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उत्तराखंड की आर्थिकी को लेकर लगाए गए अनुमान सुखद संकेत तो हैं, लेकिन आंकड़ों की यह गुलाबी तस्वीर आम आदमी की जिंदगी में दिखनी चाहिए।

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उत्तराखंड की आर्थिक सेहत को लेकर लगाए गए अनुमान निसंदेह उत्साह पैदा करने वाले हैं। सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के मामले में राज्य की बड़ी छलांग भविष्य के लिए सुखद संकेत देती प्रतीत हो रही है। प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय 1,61,102 रुपये से बढ़कर 1,77,356 रुपये हो गई है। हालांकि आर्थिक विकास दर की रफ्तार कुछ कम हुई है, लेकिन सरकार को उम्मीद है कि इसकी भरपाई भी हो जाएगी। अर्थ व्यवस्था के बढ़ते आकार में अच्छी बात यह है कि कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों में 6.68 फीसद की वृद्धि दर्ज की गई है। यह तो रही आंकड़ों में उभरती गुलाबी तस्वीर की बात, लेकिन सवाल यह है कि क्या आम आदमी भी इससे इत्तेफाक रखता है। सरकार के ही खेती-किसानी से जुड़े आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो तस्वीर का दूसरा पहलू नजर आने लगता है। सकल घरेलू उत्पाद में कृषि का बड़ा शेयर होने के बावजूद यह भी सच है कि 17 साल में जीडीपी में कृषि का हिस्सा घटकर आधा रह गया है।

जीडीपी में कभी 16 फीसद का योगदान करने वाली कृषि अब आठ फीसद पर आ गई है। जब केंद्र सरकार वर्ष 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुना करने की कवायद कर रही हो, तब प्रदेश सरकार के सामने चुनौती और भी बढ़ जाती है। अगले माह सरकार बजट लाने जा रही है और पहली बार प्रदेश में मुख्यमंत्री बजट से पहले आम आदमी की राय को भी तवज्जो दे रहे हैं। अब तक उत्तरकाशी और देहरादून में सीएम लोगों से राय-मशविरा कर चुके हैं और इसका लब्बो-लुआब यह है कि महंगाई, पलायन का दर्द, रोजगार और खेती-किसानी लोगों की चिंताओं में शामिल है।

आंकड़ों में भले ही प्रति व्यक्ति आय बढ़ी हो, लेकिन इसमें बड़ा हिस्सा देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर जैसे जिलों का है यानी पहाड़ की स्थिति में अभी सुधार की जरूरत है। सवाल यह है कि पर्यटन, तीर्थाटन और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में प्रदेश की स्थिति क्या है। योजनाओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन धरातल पर इन्हें साकार करने के लिए पैसे की जरूरत है और विडंबना यह है कि सरकार अपने कर्मचारियों को वेतन देने के लिए भी कर्ज पर निर्भर है। उम्मीद है कि सरकार बजट में इसकी चिंता करेगी। इसके साथ ही प्लान और नॉन प्लान खर्च के बीच बढ़ते असंतुलन पर भी नियंत्रण लगाएगी। देखना यह भी होगा कि सरकार बजट में राजस्व बढ़ाने के क्या उपाय करती है। यदि इस दिशा में प्रगति हुई तो कहा जा सकता है कि ये आंकड़े किसी बाजीगरी का कमाल नहीं हैं।

[ स्थानीय संपादकीय: उत्तराखंड ]

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