इस पर आश्चर्य नहीं कि एक अमेरिकी थिंक टैंक ने भी मोदी सरकार की आयुष्मान भारत योजना को तारीफ के काबिल पाया। इसके पहले अन्य देशी-विदेशी संस्थाएं भी इस योजना को बेहतर बता चुकी हैं। चूंकि निर्धन वर्ग के परिवारों को पांच लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की सुविधा देने वाली यह योजना गरीबों के लिए राहतकारी साबित हो रही है इसलिए उसका बखान कर चुनावी लाभ लेने की भी कोशिश हो रही है। इसमें हर्ज नहीं। सरकारों का यह अधिकार है कि वे अपनी सफल योजनाओं का गुणगान करते हुए राजनीतिक लाभ अर्जित करने की कोशिश करें।

इस योजना की लोकप्रियता इससे साबित होती है कि बहुत कम समय में लाखों लोग इसका लाभ उठा चुके हैं। इस योजना के सकारात्मक असर से इन्कार नहीं, लेकिन इस पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि क्या फिलहाल कारगर साबित होती दिख रही यह योजना देश में आवश्यक स्वास्थ्य ढांचे का निर्माण करने में सफल हो रही है? नि:संदेह यह इस योजना का मूल उद्देश्य नहीं है। मूल उद्देश्य गरीबों को मुफ्त इलाज उपलब्ध कराना है, लेकिन केवल इतने से बात बनने वाली नहीं है। किसी को यह देखना चाहिए कि जरूरी स्वास्थ्य ढांचे का भी निर्माण हो। यह सुनिश्चित करते समय इस पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है कि निजी क्षेत्र के साथ सरकारी स्वास्थ्य ढांचे का निर्माण और विस्तार होना बहुत आवश्यक है। यह इसलिए आवश्यक है, क्योंकि इतने बड़े देश में सरकारी स्वास्थ्य ढांचे को बेहतर बनाए बिना अभीष्ट की प्राप्ति नहीं की जा सकती।

यह सही है कि फिलहाल गरीबों को मुफ्त उपचार की सुविधा मिल रही है, लेकिन अगर स्वास्थ्य ढांचे को विस्तार नहीं दिया जा सका तो गरीबी रेखा से इतर लोगों के लिए उपचार महंगा हो सकता है। इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य पर खर्च किए जाने वाले धन का अधिकांश हिस्सा इस योजना में ही खप जाने का भी अंदेशा है। यह अंदेशा इसलिए और है, क्योंकि अभी कुल जीडीपी का बहुत कम प्रतिशत स्वास्थ्य पर खर्च होता है। इस खर्च को बढ़ाए जाने और उसका एक हिस्सा सरकारी स्वास्थ्य ढांचे को विकसित करने में किया जाना चाहिए। यह काम प्राथमिकता के आधार पर होना चाहिए, क्योंकि भारत की छवि एक ऐसे देश की है जो तमाम रोगों का घर बना हुआ है। इसका प्रमुख कारण यह है कि एक ओर जहां गरीब तबका कुपोषण से ग्रस्त है वहीं मध्य और धनी वर्ग रहन-सहन की उन आदतों से ग्रस्त है जो बीमारियों का कारण बनती हैं।

स्पष्ट है कि किसी को इसकी भी चिंता करनी चाहिए कि औसत भारतीय अपने खान-पान, रहन-सहन को लेकर सतर्क रहें। मोदी सरकार को केवल इससे खुश नहीं होना चाहिए कि अमेरिकी थिंक टैंक ने आयुष्मान योजना की तारीफ कर दी, क्योंकि उसने इस योजना की कुछ चुनौतियां भी रेखांकित की हैं। यह सही है कि हर नई योजना में प्रारंभ में कुछ समस्याएं आती हैं, लेकिन जब यह कहा जा रहा है कि लागत को कम करने और गुणवत्ता में सुधार करने के लिए अभी काफी कुछ करना बाकी है तो फिर उस पर ध्यान देना वक्त की मांग है।

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Posted By: Bhupendra Singh

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