नए वित्त वर्ष की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून में विकास दर 8.2 प्रतिशत रहना इसलिए उल्लेखनीय है, क्योंकि एक तो पिछले साल इसी तिमाही में यह दर 5.6 प्रतिशत ही थी और दूसरे ताजा विकास दर अनुमान से कहीं अधिक है। कई जानकारों ने जीडीपी दर साढ़े सात प्रतिशत के आसपास रहने का ही अनुमान लगाया था, लेकिन आंकड़े आठ फीसद के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गए। यही कारण है कि इसे अर्थव्यवस्था में उछाल के साथ-साथ इस रूप में भी रेखांकित किया जा रहा है कि अब भारतीय अर्थव्यवस्था ने रफ्तार पकड़ ली है। जीडीपी के बेहतर आंकड़े सरकार को राहत देने के साथ ही दुनिया को यह संदेश देने का भी काम करेंगे कि भारत तेजी से तरक्की करने वाले देशों में सबसे आगे बना हुआ है। स्पष्ट है कि इस संदेश के पुख्ता होने से विदेशी निवेश हासिल करने में आसानी होगी और ऐसा होने का मतलब होगा आकर्षक विकास दर का सिलसिला कायम रहना। यह सिलसिला कायम रहे, इसके लिए सरकार को भी सचेत रहना होगा। यह सही समय है जब वह उन क्षेत्रों पर ध्यान दे जो अपेक्षित गति से आगे बढ़ते नहीं दिखाई दिए, जैसे कि होटल, परिवहन, संचार, रियल एस्टेट आदि। वैसे यह किसी खुशखबरी से कम नहीं कि कृषि क्षेत्र बेहतर प्रदर्शन करता दिखा। चूंकि कृषि ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार है इसलिए सरकार को हर संभव ऐसे उपाय करने चाहिए कि विकास दर के आंकड़ों में उसकी बुनियाद मजबूत ही बनी रहे।

अपेक्षा से अधिक विकास दर यानी जीडीपी के आंकड़े एक ऐसे समय सामने आए हैं जब नोटबंदी पर रिजर्व बैंक की ओर से पेश किए गए आंकड़ों को लेकर सरकार विपक्ष के निशाने पर थी। जीडीपी के ताजा आंकड़ों के आधार पर सरकार नोटबंदी के आलोचकों को जवाब देने के साथ यह माहौल बनाने वालों को भी आईना दिखाने में समर्थ हो सकती है कि जीएसटी के चलते अर्थव्यवस्था को नुकसान हो रहा है। हालांकि उन दलों के बारे में कुछ कहना कठिन है जो जीएसटी को राजनीतिक मसला बनाकर उससे चुनावी लाभ लेने की कोशिश में हैं, लेकिन उचित यही है कि आर्थिक मामलों को नारेबाजी की राजनीति का जरिया बनाने से बचा जाए। नि:संदेह जीडीपी के आंकड़े सरकार के साथ-साथ कारोबारियों और आम जनता के मन में भी अच्छे दिन की उम्मीद जगाने वाले हैं, लेकिन बात तब बनेगी जब बेहतर विकास दर का अपेक्षित असर जमीन पर भी नजर आएगा। उद्योग-धंधे में तेजी का लाभ आम जनता को रोजगार के बढ़ते अवसरों के रूप में दिखने से ही अभीष्ट की पूर्ति होगी। यह राहतकारी है कि वे अनेक क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ते दिख रहे हैं जो रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराने के लिए जाने जाते हैं, लेकिन बेहतर होगा कि इसके भी आंकड़े सामने लाए जाएं कि कौन क्षेत्र रोजगार के कितने अवसर उपलब्ध करा रहा है? यह इसलिए आवश्यक है, क्योंकि रोजगार के अवसरों को भी चुनावी मसला बनाने की कोशिश हो रही है। इसी के साथ यह भी होना चाहिए कि सरकार के सभी अंग विकास दर में तेजी बनाए रखने को एक चुनौती के रूप लें।

 

Posted By: Nancy Bajpai