तृणमूल कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में से एक और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बाद लंबे समय तक पार्टी में सेकेंड इन कमान कहे जाने वाले मुकुल रॉय आखिरकार तृणमूल से दूर हो गए। पिछले दो माह से मुकुल को लेकर तरह-तरह की खबरें आ रही थीं। वह भाजपा में जा रहे हैं तो कभी अलग पार्टी बना रहे हैं। इस बीच ममता लगातार मुकुल को तृणमूल में हैसियत कम करती गईं और आखिर कर उनका मोहभंग हो गया। दुर्गापूजा के पंचमी (सोमवार) को उन्होंने तृणमूल वर्किंग कमेटी से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद बिना देर किए हुए तृणमूल प्रमुख ने पार्टी महासचिव पार्थ चटर्जी के माध्यम से उन्हें दल के सभी पदों से छह वर्ष के लिए निलंबित घोषित कर दिया। पहले मुकुल ने संवाददाता सम्मेलन कर तृणमूल कार्यसमिति का सदस्य पद छोडऩे की घोषणा की। इसके बाद तृणमूल महासचिव पार्थ चटर्जी ने मुकुल को छह वर्ष के लिए पार्टी से निलंबित करने की घोषणा की। वैसे मुकुल ने कहा है कि वह दुर्गापूजा बाद राज्यसभा के सदस्य पद से भी इस्तीफा दे देंगे, तब बताएंगे कि वह पार्टी से क्यों अलग हुए। सारधा चिटफंड घोटाला में जब सीबीआइ ने मुकुल से पूछताछ शुरू की थी, उसी समय उनका ममता से मतभेद हो गया था। परंतु, बाद में स्थिति सामान्य होने लगी। 2016 के विधानसभा सभा चुनाव में सक्रिय भी रहे। परंतु, बाद में ममता की मुकुल पर भृकुटि फिर तन गई। इसके बाद से मुकुल के भाजपा में शामिल होने की चर्चा छिड़ी थी। इसी माह ममता ने पार्टी कोर कमेटी की बैठक में भी नाम लिए बिना कहा था कि जो लोग भाजपा में जाना चाहते हैं वह जा सकते हैं। इससे पहले संसद की स्थाई समितियों से मुकुल को हटाया गया। कुछ दिन पहले उन्हें पार्टी के उपाध्यक्ष पद से भी हटा दिया गया। तीन दिन पहले पार्थ ने कहा था कि मुकुल की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। इसके बाद उन्होंने जेड श्रेणी की सुरक्षा भी छोड़ दी। तृणमूल और दूसरे दलों के बागी व अन्य असंतुष्ट नेताओं के संपर्क में भी मुकुल हैं। वैसे तो चर्चा है कि मुकुल अपने समर्थकों के साथ भाजपा में शामिल होंगे, लेकिन भाजपा शीर्ष नेतृत्व इसे सिरे से खारिज करते आ रहे हैं। वैसे मुकुल अब क्या करेंगे और उनका राजनीतिक भविष्य क्या होगा? इसका खुलासा अभी उन्होंनें नहीं किया है।
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(हाईलाइटर:: वैसे मुकुल ने कहा है कि वह दुर्गापूजा बाद राज्यसभा के सदस्य पद से भी इस्तीफा दे देंगे। जब वह सांसद पद छोड़ेंगे तब बताएंगे कि वह पार्टी से क्यों अलग हुए।) 

[ स्थानीय संपादकीय: पश्चिम बंगाल ]

Posted By: Bhupendra Singh

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