पाकिस्तान में पल रहे आतंकी संगठन जैश ए मुहम्मद के सरगना मसूद अजहर पर अंतरराष्ट्रीय पाबंदी लगना भारत की एक बड़ी कूटनीतिक कामयाबी है। यह कामयाबी हासिल करने में एक दशक इसीलिए लग गए, क्योंकि चीन इस आतंकी सरगना की ढाल बना हुआ था। उसने अपना अडि़यल रवैया तब छोड़ा जब उसके सामने यह स्पष्ट हो गया कि भारत इस मामले को छोड़ने वाला नहीं और अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस आदि देशों के चलते उसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फजीहत हो सकती है। इसमें दोराय नहीं कि भारत ने एक बड़ी कूटनीतिक कामयाबी हासिल की, लेकिन यह भी स्पष्ट है कि पाकिस्तान तमाम शर्मिदगी उठाने के बावजूद अपनी हरकतों से बाज आने वाला नहीं।

संसद और पठानकोट एयरबेस समेत पुलवामा में आतंकी हमलों के लिए जिम्मेदार मसूद अजहर पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की पाबंदी लगने के बावजूद आसार इसी के हैं कि पाकिस्तान भारत के लिए खतरा बने आतंकियों को पालने-पोसने की अपनी नीति का परित्याग न करे। अंदेशा इसका भी है कि वह मसूद अजहर पर उसी तरह की दिखावटी सख्ती करे जैसे उसने एक अन्य आतंकी सरगना हाफिज सईद के खिलाफ कथित तौर पर कर रखी है। आखिर यह एक तथ्य है कि पाकिस्तान सरकार और खासकर उसकी सेना एवं खुफिया एजेंसी आइएसआइ अपने यहां फल-फूल रहे आतंकियों के खिलाफ कुछ न करने और दबाव पड़ने पर कार्रवाई का दिखावा कर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की आंखों में धूल झोंकने में माहिर है। हैरत नहीं कि पाकिस्तानी सेना मसूद अजहर को और संरक्षित करने का काम करे।

पाकिस्तान पर इसलिए भरोसा नहीं किया जा सकता, क्योंकि उसने यह कहकर अपनी झेंप मिटाने और साथ ही अपनी जनता को भरमाने की कोशिश की है कि मसूद अजहर पर पाबंदी के बावजूद उसकी जीत हुई, क्योंकि सुरक्षा परिषद के फैसले में पुलवामा हमले का जिक्र नहीं है। पाकिस्तान के ऐसे रवैये को देखते हुए यह जरूरी है कि भारत और अमेरिका इसके लिए अतिरिक्त कोशिश करें कि पाकिस्तान वास्तव में मसूद अजहर पर लगाम लगाए। अगर वह ऐसा नहीं करता तो फिर उसकी चालबाजी के पुख्ता सुबूत एकत्र करके उन्हें एफएटीएफ के समक्ष रखने चाहिए।

इस अंतरराष्ट्रीय संस्था की अगली बैठक में इस पर विचार होना है कि पाकिस्तान को आतंकी संगठनों को पालने के लिए काली सूची में रखा जाए या नहीं? पाकिस्तान पिछली बैठक में काली सूची में जाने से बच गया था। अगली बार भी चीन उसके बचाव में आ सकता है। यदि पाकिस्तान काली सूची में दर्ज होने से फिर बच जाता है तो वह आतंकी संगठनों को संरक्षण देने का काम तेज कर सकता है। चूंकि पाकिस्तान के रंग-ढंग बदलने की ज्यादा उम्मीद नहीं इसलिए भारत को उसकी हरकतों को लेकर न केवल सतर्क रहना होगा, बल्कि उस पर यह दबाव भी बढ़ाना होगा कि वह आतंकवाद का सहारा लेना छोड़े। नि:संदेह इसी के साथ ऐसे भी उपाय करने होंगे जिससे पाकिस्तान कश्मीर में दखल देने में सक्षम न रहे। यह ठीक है कि पुलवामा हमले के बाद कश्मीर के हालात ठीक करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं, लेकिन यह भी साफ है कि अभी बहुत कुछ किए जाने की जरूरत है।

Posted By: Bhupendra Singh

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