नई दिल्ली [अनंत विजय]। आचार्य विष्णुकांत शास्त्री के संस्मरणों की पुस्तक का विमोचन का समारोह था। अन्य वक्ताओं के साथ नामवर सिंह भी मंच पर थे। जब उनकी बारी आई तो उन्होंने संस्मरण विधा के बहाने से समाज पर भी एक टिप्पणी कर दी थी जो अब भी समीचीन प्रतीत होती है।

उनकी कही वो बात अब-तक याद है। नामवर सिंह ने विमोचन समारोह में कहा था कि ‘इस भाग दौड़ के युग में हमलोग, यह पूरा देश और खासकर जब से यह हाईटेक और फास्टफूड वाली संस्कृति चल रही है, तब से हमलोग स्मृति-भ्रंश का शिकार हो गए हैं। यह देश आज और अब को याद करने में इतना बंधा हुआ है कि अतीत को याद करना पलायन माना जाता है।

‘नामवर सिंह ने तब भगवद्गीता को भी उद्धृत किया था, ‘जिस जाति, जिस समाज और जिस देश का स्मृति-भ्रंश हो जाए उसका विनाश निश्चित है।‘ उस समारोह में नामवर सिंह संस्मरण लेखन के संदर्भ में ये बात कह रहे थे और उनका जोर इस बात पर था कि संस्मरण लेखन स्मृति-भ्रंश के खिलाफ प्रतिरोध है। इस लेख में भी हम बात करेंगे स्मृति-भ्रंश की उस पृष्ठभूमि की जो फास्टफूड वाली संस्कृति के दौर में अपनी सुविधा के लिए आम जनता को भ्रमित करने के लिए तैयार की जाती है।

पिछले सप्ताह इस स्तंभ में वेब सीरीज पाताल-लोक की चर्चा की गई थी जिसकी प्रोड्यूसर फिल्म अभिनेत्री अनुष्का शर्मा हैं। वेब सीरीज पाताल-लोक में हिंदू धर्म के प्रतीकों को अपराध और अपराधियों से जोड़ने की एक सायास कोशिश दिखाई देती है। इसके अलावा भारतीय और भारतीयता की बात करनेवाली विचारधारा को कमतर और मॉब लिंचिंग आदि से जोड़कर दिखाने का उपक्रम भी है।

इस बात को लेकर अनुष्का शर्मा लगातार कई दिनों से सवालों के घेरे में है। अब जरा इसके दूसरे पहलू पर विचार करते हैं यानि कि अनुष्का के पति और क्रिकेटर विराट कोहली की। अनुष्का जहां एक ओर अपने वेब सीरीज के माध्यम से हिंदू धर्म प्रतीकों और हिंदुओं की राजनीति करनेवालों पर करारा प्रहार कर रही है वहीं उनके पति विराट कोहली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तारीफों के पुल बांधते रहते हैं।

अभी हाल ही में उन्होंने कोरोना संकट के दौरान संघ से जुड़े संगठन सेवा भारती के कामों की प्रशंसा करते हुए एक वीडियो जारी किया था जो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था। कहना न होगा कि पति पत्नी अलग अलग विचारों को लेकर समाज के सामने आ रहे हैं। पति पत्नी के इस तरह के कृत्यों से भी स्मृति-भ्रंश की पृष्ठभूमि तैयार होती है। जनता यह भूल जाती है कि किसने क्या किया ।

बॉलीवुड में देखें तो विराट कोहली और अनुष्का शर्मा ही सिर्फ ऐसे नहीं हैं जहां पति अलग विचारधारा का समर्थन और प्रचार करता है और पत्नी अलग विचारधारा के फैलाव के लिए प्रयत्नशील रहती है। ऐसी ही एक सुपरस्टार जोड़ी है रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण की। दीपिका पादुकोण मौजूदा सरकार के खिलाफ नजर आती है, नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के पहले भी कांग्रेस के पक्ष में साक्षात्कार आदि दे चुकी है।

पिछले दिनों भी जब उनकी फिल्म ‘छपाक’ रिलीज होनेवाली थी तो वो जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के आंदोलनकारी छात्रों के बीच जाकर मौन समर्थन दे आई थीं। भले ही तब वो अपनी फिल्म को हिट कराने का एक स्टंट था लेकिन सरकार विरोधियों के साथ खड़े होकर उन्होंने अपनी छवि और स्पष्ट कर दी थी। इसके अलावा भी दीपिका पादुकोण यदा-कदा ही सही लेकिन अपनी राजनीतिक प्रतिबद्धता स्पष्ट करती रही हैं। दूसरी तरफ उनके पति रणवीर सिंह भारतीय जनता पार्टी और उसके सर्वोच्च नेता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति अपना प्रेम प्रकट करने से कभी नहीं चूकते हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ झप्पी लेते हुए तस्वीर अपने इंस्टाग्राम पर साझा करते हुए लिखते हैं, ‘जादू की झप्पी, अपने महान देश के माननीय प्रधानमंत्री से मिलने की खुशी।‘ तब रणवीर सिंह के उस फोटो को इकतीस लाख से अधिक लाइक्स मिले थे। इसके अलावा भी रणवीर सिंह मोदी को लेकर अपने प्रेम को सार्वजनिक करने में नहीं हिचकते हैं। इस तरह से अगर देखें तो पत्नी भारतीय जनता पार्टी के विरोध में और पति भारतीय जनता पार्टी के साथ। अजब राजनीति की गजब कहानी।

