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जागरूकता बढ़ाना जरूरी: ग्रामीणों में टीकाकरण को लेकर उत्साह नहीं, मास्क पहनना, शारीरिक दूरी, स्वच्छता पर रखना होगा ध्यानग्रामीण इलाकों में टीकाकरण को लेकर विशेष उत्साह नहीं है। कुछ इसके महत्व से परिचित नहीं तो कुछ अज्ञानता अंधविश्वास अथवा अफवाह के चलते टीका लगवाने से कतरा रहे हैं। इसकी चिंता जन प्रतिनिधियों को भी करनी चाहिए कि टीके को लेकर लोग...
Editorial1 month ago -
विपक्षी दल इस संकट काल में न तो राजनीतिक एकजुटता का परिचय देने के लिए तैयार और न ही अपनी जिम्मेदारी समझने के लिएप्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखने वाले नेताओं में कोरोना संकट से जूझ रही केंद्र सरकार की मदद करने में कहीं कोई दिलचस्पी नहीं इसका पता तीनों नए कृषि कानून रद करने के उनके सुझाव से भी लगता है। क्या इन कानूनों के कारण कोरोना फैल रहा ...
Editorial1 month ago -
जब देश में टीकाकरण की रफ्तार बढ़ाने की जरूरत है, तब कोविड रोधी टीकों की कमी सामने आना चिंताजनकटीकाकरण की मौजूदा रफ्तार संतोषजनक नहीं। हालांकि टीकाकरण की रफ्तार बढ़ाने के लिए यह भी आवश्यक है कि टीका लगवाने को लेकर लोगों की हिचक टूटे लेकिन पहली जरूरत तो टीके की कमी दूर करना है। प्रतिदिन लगभग एक करोड़ लोगों का टीकाकरण हो...
Editorial1 month ago -
टकराव की राह पर ममता: लगातार तीसरी बार जीतने के बाद ममता राजनीतिक विरोधियों के प्रति क्यों दिखा रहीं निष्ठुरताममता केवल राज्यपाल के आदेशों-अपेक्षाओं की अनदेखी ही नहीं कर रही हैं बल्कि केंद्र से तकरार कर रही हैं जब महामारी से निपटना उनकी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि यह सिलसिला थमा नहीं तो बंगाल का और नुकसान होना तय है।
Editorial1 month ago -
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टीकाकरण नीति सवालों के घेरे में, जितने टीके चाहिए, उतने उपलब्ध नहीं इसी कारण टीकाकरण की रफ्तार सुस्तआज की आवश्यकता यह है कि प्रतिदिन करीब एक करोड़ लोगों का टीकाकरण हो। निसंदेह यह संभव है लेकिन इसमें एक बड़ी बाधा टीकों की उपलब्धता है। यदि समय रहते टीकों की चिंता की जाती तो आज जो स्थिति है वह नहीं होती।
Editorial1 month ago -
कोई कसर न छोड़ें: कोरोना से जंग जीतने के लिए जरूरी है कम समय में ज्यादा से ज्यादा टीके उपलब्ध होंभारत बायोटेक से संपर्क कर संभावना टटोली जानी चाहिए कि क्या उसके टीकों का उत्पादन अन्य कंपनियां कर सकती हैं? इससे संतुष्ट नहीं हुआ जा सकता कि रूसी टीके स्पुतनिक का भारत में उत्पादन होने जा रहा है क्योंकि बात तो तब बनेगी जब वे ...
Editorial1 month ago -
बेलगाम संक्रमण: लॉकडाउन और तमाम सतर्कता के बाद भी कोरोना काबू में नहीं, राज्यों को समीक्षा करने की जरूरतटीके को लेकर लोगों की हिचक तोड़ने का काम तब प्रभावी ढंग से होगा जब उनकी उपलब्धता बढ़ाई जाए। भले ही 18 से 44 साल के लोगों के लिए टीकाकरण अभियान शुरू कर दिया गया हो लेकिन देश के अनेक हिस्सों में यह अभियान जमीन पर नहीं उतर सका ह...
Editorial1 month ago -
एकजुटता का अभाव: आरोप-प्रत्यारोप में उलझा राजनीतिक वर्ग को कोरोना संकट का मिलकर सामना करना चाहिएयह खेद का विषय है कि जब राजनीतिक वर्ग को एकजुट होना चाहिए और दिखना भी तब वह आरोप-प्रत्यारोप में उलझा हुआ है। खेदजनक यह है कि उच्चतर अदालतें भी सरकारों और उनके प्रशासन को सुझाव या मार्गदर्शन देने से ज्यादा उन्हें फटकारने में ल...
Editorial1 month ago -
संकट और समाधान: उच्चतर अदालतें सरकारों की ढिलाई को इंगित करने के साथ-साथ समस्या के समाधान के उपाय भी सुझाएंआक्सीजन की कालाबाजारी और उसके सिलेंडरों की जमाखोरी तत्काल प्रभाव से रोकने के साथ जो एक और काम प्राथमिकता के साथ करने की जरूरत है वह है टीकाकरण की रफ्तार तेज करने का। टीकाकरण में ढिलाई बरती गई तो हालात पर काबू पाना और कठिन होग...
