अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए एक स्वायत्त ट्रस्ट के गठन की घोषणा के साथ ही वह प्रतीक्षा पूरी हुई जो सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से ही की जा रही थी। संसद में प्रधानमंत्री की ओर से श्री राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन की घोषणा किए जाने के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि इसमें 15 ट्रस्टी होंगे, जिसमें एक दलित समाज से होगा। यह आश्चर्यजनक है कि कुछ दलों ने प्रधानमंत्री की घोषणा पर इस बहाने आपत्ति जताई कि इसके माध्यम से दिल्ली में चुनावी लाभ लेने की कोशिश की गई है। यह विरोध के नाम पर विरोध जताने के अतिरिक्त और कुछ नहीं।

एक तो सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह निर्देशित किया था कि तीन माह के अंदर यानी 9 फरवरी के पहले सरकार को राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट का गठन कर देना चाहिए और दूसरे, कम से कम अब तो विपक्षी दलों को यह समझ आ जाना चाहिए कि अयोध्या में मंदिर निर्माण की पहल राजनीति या चुनावी प्रश्न नहीं था। यह तो राष्ट्रीय आकांक्षा थी कि अयोध्या में राम के नाम का मंदिर बने। यह अच्छा नहीं हुआ कि इस आकांक्षा की न केवल अनदेखी की गई, बल्कि उसका उपहास भी उड़ाया गया।

चूंकि श्री राम जन्म भूमि तीर्थ ट्रस्ट अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण और उससे संबंधित विषयों पर निर्णय लेने के लिए पूर्ण रूप से स्वतंत्र होगा इसलिए यह भी स्पष्ट है कि मंदिर निर्माण में सरकार की कहीं कोई भूमिका नहीं होगी। यही उचित भी है। वैसे भी भाजपा प्रारंभ से यही कहती रही कि उसका काम अयोध्या में मंदिर निर्माण करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि वहां ऐसा हो। दुर्भाग्य से भाजपा जब-जब यह कहती थी कि अयोध्या में राम मंदिर बनना चाहिए तब-तब विपक्ष की ओर से उस पर निशाना साधा जाता था। अंतत: एक ऐसी स्थिति बनी कि करीब-करीब सभी दल यह कहने को विवश हुए कि अयोध्या में राम के नाम का मंदिर बनने पर उन्हें आपत्ति नहीं।

इस स्थिति का निर्माण इसीलिए हुआ, क्योंकि जनमानस की आस्था के साथ ही हर तरह के साक्ष्य भी यह इंगित कर रहे थे कि जिसे विवादित स्थल कहा जाता था वही राम का जन्म स्थान है। अंतत: सुप्रीम कोर्ट भी इसी निष्कर्ष पर पहुंचा। अब जब अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो गया है तब अपेक्षित केवल यही नहीं है कि वहां एक भव्य मंदिर निर्मित हो, बल्कि इसकी भी है कि वह राष्ट्रीय एकता-अखंडता और समरसता के साथ उन मूल्यों का प्रसार करें जिनके लिए भगवान राम जाने जाते हैं।

Posted By: Bhupendra Singh

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