पति पत्नी के अलग अलग राजनीतिक विचारधारा के समर्थन करने की कहानी इन्हीं दोनों पर आकर खत्म नहीं होती है। और भी कई सुपर स्टार हैं जो अलग-अलग समय पर अलग-अलग राजनीतिक दलों के साथ रहे हैं। अब अगर हम अपने एक और सुपर स्टार को देखें तो स्थिति और स्पष्ट होती है ये हैं अक्षय कुमार। अक्षय कुमार के बारे में ये साफ है कि वो भारतीय जनता पार्टी के साथ हैं, वो नरेन्द्र मोदी के प्रशंसक ही नहीं उनके समर्थक भी हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि मोदी भी उनको पसंद करते हैं।

चुनाव के पहले अगर नरेन्द्र मोदी का इंटरव्यू करना होता है तो अक्षय कुमार का ही चयन किया जाता है। कोरोना के संकट में जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पीएम केयर फंड की स्थापना करते हैं तो अक्षय कुमार सबसे पहले पच्चीस करोड़ रुपए उस फंड में दान करते हैं। इसके अलावा भी वो हमेशा मोदी के पक्ष में खड़े रहते हैं। दूसरी तरफ उनकी पत्नी हैं ट्विकंल खन्ना। ट्विंकल खन्ना हमेशा से भारतीय जनता पार्टी या नरेन्द्र मोदी पर तंज कसने से लेकर विरोध में टिप्पणियां करती रही हैं। पिछले साल अप्रैल में जब अक्षय कुमार ने नरेन्द्र मोदी का बहुचर्चित इंटरव्यू किया था उसमें मोदी ने ट्विकंल के विरोध को रेखांकित भी किया था।

मोदी ने तब मजाक में अक्षय कुमार से कहा भी था कि ‘जब मैं ट्विकंल खन्ना के ट्वीट्स देखता हूं तो कभी-कभी मुझे लगता है कि वो जिस प्रकार से अपना गुस्सा मुझ पर निकालती हैं उससे आपके पारिवारिक जीवन में बहुत शांति रहती होगी। उनका गुस्सा मुझपर निकल जाता है और आप सुकून से रह पाते हैं, मैं आपके किसी काम आ सका’। मोदी ने भले ही मजाक में ये बात कही थी लेकिन उन्होंने पूरी दुनिया को ये तो बता ही दिया था कि ट्विकंल खन्ना मोदी को लेकर विरोधी टिप्पणियां करती रहती हैं और अपना गुस्सा भी निकालती हैं। 

अगर हम सदी के महानायक और मेगास्टार अमिताभ बच्चन की बात करें तो वहां भी पति-पत्नी के बीच अलग-अलग विचार पलते हैं। अमिताभ बच्चन जब कांग्रेस के टिकट पर 1984 में प्रयागराज (तत्कालीन इलाहाबाद) से चुनाव लड़े थे तब जया बच्चन ने उनके लिए चुनाव प्रचार किया था। जाहिर सी बात है कि तब उनको कांग्रेस के लिए प्रचार करना पड़ा था लेकिन जब बच्चन साहब का कांग्रेस से मोहभंग हुआ तो अमिताभ बच्चन, नरेन्द्र मोदी की ओर आकर्षित हुए।

अमिताभ बच्चन ने मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए ही उनको समर्थन देना शुरू कर दिया था परोक्ष भी और प्रत्यक्ष भी। मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद तो दोनों के बीच की नजदीकियों को पूरी दुनिया ने देखा। लेकिन जया बच्चन ने अमिताभ बच्चन के साथ भारतीय जनता पार्टी की ओर जाने से बेहतर समझा कि समाजवादी पार्टी की ओर रुख कर लिया जाए और वो मुलायम सिंह के साथ हो लीं।

समाजवादी पार्टी ने भी उनको इज्जत बख्शी और वो 2004 से लगातार समाजवादी पार्टी के नुमाइंदे के तौर पर राज्यसभा की सदस्य हैं। बॉलीवुड का ये नया ट्रेंड चौंकाता तो है लेकिन साथ ही उनकी बदलती मानसिकता की ओर भी संकेत करता है। संकेतों को पकड़ा जाता है उसको व्याख्यित नहीं किया जा सकता है।  

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