Editorial1 month ago -
बंगाल को बचाओ: शर्मिंदा करने वाली बंगाल की बेलगाम राजनीतिक हिंसा, तृणमूल राजनीतिक विरोधियों के दमन पर आमादालोग मारे जा रहे पीटे जा रहे घर और दुकानें जलाई जा रही हैं लेकिन तृणमूल कांग्रेस ऐसे व्यवहार कर रही है जैसे कहीं कुछ हुआ ही न हो। यह तो वह रवैया है जो बंगाल को बर्बादी की ओर ही ले जाएगा।
Editorial1 month ago -
अस्पतालों की आपराधिक लापरवाही: ऑक्सीजन की किल्लत से कोरोना मरीजों के दम तोड़ने का सिलसिला कायम रहना शर्मनाक हैयह सुनिश्चित करना चाहिए कि अस्पताल ऑक्सीजन जैसी जरूरी चीज से भली तरह लैस हों क्योंकि इसका भरोसा नहीं कि संक्रमण की तीसरी लहर कब दस्तक दे दे। अस्पतालों के नाकारापन के लिए जांच-परख की जिम्मेदारी वाला तंत्र भी दोषी है।
Editorial1 month ago -
India Coronavirus Updates : कोरोना महामारी से 3,417 और लोगों ने दम तोड़ा, सक्रिय मामले 34.13 लाखभारत में बीते सात अगस्त को कोरोना संक्रमण के मामले 20 लाख के पार हुए थे। जबकि 50 लाख मामले 16 सितंबर को एक करोड़ का आंकड़ा 19 दिसंबर को पार हुआ। वहीं डेढ़ करोड़ का आंकड़ा 19 अप्रैल को पार हुआ।
Editorial1 month ago -
पश्चिम बंगाल में ममता ने तीसरी बार 200 पार के साथ की सत्ता हासिल, खुद की हार ने पार्टी की जीत को किया फीकाबंगाल में कभी दूसरे नंबर पर रही कांग्रेस आज यदि हाशिये पर चली गई है तो अपने कर्मों के कारण। पांच राज्यों के चुनाव नतीजों के बाद कांग्रेस की राष्ट्रीय राजनीति में हैसियत और घटना तय है। वह केवल अपना ही नहीं विपक्ष का भी नुकसान ...
Editorial1 month ago -
तेजी से पैर पसारता जा रहा कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर को थामने के लिए सख्ती और बढ़ाई जाने की आवश्यकताकोरोना संक्रमण की तीसरी लहर से तभी बचा जा सकता है जब अगले दो-ढाई माह में 50-60 करोड़ लोगों को टीके लग जाएं। यह एक कठिन लक्ष्य अवश्य है लेकिन असंभव नहीं। इस कठिन लक्ष्य की पूर्ति के लिए मजबूत इरादों के साथ सुनियोजित रणनीति भी ज...
Editorial1 month ago -
क्या टीकों की उपलब्धता का अनुमान लगाए बगैर अगले चरण के टीकाकरण की घोषणा कर दी गई?माना जा रहा है कि संक्रमण की तीसरी लहर आने में 40-50 दिन का ही समय शेष है। जो भी हो यह सुनिश्चित करना बहुत आवश्यक है कि संक्रमण की तीसरी लहर आने के पहले कम से कम 50-60 करोड़ लोगों को टीके अवश्य लग जाएं।
Editorial1 month ago -
मदद को बढ़े हाथ: कोरोना संक्रमण से जूझ रहे भारत की ओर अमेरिका, रूस समेत 40 देशों ने मदद करने को बढ़ाए हाथकम समय में अधिक से अधिक लोगों का टीकाकरण करके ही मौजूदा संकट से उबरने के साथ ही संक्रमण की तीसरी लहर की आशंका को भी कम किया जा सकता है। जब सरकार और समाज एकजुट होंगे तभी संकट से आसानी से पार पाया जा सकेगा।
Editorial1 month ago -
युद्धस्तर पर लगें टीके: टीकाकरण केंद्र बढ़ाए जाएं, रोजाना एक करोड़ लोगों के टीकाकरण का रखना होगा लक्ष्यअगले चरण के टीकाकरण के लिए पंजीकरण शुरू होते ही जैसी दिलचस्पी दिखाई गई उससे पता चलता है कि लोग टीका लगवाने को उत्सुक हैं। सभी बालिग टीका लगवाने के लिए उत्सुक बने रहें इसके लिए आवश्यक है कि पंजीकरण से लेकर टीकाकरण की प्रक्रिया...
Editorial1 month ago -
कोरोना संकट से उपजे हालात पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से जूझ रहे तंत्र का मनोबल गड़बड़ा सकता हैकोरोना संकट से उपजे हालात पर सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी की कोई आवश्यकता नहीं थी कि वह मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकता। ऐसी कोई टिप्पणी तो तब मायने रखती जब यह सवाल उठा होता कि आखिर इस राष्ट्रीय संकट के समय शीर्ष न्यायपालिका क्या क...
Editorial1 month ago -
जर्जर स्वास्थ्य ढांचे को सुधारने के बजाय मुफ्त टीकाकरण लोक-लुभावन कदम हो सकता है, लेकिन सुविचारित नहींस्वास्थ्य ढांचे की दयनीय दशा का ही परिणाम है कि संक्रमण की जांच के लिए लंबी कतारें और जांच रपट मिलने में चार-चार दिन लग रहे हैं। न कि जो पैसे देकर टीका लगवाने को तैयार हैं उनका भी मुफ्त टीकाकरण कराने की घोषणा कर वाहवाही लूटने...
Editorial1 month ago -
आपदा पर ओछी राजनीति: अगले चरण के कोरोना टीकाकरण पर कांग्रेस-शासित राज्य साध रहे हैं संकीर्ण राजनीतिक हितवैसे तो कोई भी दल ऐसा नहीं जिसने कोरोना संकट के समय संकीर्ण राजनीति का परिचय न दिया हो लेकिन इस मामले में कांग्रेस को पता ही नहीं कि गहन संकट के समय राजनीतिक क्षुद्रता का परिचय देकर अपयश के अलावा और कुछ हासिल नहीं किया जा सकत...
Editorial2 months ago
















