प्रदेश में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के हरियाणा दौरे से पूर्व विरोध की सियासत अब कुछ मंद हुई है। जाट नेता दौरे का विरोध न करने पर सहमत हो गए हैं। भाजपा अध्यक्ष पार्टी के जनाधार को मजबूती देने के लिए 15 फरवरी को जींद में रैली करेंगे। इस दौरान प्रदेश के कार्यकर्ता मोटरसाइकिल रैली से जींद पहुंचेंगे। जाट समाज ने दौरे के विरोध में जींद में समानांतर रैली का एलान कर दिया था। इससे टकराव की आशंका बन गई थी। सरकार से वार्ता के बाद जाटों ने विरोध वापस ले लिया है। इससे प्रदेश सरकार व प्रशासन को बड़ी राहत मिल गई है पर विपक्षी दल अभी भी विरोध पर अड़े हैं। इसीलिए सरकार ने अर्धसैनिक बलों को अलर्ट पर रखा है। पिछले कुछ वर्षो में प्रदेश में हुए हिंसक टकराव का असर प्रदेश की छवि पर भी पड़ा है।

ऐसे में कोई भी यह नहीं चाहता कि इस तरह के टकराव की स्थिति फिर से उपजे। आरक्षण के मसले पर विभिन्न गुटों की अलग-अलग राय हो सकती है, लेकिन प्रदेश को कोई भी ¨हसा की आग में नहीं झोंकना चाहता। सभी पक्ष इस बात पर सहमत हैं कि हरियाणा में अमन कायम रहे और विकास की गति मंद न हो। आरक्षण मसले पर सरकारी नीति पर भी चिंतन की आवश्यकता है। रोजगार व ग्रामीण विकास के मसले पर ठोस रणनीति बनाई जानी चाहिए। आवश्यक है कि गांवों में अधिक से अधिक रोजगार सृजित हों ताकि युवाओं में सरकारी नौकरी के प्रति यह लगाव कुछ कम हों। गांवों में बेहतर सुविधाएं व रोजगार मिलें तो शहर की दौड़ थमेगी। साथ ही सकारात्मक ऊर्जा सृजित होगी। प्रदेश के युवाओं की ऊर्जा को विकास की राह पर ले जाने की जिम्मेवारी समाज के प्रबुद्ध वर्ग की है। तभी समाज भी आगे बढ़ेगा और प्रदेश भी।

[ स्थानीय संपादकीय: हरियाणा ] 

Posted By: Sanjay Pokhriyal