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सुरक्षाबलों को चाहिए कि अपने अभियान जारी रखें और भटके युवाओं को मुख्यधारा में शामिल करने के लिए अपने प्रयासों को और बढ़ाएं

नववर्ष के पहले दिन ही तीन युवाओं के आतंकवाद छोड़ मुख्यधारा में शामिल होना कश्मीर के बदल रहे हालात को बयां करता है। ऑपरेशन आल आउट शुरू होने के बाद अब तक अस्सी के करीब युवा आतंकवाद की राह छोड़ मुख्यधारा में शामिल हो चुके हैं। इनमें से कई युवा ऐसे भी थे जोकि आतंकियों के बहकावे में आकर उनके ट्रेनिंग कैंप में भाग लेने के लिए जा रहे थे। नि:संदेह इसका श्रेय जम्मू कश्मीर पुलिस के साथ सेना व सुरक्षाबलों को जाता है। यह बात किसी से नहीं छुपी है कि कश्मीर के कुछ जिलों में आतंकवादियों ने स्थानीय युवाओं को दहशत के इस खेल में शामिल कर लिया था। आए दिन यह आतंकवादी सुरक्षाबलों को निशाना बना रहे थे। बीते वर्ष सरकार ने ऑपरेशन आल आउट शुरू कर कश्मीर में एक ओर जहां कई टॉप आतंकी कमांडरों को ढेर कर दिया, वहीं भटके हुए युवाओं को मुख्यधारा में शामिल करने के लिए भी मुहिम चलाई। इसी का परिणाम है कि युवाओं को यह लगने लगा है कि उन्हें आतंकवाद के नाम पर गुमराह किया जा रहा है। अच्छी बात यह है कि इस अभियान में इन युवाओं के अभिभावकों को भी शामिल किया गया और उनकी अपील पर भी कई युवा वापस आए। यह सही है कि अभी भी कुछ युवा आतंकवाद में संलिप्त है और उन्हीं का इस्तेमाल कर पाकिस्तान अन्य युवाओं को भी इस राह पर धकेलने का नाकाम प्रयास कर रहा है। विगत दिवस सोलह साल के मारे गए आतंकी का वीडियो वायरल करना भी इसी का एक हिस्सा था। इसमें यह आतंकी युवाओं से जेहाद में शामिल होने की अपील कर रहा था। मगर पाकिस्तान को यह समझना होगा कि पढ़े लिखे युवा अब उसके मंसूबों को समझ चुके हैं। यही कारण है कि अब आतंकवादी गतिविधियां दक्षिण कश्मीर के मात्र तीन जिलों के कुछ भागों तक ही सीमित हो कर रह गई हैं। इनमें भी सुरक्षाबलों द्वारा लगातार चलाए जा रहे तलाशी अभियानों में कई सक्रिय आतंकवादी हर दिन मारे जा रहे हैं। सुरक्षाबलों को चाहिए कि वे अपने इस अभियान को इसी तरह जारी रखें और भटके युवाओं को मुख्यधारा में शामिल करने के लिए अपने प्रयासों को और बढ़ाएं ताकि कश्मीर पूरी तरह से शांत व खुशहाल हो।

[ स्थानीय संपादकीय: जम्मू-कश्मीर ]

Posted By: Bhupendra Singh

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