अयोध्या में बहुप्रतीक्षित राम मंदिर निर्माण के भूमि पूजन समारोह के अवसर पर देश जिस तरह राममय और रोमांचित दिखा वह राम नाम की महिमा का प्रताप भी है और इसकी पुन: पुष्टि भी कि इस देश के रोम-रोम में राम बसते हैं। इस अवसर पर जगमग अयोध्या के माध्यम से जैसी अद्भुत सकारात्मकता का संचार हुआ और भावुक कर देने वाली जो भावभूमि निर्मित हुई उसे सहेजने के साथ ही पोषित भी किया जाना चाहिए ताकि सबके मन को मोहने और मुदित करने वाले राम के नाम का मंदिर राष्ट्र के उत्थान का प्रेरणास्थल बन सके। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने यह सही कहा कि जैसे स्वतंत्रता आंदोलन के समय देश के लोगों ने अपना सब कुछ समर्पित कर दिया था वैसे ही राम मंदिर निर्माण के लिए भी लंबा संघर्ष करना पड़ा और लाखों लोगों को बलिदान देना पड़ा। इस संघर्ष और बलिदान का लक्ष्य अयोध्या में केवल राम के नाम का मंदिर बनाना नहीं, बल्कि रामराज्य के उन मूल्यों को जीवित रखना ही था जिनसे कोटि-कोटि लोग प्रेरणा पाते हैं। राम मंदिर निर्माण का श्रीगणेश हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना का उदय है और इसे इसी रूप में ग्रहण किया जाना चाहिए।

राम मंदिर निर्माण के भूमि पूजन समारोह के साथ ही राम की स्मृति संजोने का वह बड़ा काम हो गया जिसकी प्रतीक्षा में सदियां गुजर गईं। अब देश को भगवान राम के उन दूसरे कार्यों को पूरा करने को लेकर समर्पण भाव दिखाना चाहिए जो रामराज्य के आधार हैं। यह समर्पण ठीक वैसा ही होना चाहिए जैसा उनके जन्म स्थान पर मंदिर निर्माण के लिए दिखाया गया। भगवान राम का संपूर्ण जीवन सबको साथ लेकर चलने, सबके मान-सम्मान की चिंता करने, सबकी भलाई सुनिश्चित करने के प्रति समर्पित रहा और इसीलिए वह मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाए।

इससे बेहतर और कुछ नहीं कि राम मंदिर निर्माण की प्रक्रिया जैसे-जैसे आगे बढ़े वैसे-वैसे जन-जन में यह संदेश जाए कि राम मंदिर का निर्माण राष्ट्र के निर्माण का माध्यम है। इस लक्ष्य की पूर्ति तभी हो सकती है जब भारतीय समाज में सद्भाव और समरसता बढ़े। राम की महिमा को सुशोभित करने वाला मंदिर देश ही नहीं दुनिया के लिए इसका उदाहरण बनना चाहिए कि कैसे कोई देवालय राष्ट्रीय एकत्व और बंधुत्व की भावना को बल प्रदान करते हुए एक समरस वातावरण का निर्माण करता है। ऐसा कोई वातावरण ही रामराज्य के सपने को साकार करने में सहायक होगा। यही वातावरण भारत की संस्कृति, उसकी सामर्थ्य और साथ ही शक्ति से दुनिया को परिचित कराने का काम करेगा और राष्ट्र को उत्कर्ष के उस शिखर की ओर ले जाएगा जिसकी कल्पना भी की जाती है और परिकल्पना भी।

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