पाकिस्तान में जासूसी के आरोप में बंदी भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव के मामले में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का फैसला भारत को एक बड़ी राहत देने वाला है। यह न्यायालय बहुमत से इस नतीजे पर पहुंचा कि एक तो कुलभूषण जाधव को राजनयिक मदद मिलनी चाहिए और दूसरे, पाकिस्तान को उन्हें सुनाई गई सजा की समीक्षा करनी चाहिए। इस मामले में भारत का पक्ष सही था, यह इससे साबित होता है कि केवल एक को छोड़कर शेष सभी न्यायाधीश इस पर एकमत रहे कि पाकिस्तान ने कुलभूषण जाधव की गिरफ्तारी के बारे में भारत सरकार को समय पर सूचना न देकर वियना संधि का उल्लंघन किया। यह उल्लेखनीय है कि बहुमत से दिए गए इस फैसले में चीन के भी जज शामिल थे। इस पर हैरानी नहीं कि जो एकलौते जज फैसले से सहमत नहीं हुए वह पाकिस्तान के थे।

कुलभूषण जाधव पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का फैसला भारत की कूटनीतिक और साथ ही कानूनी जीत है। कुलभूषण को बचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय न्यायालय जाया जाए या नहीं, इस हिचक को तोड़ते हुए मोदी सरकार ने जिस कूटनीतिक साहस का परिचय दिया उसे और बल दिया वकील हरीश साल्वे की दलीलों ने। उनकी ही दलीलों को सुनकर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने पाकिस्तान को यह आदेश दिया था कि वह कुलभूषण को सुनाई गई फांसी की सजा पर अमल न करे। इसी आदेश के बाद पाकिस्तान कुलभूषण के परिजनों को अपने यहां आने की इजाजत देने के लिए बाध्य हुआ था, लेकिन इसके बावजूद अंतिम फैसला उसके पक्ष में नहीं आया।

इस पर आश्चर्य नहीं कि कुलभूषण की फांसी की सजा पर रोक के अंतरिम फैसले के बाद पाकिस्तान ने जिस तरह यह प्रदर्शित किया था कि उसका पक्ष मजबूत है उसी तरह वह ताजा फैसले को भी अपने हक में बताने की कोशिश कर रहा है। स्पष्ट है कि वह सार्वजनिक तौर पर यह स्वीकार करने से कतरा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने कुलभूषण को राजनयिक मदद उपलब्ध कराने के साथ ही यह रेखांकित किया है कि उन्हें दी गई फांसी की सजा की प्रभावी ढंग से समीक्षा करने के साथ ही उस पर नए सिरे से विचार किया जाए।

नि:संदेह इसका अर्थ यही है कि अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने पाकिस्तान की सैन्य अदालत के उस फैसले को संदेहास्पद पाया जिसके तहत कुलभूषण को आतंकवाद फैलाने का दोषी करार देकर फांसी की सजा सुना दी गई थी। यह सही है कि अतीत में कुछ समर्थ देशों ने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के फैसलों की अनदेखी की है, लेकिन पाकिस्तान की न तो इतनी हैसियत है और न ही हिम्मत कि वह ऐसा कुछ करने की सोच सके। पाकिस्तान आंतरिक संकट से दो-चार होने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय दबाव का सामना कर रहा है। इसी दबाव के चलते उसने आतंकी सरगना हाफिज सईद की एक और बार गिरफ्तारी का दिखावा किया है। भारत को इस दिखावे को उसकी चालबाजी के रूप में ही देखना होगा। इसी के साथ यह भी जतन करना होगा कि कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान के चंगुल से कैसे छुड़ाया जाए? अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के फैसले ने पाकिस्तान पर दबाव बनाने का जो अवसर दिया है उसका पूरा लाभ उठाया जाना चाहिए।

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Posted By: Bhupendra Singh