विशिष्ट

खुद को जनता का सेवक बताने वाले हमारे जनप्रतिनिधियों द्वारा विशेष रुतबे या वीआइपी दर्जे की चाहत उनकी कलई खोलने के लिए काफी है। राजनेताओं की विशिष्ट पहचान को झलकाने वाली संस्कृति का बढ़ावा समय-समय पर गंभीर बहस का मसला बनता रहा है। 2013 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में इतिहास रचने वाली नवोदित आम आदमी पार्टी ने इस संस्कृति का धुर विरोध कर लोगों का दिल जीत लिया। उसकी जीत में पार्टी और उसके नेताओं की सादगी और च्वच्छ छवि को नकारा नहीं जा सकता है।

अशिष्ट

हाल ही में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने सभी निजी एयरलाइनों को एक पत्र जारी कर सांसदों को विशेष सुविधाएं दिए जाने की मांग की है। सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया में वर्तमान में ऐसे प्रावधान लागू हैं। एक ऐसे समय में जब संसद से लेकर समाज तक सादगीपूर्ण आचार-विचार और व्यवहार को अपनाने की बातें की जा रही हों, तो सांसदों को विशेष सुविधाएं दिए जाने संबंधी यह मांग हम सभी को चौंकाती है। यह चिट्टी न सिर्फ राजनेताओं की सामंती सोच और प्रवृत्ति की द्योतक है बल्कि यह भी बताती है कि उनके तमाम दावे कितने खोखले हैं। खुद को आम जनता का सच्चा प्रतिनिधि बताने वाले हर स्तर पर अपने लिए विशेष सुविधाएं चाहते हैं। लालबत्ती, से लेकर आलीशान बंगला और विशेष वाहन सहित तमाम सरकारी सुविधाएं हासिल करने के पीछे इनकी यह प्रवृत्ति झलकती आई है।

अभीष्ट

किसी भी राजनेता से पूछिए कि वे करते क्या हैं? चिर-परिचित जवाब मिलेगा, अजी साहब, हम तो जनता के सेवक हैं। अरे भाई, यह कैसी सेवकाई है जो विशिष्ट दर्जा चाहती है? क्या कभी सेवक का मालिक से बड़ा रसूख या रुतबा होता है? माननीयों को आम जनता की तरह जीवनशैली अपनाने से यह हिचक क्यों है? माना कि माननीयों को उनके कार्य दायित्व को निभाने के लिए कुछ खास सहूलियतों की दरकार हो सकती है, हालांकि यह भी बहस का विषय हो सकता है, लेकिन सुविधाओं के साथ विशिष्ट का तमगा कहां तक जायज है? ऐसे में नेताओं की विशिष्ट दिखने की यह सामंती सोच आज हम सबके लिए बड़ा मुद्दा है।

जनमतक्या सांसदों को निजी एयरलाइनों द्वारा विशेष सुविधाएं दिए जाने की सरकार की मांग जायज है?

हां 12 फीसद

नहीं 88 फीसद

क्या लालबत्ती संस्कृति लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुकूल है?

हां20 फीसद

नहीं 80 फीसद

आपकी आवाज

जिस तरह सरकार लाल और नीली बत्ती और विमानों में विशेष सुविधाओं की मांग कर रही है, इससे वो दिन दूर नहीं जब वो सांसदों के लिए उनकी विशेष छुट्टी पर निजी विमान उपलब्ध कराने की बात करेगी। -शुभम गुप्ता

अगर लाल बत्ती नाम की कोई संस्कृति है तो वह अलोकतांत्रिक है क्योंकि लोकतंत्र का आधार ही सर्व सम्मान में निहित है। -ईरा श्रीवास्तव

अगर साधारण सुविधा से भी काम चल सकता है तो विशेष सुविधा क्यों? आम जनता के खून पसीने की कमाई जो टैक्सों के रूप में इकट्ठा की जाती है, उसको विशेष सुविधाएं देने में क्यों खर्च किया जाए? -राजेश चौहान

लोकतंत्र कभी लाल बत्ती से सफर नहीं कर सकता। यदि ऐसा हो रहा है तो यकीनन लोकतंत्र को हम अभी कायदे से समझ सके हैं। -अवनेंद्र सिंह3 जीमेल.कॉम

यह हमारे देश का दुर्भाग्य है कि जिन्हें जनता को सुविधाएं देने के लिए चुना गया है, उन्हें अपनी सुविधाओं की ज्यादा चिंता है। अब जनता आम चुनाव में सारा हिसाब बराबर करेगी। -योगेश.शर्मा827 जीमेल. कॉम

लाल बत्ती के संदर्भ में चाहे जितनी दलीलें दी जाए लेकिन इससे सामंती मानसिकता ही प्रदर्शित होती है। दुर्भाग्य से सामंती सोच वालों ने लोकतंत्र का झंडा उठा रखा है। -धर्मेद्र कुमार दूबे 438 जीमेल.कॉम

हमें दुनिया के अन्य मुल्कों से सीखना होगा, जो अपने सांसदों को सिर्फ वेतन देते हैं और कुछ नहीं। घर, गाड़ी, बाकी खर्च वो अपने आप करते हैं। -विनीतमी.58 जीमेल.कॉम

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