दुनिया भर में कोरोना वायरस के नए प्रतिरूप ओमिक्रोन की दस्तक और दहशत के बाद भी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भारत आना इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि बीते दो साल में उन्होंने सिर्फ एक बार विदेश यात्रा की है। अपनी इस यात्रा से उन्होंने यह रेखांकित किया कि उनके लिए भारत का विशेष महत्व है। हालांकि उनकी यह यात्रा संक्षिप्त है, लेकिन इसका महत्व इसलिए बढ़ जाता है कि इसी अवसर पर दोनों देशों के विदेश एवं रक्षा मंत्रियों के स्तर पर भी बात हुई।

दोनों देशों के बीच की यह प्रगाढ़ता उन चर्चाओं को निराधार साबित करने वाली है कि भारत अमेरिका की तरफ कुछ ज्यादा ही झुक रहा है और इस क्रम में रूस की अनदेखी कर रहा है। भारत ने रूस से अपने संबंधों की महत्ता व्यक्त कर यही साबित किया कि उसकी अपनी स्वतंत्र विदेश नीति है और वह किसी एक खेमे के साथ रहने का हामी नहीं। भारत ने दुनिया के समक्ष यह भी स्पष्ट किया कि यदि हाल के समय में अमेरिका से उसके संबंध मजबूत हुए हैं तो वे किसी अन्य देश और खासकर अपने भरोसेमंद सहयोगी रूस की कीमत पर नहीं। भारत ने रूस से अपने मैत्री संबंधों को आगे ले जाने के साफ संकेत देकर अमेरिका को भी यह जरूरी संदेश दिया कि विदेश नीति के मामले में वह किसी देश का पिछलग्गू होकर नहीं रह सकता।

एक ऐसे समय जब वाशिंगटन और मास्को के संबंध तनाव के दौर से गुजर रहे हैं, तब भारत की ओर से यह प्रकट करना उल्लेखनीय है कि वह रूस के साथ अपने रक्षा, ऊर्जा, व्यापार संबंधों को और मजबूत बनाने जा रहा है। इससे भी उल्लेखनीय है दोनों देशों की ओर से उस एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम सौदे को लेकर प्रतिबद्धता जताना, जिस पर अमेरिका को आपत्ति है। अमेरिका को यह बुनियादी बात समझने में और देर नहीं करनी चाहिए कि वह भारत सरीखे संप्रभु राष्ट्र के लिए यह तय करने का अधिकारी नहीं हो सकता कि उसे अपनी रक्षा-सुरक्षा के लिए क्या और कैसे उपकरण कहां से खरीदने चाहिए?

यह अच्छा हुआ कि भारतीय प्रधानमंत्री की रूसी राष्ट्रपति के साथ जिन तमाम मसलों पर चर्चा हुई, उनमें से एक अफगानिस्तान के हालात भी हैं। अमेरिका जिस तरह अफगानिस्तान को अधर में छोड़ गया, उसके बाद वहां असर रखने वाले रूस के साथ भारत की नजदीकी आवश्यक है। रूस का इस दृष्टिकोण से सहमत होना भारत के हित में है कि अफगानिस्तान की धरती से आतंकवाद फैलने का खतरा बढ़ गया है। यह सही है कि रूस की चीन से भी नजदीकी है, लेकिन उम्मीद की जाती है कि भारतीय नेतृत्व रूसी राष्ट्रपति के जरिये उसे सही संदेश देने में सफल होगा।

Edited By: Kamal Verma