महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने बुलेट ट्रेन परियोजना की समीक्षा के आदेश देकर इस अंदेशे को बढ़ाने का ही काम किया है कि राज्य की नई सरकार इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर अड़ंगा लगा सकती है। इसके पहले उद्धव ठाकरे मुंबई में बनने वाले आरे मेट्रो कार शेड निर्माण को रोकने के आदेश दे चुके हैैं। उन्होंने यह आदेश इस आधार पर दिया कि इस मेट्रो कार शेड निर्माण के लिए कई पेड़ काटे गए। हालांकि जरूरत भर के पेड़ काटे जा चुके हैैं, फिर भी ठाकरे सरकार मेट्रो कार शेड का निर्माण ठप करना पसंद कर रही है। इसका नतीजा यह होगा कि नई जगह मेट्रो कार शेड बनने में देर तो होगी ही, उसकी लागत भी बढ़ जाएगी। वक्त और पैसे की बर्बादी करने वाला यह काम तब हो रहा है जब राज्य सरकार के खजाने में पर्याप्त धन न होने का रोना भी रोया जा रहा है।

हैरत नहीं कि यही रोना रोकर उद्धव ठाकरे पिछली सरकार और साथ ही केंद्र सरकार की कुछ और महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर कैंची चलाते दिखे। कम से कम विकास के मामलों में राजनीति और वह भी समय और संसाधन नष्ट करने वाली घटिया राजनीति तो नहीं ही होनी चाहिए। यह हास्यास्पद है कि एक ओर विकास के मामले में चीन से सीख लेने की नसीहत दी जाती है और दूसरी ओर तेज विकास में अड़ंगे डालने वाले हर तरह के काम भी किए जाते हैैं।

क्या इससे बुरी बात और कोई हो सकती है कि सरकार बदल जाने के साथ ही विकास का एजेंडा भी बदल जाए? दुर्भाग्य से ऐसा केवल महाराष्ट्र में ही नहीं हो रहा है। अन्य राज्यों में भी हो रहा है। हाल में आंध्र प्रदेश में सत्ता में आए जगन मोहन रेड्डी चंद्रबाबू नायडू सरकार की कई परियोजनाओं को दाखिल दफ्तर करने में जुटे हुए हैैं। वह अमरावती को नई राजधानी बनाने के खिलाफ कमर कसते हुए दिख रहे हैैं। राजनीतिक बदले की भावना अथवा राजनीतिक क्षुद्रता के वशीभूत होकर किस तरह विकास योजनाओं से खिलवाड़ किया जाता है, इसका ही सटीक उदाहरण है अहमदाबाद से मुंबई के बीच की बुलेट ट्रेन परियोजना की समीक्षा का आदेश।

इस परियोजना में महाराष्ट्र सरकार को मामूली अंशदान ही देना है, फिर भी किसान हित के नाम पर उसमें अड़ंगा लगाने की कोशिश हो रही है। ठाकरे सरकार का यह कहना लोगों को गुमराह करना ही अधिक है कि हमारी प्राथमिकता में बुलेट ट्रेन नहीं, बल्कि किसान हैैं। यह सही है कि राज्य के कुछ किसान इस परियोजना का विरोध कर रहे हैैं, लेकिन क्या ऐसा है कि उन्हें मुआवजा देने से इन्कार किया जा रहा है?

Posted By: Bhupendra Singh

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