बंगाल में भाजपा अपनी जमीन मजबूत करने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है। पिछले तीन वर्षों में भाजपा ने प्रभाव विस्तार करने में कुछ सफलता भी अर्जित की है। परंतु, ऐसी स्थिति नहीं बन सकी है कि वह तृणमूल कांग्रेस को परास्त कर सके। इसकी वजह भी है। सांगठनिक कमजोरी से लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को टक्कर देने वाले करिश्माई चेहरे का अभाव। ऐसे में ममता की तृणमूल में स्थापना से लेकर दो वर्ष पहले तक नंबर दो की हैसियत रखने वाले मुकुल रॉय ने पार्टी को अलविदा कह दिया है। कयास यह हैं कि मुकुल का नया राजनीतिक ठिकाना भाजपा हो सकता है। अगर ऐसा हुआ तो असम के बाद दूसरे पूर्वोत्तर राज्य यानी बंगाल में भाजपा को एक चेहरा मिल जाएगा। क्योंकि, ठीक इसी तरह 2015 में असम में कांग्र्रेस से हेमंत विस्वा भाजपा में आए थे और वहां विधानसभा चुनाव में भाजपा ने बड़ी सेंध लगाई थी। हालांकि, बंगाल में सियासी स्थिति थोड़ी अलग है। मुकुल का सारधा चिटफंड घोटाले से लेकर नारद स्टिंग कांड में नाम आ चुका है। सीबीआइ पूछताछ भी कर चुकी है। प्रदेश भाजपा से लेकर कई केंद्रीय नेता रॉय पर चुनाव प्रचार या फिर संवाददाता सम्मेलन निशाना साधते रहे हैं। ऐसे में यदि भाजपा मुकुल को पार्टी में शामिल कराती है तो विपक्षी दलों खासकर माकपा व कांग्र्रेस को एक नया हथियार मिल जाएगा। भ्रष्टाचार पर भाजपा बार-बार जीरो टॉलरेंस की बात करती रही है। 2014 के लोकसभा व 2016 के विधानसभा चुनाव में चिटफंड घोटाले से लेकर नारद स्टिंग तक को भाजपा ने मुद्दा बनाया था। ऐसे में उसी घोटाले में जिस नेता का नाम जुड़ा है और उसी को भाजपा शामिल कराती है तो सवाल उठना लाजिमी है। यही भाजपा का लिए असमंजस पैदा कर रही है। मुकुल जननेता नहीं हैं। क्योंकि, आज तक वह एक बार भी लोकसभा या विधानसभा चुनाव नहीं जीते हैं। मुकुल को वोट, कार्यकर्ता, पार्टी और चुनावी मैनेजमेंट में महारथ हासिल है। ममता तृणमूल का चेहरा हैं तो वहीं मुकुल चुनावी प्रबंधन के माहिर खिलाड़ी माने जाते थे। बंगाल की सत्ता पर ममता के दो बार काबिज होने के पीछे मुकुल के चुनावी प्रबंधन की भी अहम भूमिका रही है। रॉय को पता है कि चुनाव जीतने के लिए कहां क्या करना है। ऐसे में भाजपा को मुकुल की जरूरत तो है। पर, दुविधा भी है। हालांकि, मुकुल ने अभी तक अपना पत्ता नहीं खोला है।
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(हाईलाइटर::: भ्रष्टाचार पर भाजपा बार-बार जीरो टॉलरेंस की बात करती रही है। ऐसे में घोटाले में जिस नेता का नाम जुड़ा है और उसी को भाजपा शामिल कराती है तो सवाल उठना लाजिमी है।) 

[ स्थानीय संपादकीय: पश्चिम बंगाल ]

Posted By: Bhupendra Singh

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