राज्यों के स्वास्थ्य मंत्रियों के साथ बैठक कर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने कोविड रोधी टीके की दूसरी खुराक देने पर जो जोर दिया, वह समय की मांग है। नि:संदेह सौ करोड़ टीके के लक्ष्य की प्राप्ति एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन इसकी अनदेखी भी नहीं की जा सकती कि टीके की दूसरी खुराक लेने वालों की संख्या उतनी नहीं, जितनी होनी चाहिए। जहां पहली खुराक लेने वालों का प्रतिशत 75 से अधिक है, वहीं दूसरी खुराक लेने वाले 32 प्रतिशत के ही आसपास है।

यह अंतर इसलिए भी चिंतित करने वाला है, क्योंकि ऐसे तथ्य सामने आ रहे हैं कि दूसरी खुराक का समय बीत जाने के बाद भी तमाम लोग उसे लेने नहीं आए। इसका अर्थ है कि जिन लोगों ने टीके की पहली खुराक लेने में दिलचस्पी दिखाई, वे दूसरी खुराक लेने में आनाकानी कर रहे हैं। ऐसा क्यों है, इसका जवाब खोजा जाना चाहिए। इसमें उन राज्य सरकारों और उनके प्रशासन को कहीं अधिक सक्रियता दिखानी होगी, जहां टीकाकरण की रफ्तार धीमी है। अब जब पर्याप्त संख्या में टीके उपलब्ध हैं और टीकाकरण के लाभ भी दिख रहे हैं, तब फिर इसका कोई कारण नहीं कि टीका लगाने का अभियान और अधिक गति न पकड़े।

लोगों को न केवल टीके की दूसरी खुराक समय पर लेने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए, बल्कि जिन्होंने एक भी खुराक नहीं ली है, उन्हें भी टीकाकरण की महत्ता समझाई जानी चाहिए। इसमें सरकारों के साथ आम लोगों और खासकर समाज का किसी भी रूप में प्रतिनिधित्व करने वालों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्हें अपनी इस भूमिका का निर्वाह करना ही चाहिए। यह राष्ट्रीय कर्तव्य है। आम लोगों को भी यह समझना होगा कि वे टीके की पहली-दूसरी खुराक लेने में देरी कर अपनी और साथ ही दूसरों की सेहत के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं।

राज्य सरकारों को चाहिए कि वे उन इलाकों की पहचान कर वहां विशेष अभियान चलाएं, जहां अपेक्षाकृत कम टीकाकरण हुआ है। लोगों को टीका लेने के लिए प्रेरित-प्रोत्साहित करने के साथ ही ऐसे भी कदम उठाए जाने चाहिए, जिससे वे आनाकानी न करने पाएं। वास्तव में यह संदेश दिए जाने की आवश्यकता है कि जो टीका नहीं लगवाएंगे, उन्हें कुछ सुविधाओं और रियायतों से वंचित किया जा सकता है। अब जब करोड़ों लोगों ने टीके लगवा लिए हैं तब फिर इसका कोई औचित्य नहीं कि शेष लोग टीका लगवाने में हिचकिचाएं। टीकाकरण अभियान को और तेज करने एवं सघन बनाने की आवश्यकता इसलिए भी है, क्योंकि कोरोना संक्रमण के सिर उठा लेने का खतरा अभी भी बरकरार है।

Edited By: Tilakraj