मोदी सरकार - 2.0 के 100 दिन

अपनी सरकार के सौ दिन पूरे होने पर रोहतक में एक रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दौरान लिए गए बड़े फैसलों का उल्लेख करते हुए जो दावे किए उनसे एक बड़ी हद तक सहमत हुआ जा सकता है। इसमें संदेह नहीं कि बीते सौ दिनों में सरकार ने कुछ ऐसे बड़े फैसले लिए जिनकी गूंज पूरे देश में सुनाई दी। इन फैसलों में प्रमुख हैं तीन तलाक को दंडनीय अपराध बनाने का कानून निर्मित करना, आतंकवाद निरोधक कानून को प्रभावी बनाना और जम्मू-कश्मीर को भेदभाव भरे अनुच्छेद 370 से मुक्ति दिलाना। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का मोदी सरकार का फैसला इसलिए ऐतिहासिक है, क्योंकि कुछ समय पहले तक यह सोचना भी मुश्किल था कि कोई सरकार ऐसा साहसिक कदम उठा सकती है।

मोदी सरकार ने न केवल सौ दिनों के अंदर अनुच्छेद 370 और साथ ही 35-ए हटाने का फैसला किया, बल्कि जम्मू-कश्मीर का नए सिरे से गठन करते हुए लद्दाख को अलग केंद्रशासित प्रदेश भी बनाया। नि:संदेह इसे भी एक उपलब्धि कहा जाएगा कि सरकार इस फैसले से उपजे हालात को सही तरह से संभालने में सक्षम हुई। इसी क्रम में यह भी उल्लेखनीय रहा कि वह अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह समझाने में सफल रही कि कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है और भारत-पाकिस्तान के बीच किसी अन्य देश को कष्ट उठाने की आवश्यकता नहीं।

मोदी सरकार की ओर से बीते सौ दिन में लिए गए बड़े फैसलों में बैंकों के विलय को भी एक खास फैसले के तौर पर गिनाया जा रहा है, लेकिन इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती कि यह फैसला जिस दिन लिया गया उसी दिन आर्थिक विकास दर में गिरावट पर मुहर लगी। इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी की पांच प्रतिशत दर ने मंदी गहराने की ओर भी संकेत किया। आज जब सरकार सौ दिन की अपनी उपलब्धियों का उल्लेख कर रही है तब उसे इसका अहसास होना ही चाहिए कि मंदी के माहौल को दूर करना एक बड़ी चुनौती है।

कायदे से शासन की दूसरी पारी की शुरुआत करते ही इस चुनौती का सामना करने के लिए कमर कसी जानी चाहिए थी। यह मानने के अच्छे-भले कारण हैं कि पहले दिन से ही अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए हर संभव प्रयास नहीं किए गए और इसी कारण सरकार को आम बजट के कुछ प्रावधानों को वापस लेना पड़ा। यह सही है कि मोदी सरकार ने पिछले कुछ दिनों में आर्थिक माहौल को सुधारने के लिए कई कदम उठाने के साथ ये संकेत दिए हैं कि वह आगे भी ऐसा करती रहेगी, लेकिन उसे यह समझना होगा कि हालात बदलने से ही बात बनेगी।

Posted By: Bhupendra Singh

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