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सेहतमंद देश का लक्ष्य: सेहतमंद नागरिक देश की एक बड़ी पूंजी होती है, स्वास्थ्य की चिंता प्राथमिकता के आधार पर की जानी चाहिएहमारे नीति-नियंताओं को इससे अवगत होना चाहिए कि मिलावटी अथवा मानकों की अनदेखी कर तैयार किए जाने वाले खाद्य पदार्थ देश को सेहतमंद बनाने के लक्ष्य में एक बड़ी बाधा हैं। यह बाधा दूर करने के लिए कोई अभियान छेड़ा जाना चाहिए।
Editorial4 months ago -
पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम आम आदमी के लिए मुसीबत, कीमतों पर लगाम लगाने के जतन की जरूरतपेट्रोलियम पदार्थों के बढ़ते दामों पर अंकुश लगाने के फौरी उपायों के साथ कुछ दीर्घकालिक कदम भी उठाए जाने चाहिए। पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम करने के लिए बिजली से चलने वाले वाहनों को अमल में लाना आनन-फानन में नहीं हो सकता।
Editorial4 months ago -
फिर सिर उठाता कोरोना: लापरवाही पड़ सकती है महंगी, प्रकोप खत्म नहीं हुआ, टीकाकरण में तेजी लाई जाएमेट्रो लोकल ट्रेनों और सार्वजनिक परिवहन के अन्य साधनों का उपयोग करने वालों को भी यथाशीघ्र टीका लगाया जाना चाहिए। चूंकि टीकाकरण की रफ्तार तेज करना जरूरी हो गया है इसलिए निजी क्षेत्र के अस्पतालों को भी टीकाकरण अभियान का हिस्सा ...
Editorial4 months ago -
नीति आयोग की बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा- निजी क्षेत्र के सहयोग के बगैर देश अपेक्षित प्रगति नहीं कर सकतासंकीर्ण स्वार्थों के फेर में उद्यमियों को बदनाम करने का अभियान छिड़ा हुआ है। यह उद्यमशीलता पर की जाने वाली चोट है। यदि देश को आगे ले जाना है तो केंद्र और राज्य सरकारों को निजी क्षेत्र विरोधी इस क्षुद्र राजनीति के खिलाफ डटकर ख...
Editorial4 months ago -
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भारतीय सेना के मजबूत इरादे और भारतीय नेतृत्व की दृढ़ता के चलते पैंगोंग झील से पीछे हटना चीन की शिकस्त का परिचायकचीन को उसकी हद में रखने के लिए यह आवश्यक है कि उसकी कमजोर नसों को दबाने में संकोच न किया जाए। सीमा पर यथास्थिति की सूरत बनने के बाद भी चीन पर भरोसा नहीं किया जाना चाहिए।
Editorial4 months ago -
पर्यावरण की आड़ में देश विरोधी ताकतों के मददगार बने दिशा रवि, निकिता और शांतनुआखिर इन्होंने बिना कुछ सोचे-समझे उनकी साजिश में शामिल होना क्यों स्वीकार कर लिया? क्या कोई इतना अज्ञानी हो सकता है कि चाय और योग के देश वाली भारत की छवि नष्ट करने के अभियान का मकसद न समझ पाए?
Editorial4 months ago -
रेल रोकने की जिद: कृषि कानून विरोधी आंदोलन के तहत रेल रोकने को लेकर किसान नेताओं के बीच उभरे मतभेदकृषि मंत्री के साथ प्रधानमंत्री बार-बार कह रहे हैं कि सरकार किसान नेताओं से नए सिरे से बात करने को तैयार है लेकिन वे सुप्रीम कोर्ट की भी सुनने को तैयार नहीं। वे ऐसा दिखा रहे हैं जैसे देश का समस्त किसान उनके पीछे खड़ा है।
Editorial4 months ago -
टीकाकरण का लक्ष्य: लोगों को जागरूक करने के साथ ही टीकाकरण अभियान की कमियों को दूर करने की जरूरतजो भी टीका लगवाने के इच्छुक हों उन्हेंं यह सुविधा हासिल करने दी जाए। निजी क्षेत्र के अस्पतालों को भी टीकाकरण करने की अनुमति प्रदान की जाए। उनका सहयोग जितनी जल्दी लिया जाए उतना ही अच्छा क्योंकि जिन्हेंं अभी टीका लगाया जाना है ...
