जम्मू-कश्मीर संबंधी अनुच्छेद 370 एवं 35-ए हटाने और राज्य का पुनर्गठन करने के बाद जब इसकी हर संभव कोशिश हो रही है कि घाटी में अमन-चैन का माहौल कायम हो तब पाकिस्तान वहां के हालात बिगाड़ने में जुटा हुआ है। स्पष्ट है कि उससे सतर्क रहने की जरूरत है। यह जरूरत इसलिए और बढ़ गई है, क्योंकि वह छल-कपट का सहारा लेने से बाज नहीं आ रहा है।

पाकिस्तान के छल-कपट पर केवल यह मान लेना पर्याप्त नहीं कि यह उसकी हताशा का नतीजा है। उसकी हरकतों पर गंभीरता से निगाह रखनी होगी, क्योंकि वह बौखलाहट में आकर ऐसे कोई कदम उठा सकता है जो कश्मीर की शांति और सुरक्षा को प्रभावित करने वाले साबित हों। पाकिस्तान इस झूठ को सच का रूप देने की कोशिश कर रहा है कि कश्मीर में असंतोष उफान पर है और मोदी सरकार के फैसले पर वहां लोग बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर आए हैैं। इस झूठ का प्रतिकार और पर्दाफाश सक्रियता के साथ किया जाना चाहिए। इसकी आवश्यकता इसलिए है, क्योंकि वह इसी तरह के झूठ से विश्व जनमत को प्रभावित करने की फिराक में है।

हालांकि अभी तक किसी भी प्रमुख देश ने पाकिस्तान के मन माफिक बयान नहीं दिया है, लेकिन भारत को यह सुनिश्चित करना होगा कि वह कश्मीर पर अपने दुष्प्रचार से किसी देश को झांसे में न ले सके। चूंकि पाकिस्तान बुरी तरह बौखलाया हुआ है इसलिए वह ऐसी किसी बात पर ध्यान देने वाला नहीं कि उसे कश्मीर की हकीकत स्वीकार करनी चाहिए।

वह इस सच को आसानी से इसलिए स्वीकार नहीं कर सकता, क्योंकि अपने जन्म के बाद से ही उसने यह सपना देखा है कि कश्मीर उसका है और वह उसे छल या बल से एक दिन हासिल करके रहेगा। उसने यही सपना अपने लोगों को भी दिखाया और इसी कारण वहां की जनता का एक बड़ा वर्ग इस मिथ्या धारणा का शिकार हो गया कि कश्मीर पाकिस्तान बनने को बेताब है।

धीरे-धीरे इस धारणा ने एक उन्माद का रूप धारण कर लिया और उसके चलते वहां ऐसे आतंकी संगठन पैदा हुए जो बंदूक के बल पर कश्मीर हासिल करने की सनक से ग्रस्त हो गए। इस सनक को पाकिस्तानी सेना ने इसलिए बढ़ावा दिया, क्योंकि उसे अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए एक दुश्मन चाहिए था।

पश्चिमी देश यह कहते-कहते थक गए कि पाकिस्तान के लिए खतरा भारत नहीं, उसके अपने जेहादी संगठन हैैं, लेकिन उसकी मानसिकता नहीं बदली। चूंकि अनुच्छेद 370 से पाकिस्तान के पैरों तले की जमीन खिसक गई है इसलिए वह बौखलाया हुआ है। भारत को यह ध्यान रखना चाहिए कि उसकी यह बौखलाहट आसानी से शांत नहीं होने वाली।

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Posted By: Bhupendra Singh