कश्मीर प्रशासनिक सेवाओं की मुख्य परीक्षाओं की तैयारियों के लिए एक सप्ताह का समय उम्मीदवारों के साथ नाइंसाफी है, इसके लिए काफी हद तक लोक सेवा आयोग की कार्यप्रणाली भी जिम्मेदार है

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कश्मीर प्रशासनिक सेवाओंं की मुख्य परीक्षाओं के उम्मीदवारों को तैयारी के लिए मात्र एक सप्ताह मिलने से उनका सड़क पर उतरना स्वाभाविक है। इसके लिए कहीं न कहीं लोक सेवा आयोग की कार्यप्रणाली ही जिम्मेदार है। यह बात किसी से नहीं छुपी है कि कुछ एक वर्षों को छोड़ दिया जाए तो लोक सेवा आयोग कभी भी कश्मीर प्रशासनिक सेवाओं के लिए परीक्षाएं समय पर आयोजित नहीं कर पाया है। संघ लोक सेवा आयोग ने सिविल सर्विसेज के लिए एक कैलेंडर बनाया है और एक साल में प्रक्रिया को पूरा कर दिया जाता है। लोक सेवा आयोग भी संघ लोक सेवा आयोग की तर्ज पर ही परीक्षाएं आयोजित करता हैं, लेकिन यह प्रक्रिया पूरी करने में तीन से चार साल का समय लगाता है। इससे तैयारी कर रहे उम्मीदवारों का कई बार धैर्य भी जवाब दे देता है। वर्ष 2016 में जारी की गई अधिसूचना में अभी आयोग मुख्य परीक्षाएं आयोजित नहीं करवा पाया है। प्राथमिक परीक्षा का परिणाम घोषित करने के बाद हुई शिकायत में प्रश्नपत्रों में ही कई गलतियां मिलीं। परिणाम की समीक्षा हुई और फिर से घोषित किया गया।

हैरानगी कि बात यह है कि इसमें पहले से पास किए गए चार सौ से अधिक उम्मीदवार इस बार फेल कर दिए गए। इन उम्मीदवारों ने उम्मीद के अनुरूप न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और उन्हें राहत मिली। विडंबना यह है कि लोक सेवा आयोग ने परीक्षा से करीब एक सप्ताह पहले उन्हें भी आवेदन करने की इजाजत दी। यह सर्वविदित है कि राज्य स्तरीय परीक्षा की तैयारी करने के लिए उम्मीदवारों को भी पर्याप्त समय चाहिए होता है। यह लोक सेवा आयोग को समझ में नहीं आ रहा। विगत तीन दिन से चार सौ से अधिक यह उम्मीदवार दरबदर हो रहे हैं और कभी राजनीतिज्ञों के घरों के बाहर तो कभी मुख्यमंत्री निवास के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं। अगले वर्ष से वैसे ही कश्मीर प्रशासनिक सेवाओं का पाठ्यक्रम बदल रहा है और सैकड़ों विद्यार्थियों के लिए यह परीक्षा अंतिम साबित हो सकती है। लोक सेवा आयोग को चाहिए कि वे इन उम्मीदवारों की शिकायतों को भी सुने और उसके निपटारे के लिए कदम उठाए ताकि उनका भविष्य दांव पर न लगे।

[ स्थानीय संपादकीय: जम्मू-कश्मीर ]

By Bhupendra Singh