जम्मू शहर में चौबीस घंटों में तीन नाबालिग बच्चियों से दुष्कर्म की घटनाएं शर्मनाक हैं। इससे साफ है कि गत डेढ़ वर्ष से देशभर में दुष्कर्म की घटनाओं को रोकने के लिए सरकार ने जो भी कदम उठाए वे अपर्याप्त हैं और समाज पर उनका कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। विगत दिवस जो घटनाएं घटित हुई, उनमें निजी स्कूल के चौकीदार ने ही शहर के ग्रेटर कैलाश में दो सगी नाबालिग बहनों को अपनी हवस का शिकार बनाया, जबकि दूसरी घटना नई बस्ती में हुई जहां एक युवक ने तीन वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म किया। दुष्कर्म की एक महीने में राच्य भर में दस से अधिक घटनाएं दर्ज हो चुकी हैं। नाबालिग बच्चियों व महिलाओं के साथ जिस तरह दुष्कर्म व अपराध की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई हैं, उसने एक ओर पुलिस की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लगाए हैं तो वहीं सामाजिक मूल्यों में आ रही गिरावट को भी उजागर किया है। डेढ़ वर्ष पहले दिल्ली में दामिनी के साथ हुए दुष्कर्म के बाद जिस प्रकार पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हुए और केंद्र से लेकर राज्य सरकार ने भी ऐसी घटनाओं पर रोक के लिए कड़े कानून बनाए तो कहीं न कहीं यह उम्मीद बंधी थी कि इससे समाज पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। हां, सरकार की इस दौरान सबसे बड़ी कमी नैतिक मूल्यों की ओर कोई विशेष ध्यान न देना रही। यह सर्वविदित है कि कुछ वर्षो से प्रतिस्पर्धा के दौर में सभी नैतिक मूल्यों को भुलते जा रहे हैं। स्कूलों व कॉलेजों में नैतिक मूल्यों पर विषय शुरू करने पर मुख्यमंत्री से लेकर शिक्षा मंत्री तक ने चर्चा की, लेकिन विषय शुरू करने पर कोई फैसला नहीं कर पाए। समाज में जिस प्रकार से दुष्कर्म की घटनाएं बढ़ रही हैं, उसे देखते हुए सरकार को इस दिशा में पहल करने की जरूरत है। वहीं, ऐसी घटनाओं से हमारी लचर कानून व्यवस्था पर भी प्रश्न चिन्ह लगता है। अगर हम सिर्फ जम्मू जिले की ही बात करें तो कुछ महीनों में अपराध की घटनाओं में काफी वृद्धि हुई है। अधिकांश मामलों में पुलिस किसी ठोस परिणाम पर नहीं पहुंच पाई है। यही नहीं पुलिस अगर मामला हल करने का दावा भी करती है तो उसे कोर्ट में साबित नहीं कर पाती। इससे लोगों का भी पुलिस पर से विश्वास कम होता जा रहा है। विडंबना यह है कि सरकार अभी तक पर्याप्त संख्या में महिला थाने भी नहीं खोल पाई है। इस कारण कई पीड़ित महिलाएं लोक लज्जा व महिला थानों के अभाव में पुलिस तक अपनी शिकायत लेकर पहुंच ही नहीं पाती और अपराधियों के हौसले बढ़ते जा रहे हैं। सरकार को चाहिए कि वे इन घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए न सिर्फ कड़े कानून बनाए बल्कि समाज को जागरूक करने के लिए भी कदम उठाए। वहीं समाज के हर वर्ग का यह दायित्व बनता है कि अगर उसके सामने कभी कोई किसी महिला या बच्ची के साथ छेड़छाड़ करता हुआ मिलता है तो उसका विरोध करे और तुरंत पुलिस को सूचित कर अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचाए ताकि अपराध मुक्तसमाज का निर्माण हो सके।

[स्थानीय संपादकीय: जम्मू-कश्मीर]

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