लखनऊ में हिंदू समाज पार्टी के नेता कमलेश तिवारी की दिन दहाड़े हत्या दहशत फैलाने वाली तो है ही, कानून एवं व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाली भी है। उत्तर प्रदेश पुलिस की मानें तो कमलेश तिवारी की हत्या 2015 में दिए गए उनके आपत्तिजनक बयान के कारण हुई। अगर वास्तव में ऐसा है तो इसे एक किस्म की आतंकी कार्रवाई ही कहा जाएगा। हिंदू समाज पार्टी के दफ्तर में कमलेश तिवारी की हत्या पेरिस में एक पत्रिका के दफ्तर में हुए हमले की याद दिलाने वाली है। कमलेश तिवारी के हत्यारों ने यही दहशत भरा संदेश देने की कोशिश की है कि अगर कोई उन्हें ठेस पहुंचाने वाली बातें करेगा तो वे उसे जिंदा नहीं छोड़ेंगे।

हिंदू समाज पार्टी का गठन करने के पहले कमलेश तिवारी हिंदू महासभा के नेता के तौर पर भी सक्रिय थे। इसी दौरान पैगंबर साहब को लेकर की गई अपनी एक टिप्पणी के कारण वह न केवल विवादों से घिरे, बल्कि माहौल खराब करने के आरोप में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत जेल भी भेजे गए। उसी समय यह साफ हो गया था कि जेल जाने के बाद भी उनकी जान को लेकर जोखिम पैदा हो गया है, क्योंकि कुछ कट्टरपंथी मौलाना-मौलवी सड़कों पर उतर कर उनके सिर पर ईनाम रखने में लगे हुए थे। क्या यह अजीब नहीं कि कमलेश तिवारी के सिर ईनाम रखने वालों से पूछताछ करने की जरूरत अब समझी जा रही है?

यह भी एक विडंबना ही रही कि कमलेश तिवारी को तो रासुका के तहत गिरफ्तार किया गया, लेकिन उनका सिर कलम करने की जरूरत जताने वालों का कुछ नहीं बिगड़ा। इससे कानून के शासन का उपहास ही उड़ा। वास्तव में जब भी ऐसा होता है तो कानून के राज को चुनौती देने वालों का दुस्साहस बढ़ता है। अंदेशा यही है कि कमलेश तिवारी की हत्या के पीछे ऐसे ही दुस्साहसी तत्वों का हाथ है। यह कोई छिपी बात नहीं थी कि कमलेश तिवारी की जान को खतरा है। उन्हें लगातार धमकियां मिल रही थीं। गुहार लगाने के बाद उन्हें सुरक्षा तो मिली, लेकिन हत्यारों के आसानी से उन तक पहुंच जाने से यही लगता है कि वह महज खानापूरी करने वाली ही थी।

इससे संतुष्ट नहीं हुआ जा सकता कि पुलिस हत्यारों तक पहुंचने का दावा कर रही है, क्योंकि जरूरी यह है कि उन्हें जल्द से जल्द ऐसी सजा मिले जो हर तरह के उन्मादी तत्वों को सबक सिखाए। आपत्तिजनक बयानों का कोई समर्थन नहीं कर सकता, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि ऐसे बयान देने वालों की जान के पीछे पड़ जाने वाले तत्वों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने में हीलाहवाली की जाए।

Posted By: Bhupendra Singh

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