कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के जल्द चरम पर पहुंचने के अनुमान पर एक सीमा तक ही यकीन किया जाना चाहिए। हो सकता है कि यह अनुमान सही साबित न हो। वैसे भी पहले यह माना जा रहा था कि अप्रैल के अंत में संक्रमण चरम पर होगा। आज की पहली जरूरत संक्रमण को थामना और कोरोना मरीजों को उपचार उपलब्ध कराना है। देखते ही देखते प्रतिदिन संक्रमण की चपेट में आने वालों की संख्या जिस तरह चार लाख के आंकड़े को पार कर गई, उससे न केवल यह पता चलता है कि संक्रमण बहुत तेज है, बल्कि यह भी कि तमाम उपायों के बाद भी लोग संक्रमित होने से बच नहीं पा रहे हैं। बेहतर होगा कि संक्रमण को थामने के लिए सख्ती और बढ़ाई जाए। राज्य सरकारों और उनके प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि लोग बिना मास्क घर से न निकलें और शारीरिक दूरी का हर हाल में पालन करें। भीड़-भाड़ वाले स्थानों में तो शारीरिक दूरी का पालन अनिवार्य रूप से होना चाहिए। इसी के साथ इसकी भी चिंता करनी होगी कि आवश्यक सतर्कता बरतते हुए उद्योग-धंधे भी चलते रहें। वैसे तो लाॅकडाउन अंतिम उपाय होना चाहिए, लेकिन जहां इसका सहारा लेना पड़े, वहां यह भी देखा जाए कि आर्थिक-व्यापारिक गतिविधियां थमने न पाएं। ऐसा संभव है, यदि आम लोग सहयोग दें और अपनी सतर्कता का स्तर बढ़ाएं। जब जीवन-मरण का प्रश्न खड़ा हो जाए तो वह सब कुछ करना चाहिए, जो अपेक्षित और आवश्यक हो।

यह बुनियादी बात समझी जानी चाहिए कि संक्रमण की तेज लहर को थामने का उपाय यही है कि कम से कम लोग उसकी चपेट में आएं। नि:संदेह शासन और समाज को संक्रमण की दूसरी लहर से जूझने में पूरी शक्ति खपाने के साथ तीसरी लहर की भी चिंता करनी होगी और इस क्रम में सबसे अधिक ध्यान कम समय में ज्यादा से ज्यादा लोगों के टीकाकरण पर देना होगा। यह अच्छी बात नहीं कि 18 साल से ऊपर वालों के टीकाकरण का अभियान सही ढंग से शुरू नहीं हो पाया, क्योंकि टीकों की कमी आड़े आ गई। कम से कम अब तो यह सुनिश्चित किया जाए कि टीकों का उत्पादन तेजी से बढ़े और उनकी आर्पूित की व्यवस्था भी दुरुस्त हो। टीकों का उत्पादन बढ़ाने के साथ उनके आयात की हर संभावना को टटोलने में भी देर नहीं की जानी चाहिए, क्योंकि कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर से तभी बचा जा सकता है, जब अगले दो-ढाई माह में 50-60 करोड़ लोगों को टीके लग जाएं। यह एक कठिन लक्ष्य अवश्य है, लेकिन असंभव नहीं। इस कठिन लक्ष्य की पूर्ति के लिए मजबूत इरादों के साथ सुनियोजित रणनीति भी जरूरी है।

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