Editorial4 months ago -
मनमानी पर लगे लगाम: फेसबुक और ट्विटर सरीखी कंपनियां निजता की रक्षा को लेकर सतर्क नहींफेसबुक और ट्विटर सरीखी कंपनियां जानबूझकर विमर्श को दूषित करने और अफवाहें फैलाने का काम कर रही हैं। हालांकि उनके पास इस सब पर रोक लगाने की तकनीक है लेकिन वे मनमानी का परिचय देने में लगी हुई हैं।
Editorial4 months ago -
नागरिकता संशोधन कानून पर राजनीतिक नासमझी उजागर करता कांग्रेस नेता राहुल गांधी का बयानराहुल गांधी ने यह तो स्वीकार किया कि असम में अवैध आव्रजन एक मसला है लेकिन वह यह नहीं बता सके कि इस मसले को कैसे सुलझाया जा सकता है? इससे यही पता चलता है कि कांग्रेस किस तरह समस्याओं को टालने और लटकाने का काम करती है।
Editorial4 months ago -
विरोध के बहाने मनमानी: लोकतंत्र धरना-प्रदर्शन का अधिकार देता है, लेकिन मनचाही जगह पर कब्जा नहीं किया जा सकताबेहतर हो कि सुप्रीम कोर्ट यह देखे कि उसका फैसला उन सभी विरोध प्रदर्शनों और आंदोलनों पर कैसे लागू हो जिनका मकसद आम जनता को कठिनाई में डालकर शासन-प्रशासन को झुकाना या फिर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकना होता है।
Editorial4 months ago -
हद पार करते राहुल: न सिर्फ पीएम मोदी के प्रति अभद्र भाषा का इस्तेमाल, बल्कि सेना का भी कर रहे अपमानराहुल गांधी प्रधानमंत्री के प्रति अपनी नफरत का परिचय देने के लिए सामान्य शिष्टाचार और सार्वजनिक जीवन की मर्यादा का उल्लंघन करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। उनके रवैये से यही लगता है कि वह फूहड़ता का परिचय देने से बाज आने वाल...
Editorial4 months ago -
लद्दाख में पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी छोरों से चीनी सैनिकों की वापसी, ड्रैगन की अकड़ हुई ढ़ीलीमौजूदा हालात में चीन पर एक सीमा से अधिक भरोसा नहीं किया जा सकता। उसने खुद अपनी हरकतों से भारत का भरोसा खोया है। यदि वह संबंधों में सुधार के लिए वास्तव में इच्छुक है तो फिर उसे सीमा विवाद सुलझाने में तत्परता और गंभीरता दिखानी ...
Editorial4 months ago -
प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा में नए कृषि कानूनों को लेकर विपक्ष को किया निरुत्तर, कांग्रेस को छोड़ना पड़ा सदनजब प्रधानमंत्री ने कृषि कानूनों में कमी बताने और नए सिरे से बात करने के लिए किसान नेताओं को आमंत्रित किया है तो उन्हेंं अपनी यह जिद छोड़कर आगे आना चाहिए कि इन कानूनों को वापस लिया जाए।
Editorial4 months ago -
पर्वतीय क्षेत्रों में विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए सजगता जरूरीपर्वतीय क्षेत्रों में विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन कायम रखने की बातें अर्से से की जा रही हैं लेकिन यही देखने में आ रहा है कि इसे लेकर अपेक्षित सजगता नहीं दिखाई जा रही है। प्राकृतिक संसाधनों का दोहन बिल्कुल ही न किया जाए।
Editorial4 months ago -
नए कृषि कानूनों पर विपक्ष के दुष्प्रचार पर प्रधानमंत्री मोदी ने किया जोर का प्रहार, कहा- आंदोलन राजनीति से प्रेरित हैआंदोलन भले ही किसानों के नाम पर चलाया जा रहा हो लेकिन वास्तव में यह उनके और खासकर छोटी जोत वाले 86 प्रतिशत किसानों के हितों की अनदेखी करने वाला है। यह आंदोलन राजनीति प्रेरित है और इसका मकसद सरकार को नीचा दिखाना है।
Editorial4 months ago -
उत्तराखंड में एक और आपदा, हिमखंड टूटने से नदियां उफान पर, ऋषिगंगा नदी पर निर्माणाधीन प्रोजेक्ट तबाहउत्तराखंड के चमोली जिले में हिमखंड टूटने से जो तबाही हुई उसने सात साल पहले केदारनाथ में आई उस भीषण आपदा की याद दिला दी जिसने बड़े पैमाने पर विनाश किया था। यह संतोषजनक है कि बचाव और राहत का काम युद्धस्तर पर जारी है।
Editorial4 months ago -
दिखने लगे झूठ के पैर: कृषि कानूनों के विरोध में बुलाए गए देशव्यापी चक्का जाम को नहीं मिला आम किसानों का समर्थनआम किसान यह जान रहे हैं कि नए कृषि कानून बिचौलियों के चंगुल से मुक्त करने और बाजार से जुड़ने का अवसर देने वाले हैं। किसान नेता आम किसानों के हितों की ही अनदेखी करने में लगे हुए हैं।
Editorial4 months ago -
किसानों और तीन नए कृषि कानूनों को लेकर संसद में बेनकाब होता विपक्ष, काले कानूनों में काला क्या है?विपक्षी दल यह बताने की स्थिति में नहीं कि कृषि कानूनों में खामी क्या है उसी तरह किसान संगठन भी यह स्पष्ट नहीं कर पा रहे हैं कि इन कानूनों में क्या खराबी है? वे केवल यही रट लगाए हैं कि तीनों कृषि कानूनों को वापस लिया जाए।
Editorial4 months ago -
किसान आंदोलन के दौरान मोदी के खिलाफ चलाए गए आपत्तिजनक हैशटैग को लेकर ट्विटर को दी गई चेतावनीअभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर ट्विटर ने भारत में राष्ट्रीय विमर्श को जिस बुरी तरह दूषित किया है उसकी मिसाल मिलना मुश्किल है। भारत सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि ट्विटर सरीखे प्लेटफॉर्म अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का बेज...
Editorial4 months ago















