जागरण संपादकीय: एनटीए के बाद सीबीएसई
यह सीबीएसई अधिकारी ही बता सकते हैं कि उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन में गड़बड़ी के कारण क्या हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि आन स्क्रीन मार्किंग यानी ओएसएम का काम जिसे दिया गया, वह इसे करने में दक्ष नहीं था। त्रासदी यह है कि ऐसा पहली बार देखने को नहीं मिल रहा है।
HighLights
सीबीएसई पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में विसंगतियों की शिकायतें सामने आईं।
संसदीय समिति ने सीबीएसई चेयरमैन को अपने समक्ष तलब किया।
छात्रों का परीक्षा मूल्यांकन प्रक्रिया से भरोसा उठ रहा है।
मेडिकल कालेजों में प्रवेश की परीक्षा नीट के प्रश्नपत्र लीक हो जाने के कारण इस परीक्षा को निरस्त करने के बाद केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई की पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में जिस तरह विसंगतियों की शिकायतें सामने आ रही हैं, वे निराशाजनक भी हैं और दुर्भाग्यपूर्ण भी। इसी कारण शिक्षा मंत्रालय की संसदीय समिति ने जैसे नीट का आयोजन करने वाली संस्था नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए एवं शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों को तलब किया था, वैसे ही सीबीएसई के चेयरमैन को भी अपने समक्ष उपस्थित होने का आदेश दिया है।
उनसे पूछा जाएगा कि सीबीएसई परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन में गड़बड़ियां क्यों सामने आ रही हैं? पता नहीं वे क्या जवाब देते हैं और उनसे संसदीय समिति संतुष्ट होती है या नहीं, लेकिन प्रश्न केवल उसके संतुष्ट होने का नहीं है। प्रश्न यह है कि सीबीएसई उन छात्रों को संतुष्ट कर पाएगा या नहीं, जो अपनी उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन में गड़बड़ी की शिकायत कर रहे हैं?
ध्यान रहे ऐसी कई शिकायतों को सीबीएसई ने सही पाया है। इसका अर्थ है कि सीबीएसई की पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में वास्तव में कोई खामी है। यह कहना कठिन है कि कितने छात्र पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया में खामी के शिकार हैं, लेकिन जब ऐसा होता है तो छात्रों और साथ ही अभिभावकों का परीक्षा मूल्यांकन की प्रक्रिया से भरोसा उठता है। इसी के साथ परीक्षा आयोजन करने वाली संस्था की साख पर भी बट्टा लगता है।
यह सामान्य बात नहीं कि जहां कुछ छात्र यह पा रहे हैं कि बोर्ड द्वारा अपलोड की गई उनकी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कापी उनकी लिखावट से मेल नहीं खा रही है, वहीं कुछ की यह शिकायत है कि सही उत्तर के बाद भी उनके अंक काट दिए गए। कुछ यह भी कह रहे हैं कि स्कैन कापी देखकर समझना कठिन है कि उत्तर पुस्तिका किसकी है?
यह ठीक है कि सीबीएसई अधिकारी विसंगतियों को ठीक कर रहे हैं और शिकायत करने वाले छात्रों को उनकी उत्तर पुस्तिकाएं भी उपलब्ध करा रहे हैं, लेकिन इससे केवल समय और संसाधन की बर्बादी ही नहीं होगी, बल्कि अन्य छात्रों के मन में भी यह आशंका घर करेगी कि उनकी उत्तर पुस्तिका का मूल्यांकन सही तरह हुआ या नहीं?
इसके चलते और छात्र अपनी उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन की आवश्यकता महसूस कर सकते हैं। यह सीबीएसई अधिकारी ही बता सकते हैं कि उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन में गड़बड़ी के कारण क्या हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि आन स्क्रीन मार्किंग यानी ओएसएम का काम जिसे दिया गया, वह इसे करने में दक्ष नहीं था। त्रासदी यह है कि ऐसा पहली बार देखने को नहीं मिल रहा है।





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