यह महज दुर्योग नहीं हो सकता कि जिस दिन पंजाब में अमृतसर के एक गांव में पांच किलो आरडीएक्स की बरामदगी हुई, उसी दिन दिल्ली में एक लावारिस बैग में आइईडी मिली तो श्रीनगर में एक प्रेशर कुकर में। विस्फोटक बरामदगी के ये तीनों मामले किसी बड़ी साजिश की ओर संकेत कर रहे हैं। चूंकि गणतंत्र दिवस करीब है और पंजाब में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं इसलिए इस पर आश्चर्य नहीं कि देश विरोधी ताकतें सक्रिय हो गई हों। इसकी भरी-पूरी आशंका है कि इन तीनों मामलों के तार किसी एक आतंकी गुट से जुड़े हों। इसकी भी प्रबल आशंका है कि ऐसे किसी गुट को सीमा पार यानी पाकिस्तान से सहयोग-समर्थन मिल रहा हो। इस आशंका को देखते हुए पुलिस एवं खुफिया एजेंसियों को न केवल और अधिक सतर्कता बरतनी होगी, बल्कि उन तत्वों तक पहुंचना भी होगा, जो देश की आंतरिक सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने के लिए कुचक्र रच रहे हैं।

नि:संदेह सुरक्षा एजेंसियों के साथ आम लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि उनकी सजगता सुरक्षा एजेंसियों का काम आसान करने के साथ ही देश विरोधी तत्वों के दुस्साहस पर लगाम लगाने में भी सहायक बनेगी। यह सही समय है कि केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां राज्यों को न केवल सतर्क करें, बल्कि उन्हें आवश्यक जानकारी भी उपलब्ध कराएं। आंतरिक सुरक्षा के समक्ष जैसी चुनौती उभरती हुई दिख रही है, उसका सामना मिलकर ही किया जा सकता है। आशंका केवल इसकी नहीं है कि गणतंत्र दिवस पर कानून एवं व्यवस्था को चुनौती देने की कोशिश हो सकती है, बल्कि इसकी भी है कि चुनाव वाले राज्यों में माहौल बिगाड़ने का काम हो सकता है। विधानसभा चुनाव वाले राज्यों में सबसे संवेदनशील है पंजाब।

पिछले कुछ समय से पंजाब में सीमा पार से आए विस्फोटक, हथियार और मादक पदार्थो के बरामद होने का सिलसिला जिस तरह कायम है, वह कोई शुभ संकेत नहीं। कुछ दिनों पहले ही लुधियाना में अदालत परिसर में विस्फोट भी हो चुका है, जिसे खालिस्तानियों ने अंजाम दिया था। इसकी भी अनदेखी नहीं की जानी चाहिए कि पंजाब में एक अर्से से माहौल खराब करने की कोशिश हो रही है। जैसे इसमें संदेह नहीं कि यह कोशिश पाकिस्तान से हो रही है, वैसे ही इसमें भी नहीं कि खालिस्तानी तत्व उसका मोहरा बने हुए हैं। किसी को भी और खासकर भारत सरकार और साथ ही पंजाब के नेताओं को इस झांसे में नहीं आना चाहिए कि पाकिस्तान भारत से सौ साल तक दोस्ती रखने का बातें कर रहा है। इस तरह की बातें देश-दुनिया की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश के अलावा और कुछ नहीं।

Edited By: Sanjay Pokhriyal