अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के बाद विश्व बैंक ने भी चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की विकास दर का अनुमान जिस तरह घटाया उस पर हैरत नहीं। बीते कुछ समय से एक के बाद एक संस्थाएं यही बता रही हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था सुस्ती में जकड़ रही है। चंद दिनों पहले भारतीय रिजर्व बैंक ने भी विकास दर का अनुमान 6.8 प्रतिशत से घटाकर 6.1 प्रतिशत कर दिया है। इन स्थितियों में अर्थव्यवस्था की सुस्ती को नकारने का कोई मतलब नहीं। ध्यान रहे कि किसी भी समस्या का सही तरह सामना तभी किया जा सकता है जब उसकी मौजूदगी को स्वीकार किया जाए।

आखिर आर्थिक सुस्ती को नकारने वाले इसकी अनदेखी कैसे कर सकते हैं कि एक के बाद एक आंकड़े यही गवाही दे रहे हैं कि आर्थिक विकास की गति धीमी पड़ गई है, बात चाहे जीएसटी संग्रह में लगातार कमी की हो या फिर विभिन्न क्षेत्रों में आ रही गिरावट की। इससे इन्कार नहीं कि पिछले एक माह में वित्त मंत्रालय और साथ ही रिजर्व बैंक की ओर से मंदी के माहौल को दूर करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं, लेकिन उनके सकारात्मक नतीजे आने में समय लग सकता है। यह स्वाभाविक है, क्योंकि इतने बड़े देश की अर्थव्यवस्था का पहिया तेजी से घूमने में समय तो लगेगा ही। वक्त की मांग यही है कि सरकार यह सुनिश्चित करे कि उसकी ओर से अर्थव्यवस्था को गति देने के जो उपाय किए जा रहे हैं वे प्रभावी साबित हों। उसे यह भी आकलन करना चाहिए कि और उपायों की आवश्यकता तो नहीं है? उसे कारोबार जगत र्की ंचता करने के साथ ही यह भी देखना चाहिए कि कृषि क्षेत्र की हालत कैसे सुधरे?

यह ठीक नहीं कि कृषि क्षेत्र में सुधार के तमाम उपायों के बावजूद स्थितियां बदलती हुई नहीं दिख रही हैं। कृषि क्षेत्र में सुधार लाए बिना अर्थव्यवस्था को मजबूती देना कठिन है। विश्व बैंक के अनुसार आर्थिक सुस्ती का मूल कारण घरेलू मांग में कमी है। कृषि की हालत सुधार कर मांग की इस कमी को दूर किया जा सकता है। चूंकि रोजगार के नए अवसर भी मांग की कमी दूर करने में सहायक बनेंगे इसलिए सरकार को बेरोजगारी दूर करने के उपायों पर भी विशेष ध्यान देना होगा।

सरकार को इसके प्रति भी सक्रिय होना चाहिए कि आर्थिक सुस्ती की अवधि कम से कम हो। हालांकि विश्व बैंक का यह आकलन राहतकारी है कि अगले वित्त वर्ष में भारत की अर्थव्यवस्था तेजी पकड़ेगी और वह 6.9 और फिर उसके अगले वर्ष 7.2 फीसद तक पहुंच जाएगी, लेकिन सरकार को वे सभी उपाय तो करने ही होंगे जो मौजूदा माहौल को बेहतर बनाने का काम करें।

Posted By: Bhupendra Singh

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