उत्तराखंड को अलग राज्य के रूप में 17 साल बीत गए। इस अरसे में प्रदेश खेल की दुनिया में प्रदेश से तमाम प्रतिभाओं ने अपने हुनर का लोहा मनवाया। बावजूद इसके सरकारी स्तर पर सुविधाएं और इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में स्थिति दयनीय ही रही है। यही वजह है कि राज्य के नामी-गिरामी खिलाड़ियों ने दूसरे राज्यों का रुख किया। आलम यह है कि आइपीएल में उत्तराखंड के खिलाड़ियों का सिक्का जमने के बाद भी यह उपलब्धि प्रदेश के खाते में नहीं है। क्रिकेट को लेकर बीसीसीआइ के स्तर पर भले ही उम्मीदें परवान चढ़ने लगी हों, लेकिन राज्य की एसोसिएशनों के बीच चल रही रस्साकसी से इन उम्मीदों को परवाज भरने में परेशानी हो रही है। अफगानिस्तान की क्रिकेट टीम देहरादून के राजीव गांधी स्टेडियम को अपना होम ग्राउंड बनाने जा रही है। इसे भी एक उपलब्धि के तौर पर देखा जा सकता है। दिल्ली में आयोजित खेला इंडिया स्कूल गेम्स में 11वें स्थान पर रहे उत्तराखंड की प्रतिभाओं ने साबित कर दिया कि अवसर मिले तो वे किसी से कम नहीं हैं। इस प्रतियोगिता में प्रदेश के खिलाड़ियों ने कुल 12 पदक कब्जाए और इनमें से पांच स्वण हैं। इससे इतना तो साफ है कि कमी खिलाड़ियों में नहीं, कहीं और है।

दरअसल, जरूरत इस बात की है कि खेल एसोसिएशनें और सरकार अपने दायित्वों का निर्वहन जिम्मेदारी के साथ करें। ज्यादा अरसा नहीं बीता जब राष्ट्रीय स्तर की हॉकी खिलाड़ी ने सरकार से मिली इनाम की धनराशि ठुकरा दी। उसने प्रदेश से खेलने की बजाए रेलवे को तवज्जो दी। यह अच्छी बात है कि सरकार ने अब खेलों को लेकर गंभीरता दिखानी शुरू की है। राष्ट्रीय खेलों के लिए तैयारी कर रहे राज्य में खेल महाकुंभ जैसे आयोजन शुरू किए जाने लगे हैं। जरूरत सिर्फ आयोजनों की ही नहीं, बल्कि खिलाड़ियों को मिली वाली सुविधाओं की भी है। इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रशिक्षण की उचित व्यवस्था के बिना प्रतिभाओं को तराशना आसान नहीं है। अब तक जिन खिलाड़ियों ने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है, उसमें सिस्टम का योगदान उतना नहीं रहा, जितना उनके व्यक्तिगत प्रयास। कोरिया में शीतकालीन प्रतियोगिता में शिरकत कर रही उत्तरकाशी की रेखा चौहान की मदद के लिए उसके स्कूल के शिक्षक आगे आए और 30 हजार रुपये की मदद की। ऐसे में आवश्यकता यही है कि खेलों के लिए ऐसा वातावरण तैयार किया जाए कि खिलाड़ियों को मदद के लिए मुंह न ताकना पड़े।

[ स्थानीय संपादकीय: उत्तराखंड ] 

Posted By: Sanjay Pokhriyal