सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड की ओर से निर्मित किए जाने वाले हल्के लड़ाकू विमान तेजस की खरीद को मंजूरी देकर वायु सेना की जरूरत को पूरा करने के साथ ही स्वदेशी रक्षा उद्योग को बल प्रदान करने का काम किया है। 83 तेजस विमानों के लिए 48 हजार करोड़ रुपये के इस सौदे को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बाजी पलटने वाला बताया है। चूंकि यह सौदा चार-पांच साल पहले किए गए 40 तेजस विमानों की खरीद से अलग है इसलिए यह भी स्पष्ट है कि स्वदेश निर्मित ये लड़ाकू विमान वायु सेना की कसौटी पर खरे उतर रहे हैं। इससे बेहतर और कुछ नहीं कि सेना की जरूरतों के लिए दूसरे देशों पर कम से कम निर्भर रहना पड़े। ध्यान रहे कि भारत उन प्रमुख देशों में गिना जाता है, जो अपनी तमाम रक्षा सामग्री का आयात करता है। इस स्थिति को दूर करने और सच तो यह है कि रक्षा सामग्री के आयातक से निर्यातक बनने की दिशा में कदम बढ़ाने की जरूरत है। इससे न केवल विदेशी मुद्रा की बचत होगी, बल्कि भारत की गिनती और सामर्थ्यवान देशों में होगी। यदि देश को वास्तव में एक बड़ी ताकत बनना है तो यह सुनिश्चित करना ही होगा कि वह अपनी रक्षा जरूरतों को स्वयं ही पूरा करने में सक्षम हो। हमारे नीति-नियंताओं को यह समझने की जरूरत है कि इस दिशा में अभी बहुत काम करना है।

इसकी अनदेखी नहीं की जानी चाहिए कि तेजस को विकसित करने में करीब तीन दशक लग गए। इसी तरह रक्षा क्षेत्र की अन्य परियोजनाएं भी लेट-लतीफी का शिकार होती रही हैं। यह कोई बहुत अच्छी स्थिति नहीं कि अभी हम सेना की जरूरत के साधारण उपकरण और छोटे हथियार भी देश में निर्मित करने में सक्षम नहीं हो सके हैं। नि:संदेह तेजस एक कारगर लड़ाकू विमान साबित हो रहा है, लेकिन यह तथ्य ध्यान में रहे तो बेहतर कि उसमें लगे कुछ उपकरण दूसरे देशों के हैं। स्पष्ट है कि अगला लक्ष्य उसे पूरी तौर पर स्वदेशी और साथ ही कहीं अधिक उन्नत बनाने का होना चाहिए। यह संभव है, यदि हमारे विज्ञानियों और तकनीकी विशेषज्ञों को भरपूर प्रोत्साहन दिया जाए। यदि भारत अंतरिक्ष विज्ञान में अपनी छाप छोड़ सकता है और हर तरह की मिसाइलों के निर्माण में सक्षम हो सकता है तो फिर इसका कोई कारण नहीं कि अन्य प्रकार की रक्षा सामग्री तैयार करने में पीछे बना रहे। यह सही है कि स्वदेशी रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए तमाम नीतियां बनाई गई हैं, लेकिन यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता बनी हुई है कि उनके सकारात्मक नतीजे जल्द से सामने आएं।

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