बजट को लेकर अब भी सवाल उठ रहे हैं। खासकर रेल बजट में बंगाल के फंडों में कटौती का मुद्दा गरम हो गया है। बंगाल विधानसभा में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस सरकार की ओर से निंदा प्रस्ताव पेश किया गया। वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से लेकर उनके दल और कांग्रेस तथा वाममोर्चा के नेता भी सवाल उठा रहे हैं। राज्य

सरकार ने रेल बजट में बंगाल की उपेक्षा किए जाने को लेकर गुरुवार को विधानसभा में निंदा प्रस्ताव पेश किया। शिक्षा व संसदीय कार्य मंत्री पार्थ चटर्जी ने बुधवार को कहा था कि केंद्र सरकार द्वारा लगातार बंगाल की उपेक्षा की जा रही है। रेल बजट में बंगाल के साथ सौतेला व्यवहार किया गया है। प्रस्ताव पेश करने को लेकर विधानसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी में विचार-विमर्श भी किया गया था। तृणमूल नेताओं का कहना है कि केंद्र सरकार के इस रवैये के कारण राज्य में रेलवे की कई परियोजनाएं अटक गई हैं। कई मेट्रो परियोजनाओं के लिए धन का आवंटन नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि जब राज्य सरकार की ओर से कोई प्रस्ताव लाया जाता है, तो विरोधी दल करते हैं। अब सत्तारूढ़ पार्टी प्रस्ताव लाती है, तो अब दूसरे पर निर्भर करता है कि वे इसका समर्थन करे या फिर निंदा। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष व पार्टी विधायक दिलीप घोष का कहना है कि रेल बजट में बंगाल की कोई उपेक्षा नहीं की गयी है। कई ऐसी परियोजनाएं शुरू कर दी गई हैं, जिनके लिए जमीन नहीं मिल रही है।

इस बाबत केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो ने पहल कर ईस्ट-वेस्ट मेट्रो परियोजना में जमीन की समस्या को मिटाया। राजनीति करने से कुछ नहीं होगा, बल्कि यदि सचमुच बंगाल को वंचित किया गया है, तो वे सभी एकजुट होकर केंद्र सरकार के पास जाएं। हालांकि, सवाल यह उठ रहा है कि क्या सही में रेल बजट में बंगाल में कटौती हुई है? पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक ने बुधवार को कहा था कि रेल बजट में उनके जोन की परियोजनाओं के लिए पर्याप्त धन मिले हैं। ऐसे में इस पर क्या सियासत उचित है? बजट आवंटन बढ़ना जरूरी है कि लंबित परियोजनाओं को तत्काल पूरा होना? इस पर विचार करने की जरूरत है। क्योंकि, ईस्ट-वेस्ट हो या फिर जोका-बीबीडीबाग मेट्रो रेल परियोजना। इसके एक वर्ष पूर्व पूरा हो जाना था लेकिन अब तक कार्य पूरा नहीं हो सका है।

[ स्थानीय संपादकीय: पश्चिम बंगाल ]

Posted By: Sanjay Pokhriyal