अवधेश कुमार। दिल्ली पुलिस द्वारा संदिग्ध आतंकियों की गिरफ्तारी, उनसे बरामद विस्फोटक और हथियारों ने फिर यह साबित किया कि भारत जिहादी आतंकियों के निशाने पर है। पुलिस ने इन गिरफ्तारियों से कितने हमलों को टाला या हम सबको कितने आतंकी हमलों से बचाया, इसका आकलन वही कर सकते हैं जो आतंकी खतरे को अच्छे से समझते हैं। गिरफ्तार संदिग्धों के कब्जे से आरडीएक्स, हथगोले, पिस्टल आदि बरामद होने की सूचना है। ये सारी बरामदगी अभी केवल एक जगह प्रयागराज से हुई है। प्रयागराज से गिरफ्तार संदिग्ध आतंकी जीशान के पास ये विनाशकारी सामग्री मौजूद थी तो उसका इस्तेमाल वह कहां और कैसे करता, इस पर विचार करते ही खौफ पैदा होता है। दिल्ली पुलिस कह रही है कि आरडीएक्स और हथगोले की खेप पाकिस्तान से भारत आई और विस्फोटक यहां भी बनाने की कोशिश हुई।

जो आतंकी गिरफ्तार हुए हैं, उनमें जान मोहम्मद उर्फ समीर कालिया मुंबई के सायन का रहने वाला है। वह ड्राइवर है। आसपास के लोग बता रहे हैं कि वह तो पारिवारिक आदमी था। वास्तव में आतंकियों की कोई अलग पहचान नहीं होती। कब उन्हें आतंकी बना दिया गया या वे बन गए, इसका कोई अनुमान नहीं लग सकता। समीर की तरह चाहे वह ओसामा ऊर्फ सानी हो मूलचंद उर्फ साजू उर्फ लाला हो, जीशान कमर, मोहम्मद अबू बकर और मोहम्मद आमिर जावेद हो, इन सबके बारे में कोई नहीं कह सकता था कि ये आतंकी होंगे। इनमें से चार उत्तर प्रदेश के और एक दिल्ली का है। आप इनके मोहल्ले में चले जाइए, आपको उसी प्रकार की जानकारी मिलेगी, जैसी समीर कालिया के बारे में मिली। समीर कालिया का संबंध अंडरवर्ल्ड से हो गया था। इसमें पाकिस्तान में छिपे दाऊद इब्राहिम के भाई अनीस इब्राहिम की भी भूमिका पुलिस बता रही है। पुलिस के अनुसार, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ ने अनीस इब्राहिम को भारत में फिर से विस्फोट कराने की जिम्मेदारी दी थी। उसी ने समीर कालिया को निश्चित जगहों पर विस्फोटक, हथियार आदि भेजने का काम दिया था। ये दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र के वे स्थान हैं जहां हमले की योजना बनाई गई थी।

गिरफ्तार आतंकियों के मामले में सीमा पार का पहलू इस मायने में महत्वपूर्ण है कि दो आतंकी ओसामा और जीशान को पाकिस्तान के उसी थाट्टा में प्रशिक्षित किया गया, जहां 26/11 का हमला करने वाले कसाब सहित अन्य आतंकियों को किया गया था। जीशान वहां पहले पहुंचा था, लेकिन ओसामा अप्रैल 2021 में लखनऊ से विमान के जरिये मस्कट गया, वहां से वह पाकिस्तान पहुंचा, जहां ग्वादर पोर्ट से नाव पर उसे थाट्टा ले जाया गया। वहां वे एक फार्म हाउस में रहे, जहां तीन पाकिस्तानी उन्हें प्रशिक्षण दे रहे थे। इनमें दो सेना की वर्दी पहनते थे। उन्हें बारूदी सुरंग और अन्य विस्फोटक बनाने तथा हथियार चलाने का प्रशिक्षण दिया गया। गिरफ्तार आतंकियों ने बताया कि कि वहां और भी 15-16 लोग प्रशिक्षण ले रहे थे, जिनमें से अधिकांश बांग्ला भाषी थे। संभव है वे बांग्लादेशी हों। इसका अर्थ यही हुआ कि भारत और दुनिया द्वारा आवाज उठाने के बावजूद पाकिस्तान अभी भी आतंकी ट्रेनिंग सेंटर चला रहा है। वहां आतंकी ढांचा बदस्तूर कायम है।

यह हमारे, आपके, यहां के नेताओं, सबके लिए सतर्क होने का समय है। आतंकी हमारे आपके बीच ही हैं। सीमा पार से उन्हें आतंकी बनाने, प्रशिक्षित करने, संसाधन मुहैया कराने आदि के षड्यंत्र लगातार रचे जा रहे हैं। अफगानिस्तान में तालिबान के आधिपत्य के बाद जिस तरह पाकिस्तान का वहां वर्चस्व फिर से कायम हुआ है, उसमें भारत में आतंकी हमलों का खतरा ज्यादा बढ़ गया है। हालांकि, वर्तमान षड्यंत्र उसके पहले का है, लेकिन यह आगे और विस्तारित हो सकता है, इसका ध्यान भारत के हर व्यक्ति को रखना चाहिए। गिरफ्तार आतंकियों की योजना ऐसी जगहों पर हमला करने की थी, जहां जान और माल, दोनों की क्षति हो। ये धार्मिक उत्सवों, चुनावी रैलियों तथा शहरों के स्थानीय लोगों को निशाना बनाने की योजना पर काम कर रहे थे। हम सब जानते हैं कि उत्तर प्रदेश के धार्मिक स्थल ही नहीं वहां के अनेक राजनीतिक, धार्मिक नेता आतंकियों के निशाने पर हैं। अगर ये चुनावी रैलियों को निशाना बनाने का षड्यंत्र रच रहे थे और दूसरे माड्यूल भी हैं तो फिर खतरा बहुत बड़ा है।

आने वाले समय में नवरात्र का उत्सव देश भर में मनाया जाएगा। उस समय सुरक्षा की विशेष व्यवस्था की आवश्यकता नए सिरे से इन आतंकियों की गिरफ्तारी ने उत्पन्न कर दी है।

उत्तर प्रदेश के लिए इसमें विशेष सीख इसलिए है, क्योंकि वहां जब भी आतंकियों को गिरफ्तारियां होती है, राजनीतिक विवाद तूल पकड़ने लगता है। अपनी नासमझी, गैर जानकारी और एक समुदाय का वोट पाने की सस्ती राजनीति के कारण नेता समुदाय विशेष को तुष्ट करने के लिए गिरफ्तारियों का विरोध करते हैं। अगर आतंकवाद के षड्यंत्र के आरोप में गिरफ्तार लोग एक ही समुदाय के हैं तो इसका यह अर्थ नहीं कि वे सारे निदरेष हैं और कोई सरकार जानबूझकर उनको गिरफ्तार करा रही है। आखिर पुलिस ने इन लोगों को ही क्यों गिरफ्तार किया? यह वह प्रश्न है, जिसे नेताओं को अपने आप से पूछना चाहिए। यही बात महाराष्ट्र पर भी लागू होती है, जहां शिवसेना के नेतृत्व में सरकार गठित होने के बाद उसकी आतंकवाद को लेकर भी भाषा बदल गई है। वहां पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को अत्यंत कठिन स्थिति में काम करना पड़ रहा है। सत्ता की दलीय राजनीति अपनी जगह है, लेकिन आतंकवाद के विरुद्ध पूरे देश को एकजुट होना चाहिए।

(लेखक राजनीतिक विश्लेषक हैं)

Edited By: Tilakraj