशन बंद करने के मुख्यमंत्री के इस कदम से बेसक मध्यवर्गीय और उच्च मध्यवर्गीय लोगों को कुछ राहत मिली है, लेकिन इससे एक बात भी उभर कर सामने आ रही है कि सरकार कुछ हद तक शिक्षा क्षेत्र में निजी संस्थानों पर निर्भर है। मुख्यमंत्री के निजी स्कूलों और निजी उच्च शिक्षण संस्थानों के विस्तार की जरूरत बताने से तो यही साबित होता है। जब तक आम जनता को 100 प्रतिशत सरकारी स्तर पर शिक्षा औैर चिकित्सा सेवा नहीं उपलब्ध होगी तब तक निजी शिक्षण संस्थानों और निजी अस्पतालों के फलने-फूलने से महज शुल्क पर नियंत्रण लगाकर रोका नहीं जा सकता।
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(हाईलाइटर:: स्कूलों के अधिक शुल्क लेने पर रोक लगाने और डोनेशन बंद करने के मुख्यमंत्री के इस कदम से बेसक मध्यवर्गीय और उच्च मध्यवर्गीय लोगों को कुछ राहत मिलेगी।)

[ स्थानीय संपादकीय : पश्चिम बंगाल ]

Posted By: Bhupendra Singh

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