[ शिवेंद्र कुमार सिंह ]: अगर आप कभी पाकिस्तान जाएं और वहां के किसी शख्स से मुश्किल से मुश्किल काम के लिए कहें तो यही जवाब मिलेगा, कोई मसला नहीं। दरअसल यह वहां के लोगों का मनपसंद जुमला है, लेकिन पिछले कुछ सालों से पाकिस्तान इतने अधिक मसलों में उलझ गया है कि उसकी रही-सही अहमियत भी खत्म होती जा रही है। हाल के एक सर्वेक्षण के अनुसार पाकिस्तानी जनता की नजर में बेरोजगारी, अर्थव्यवस्था, अलगाववाद, महंगाई, आतंकवाद सरीखे बड़े मसले हैैं। विडंबना यह है कि इन मसलों को भूलकर पाकिस्तान कश्मीर मसले को तूल देने में लगा हुआ है।

पाकिस्तान कर्जे में डूबा मुल्क है

पाकिस्तान कर्जे में डूबा मुल्क है। पूरे देश में अस्थिरता का माहौल है। ऐसे माहौल में भी जिस एक बात ने साल-छह महीने में एक बार ही सही पाकिस्तानियों को गर्व का मौका दिया और उनके चेहरे पर मुस्कान बिखेरी वह कुछ खेलों में उसका प्रदर्शन होता था। अफसोस अब इस मोर्चे पर भी वह बुरी तरह नाकाम हो रहा है। पाकिस्तान जिन परंपरागत खेलों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम कमाता था वहां भी उसकी शर्मनाक हार हो रही है। हॉकी से लेकर क्रिकेट तक जिन खेलों में पाकिस्तानियों की जान बसती थी उनमें भी दुर्दशा का आलम है। क्रिकेट में पाकिस्तान को हालिया हार श्रीलंका के खिलाफ टी-20 सीरीज में मिली।

श्रीलंका ने पाकिस्तान को उसी के घर में ‘व्हाइटवॉश’ किया

तीन मैचों की सीरीज में श्रीलंका ने पाकिस्तान को उसी के घर में ‘व्हाइटवॉश’ किया। इस हार से पाकिस्तान में कोहराम मच गया है, क्योंकि पाकिस्तान की टीम टी-20 रैंकिंग में दुनिया की नंबर एक टीम है और श्रीलंका की टीम सातवीं पायदान पर है। सातवीं पायदान की टीम से इस तरह हारना पाकिस्तान के क्रिकेट फैंस को पचा नहीं। उनकी नाराजगी इसलिए और ज्यादा थी, क्योंकि श्रीलंका ने इस सीरीज के लिए सुरक्षा वजहों से अपनी ‘बी’ टीम भेजी थी। श्रीलंका के प्रमुख दस खिलाड़ियों ने इस दौरे पर जाने से इन्कार कर दिया था।

भारत की स्थिति पाकिस्तान के मुकाबले मजबूत है

ऐसा नहीं कि एक देश के तौर पर भारत के सामने चुनौतियां नहीं हैं। चुनौतियां यहां भी हैं, लेकिन पाकिस्तान के मुकाबले हर मामले में भारत की स्थिति आज काफी मजबूत है। पाकिस्तानी जनता को यह सालता है कि भारत में शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य तक सभी सुविधाएं बेहतर हैं। एक समय पाकिस्तान कुछ मामलों में खुद को भारत से बेहतर पाता था, लेकिन आज भारत उससे हर मामले में आगे निकलता दिख रहा है। भारत की जीडीपी पाकिस्तान से कई गुना ज्यादा है। भारत में आइआइटी की तादाद लगातार बढ़ रही है और एम्स की संख्या भी दर्जन भर पहुंचने वाली है। देश के दस शहरों में मेट्रो चल रही है। दूसरी तरफ पाकिस्तान है जहां लाहौर में मेट्रो ही शुरू नहीं हो पा रही है। पाकिस्तान में अन्य उद्योगों के साथ फिल्म इंडस्ट्री का हाल भी चौपट है। राजनीतिक अस्थिरता का आलम यह है कि कोई नहीं जानता कि इमरान खान कब तक सत्ता में हैैं?

इमरान के भाषण की आलोचना तमाम क्रिकेटरों ने की

बीते दिनों इमरान खान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से भारत को खुली धमकी दी और एक तरह से जेहाद की पैरवी की। हैरत नहीं कि क्रिकेटर रहे इमरान के इस भाषण की आलोचना तमाम क्रिकेटरों ने की। पाकिस्तानी जनता को लग रहा है कि इमरान खान से देश तो क्या क्रिकेट भी नहीं संभल रहा है। पिछले दिनों पाकिस्तान का एक वायरल वीडियो हुआ जिसमें कुछ लोग श्रीलंका की टीम के साथ चल रहे सुरक्षा काफिले की गाड़ियां गिन रहे थे।

श्रीलंका के खिलाफ सीरीज कराकर पाक क्या संदेश देना चाहता है?

पाकिस्तान का मीडिया यह सवाल उठा रहा है कि आखिर श्रीलंका के खिलाफ सीरीज कराकर पाकिस्तान क्या संदेश देना चाहता है? अगर यह कि अब पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों के लिए सुरक्षित जगह है तो उसे अपनी उस जनता को धोखा नहीं देना चाहिए जो श्रीलंका के साथ हुए मैचों के दौरान बंधक सी बना ली गई थी। सुरक्षा के चलते लाहौर में कफ्र्यू जैसे हालात थे और एंबुलेस तक को रोका जा रहा था। लाहौर शहर में ही 2009 में श्रीलंका की टीम पर आतंकी हमला हुआ था। साफ है कि दस साल बाद भी पाकिस्तान जहां का तहां है।

बुरे वक्त में खेलों का आयोजन

यह सही है कि पाकिस्तानी आवाम को अब खेलों में ही थोड़ी आस दिखती है, लेकिन क्या इस बुरे वक्त खेलों का आयोजन उसके चेहरे पर खुशियां ला पाएगा? पाकिस्तान के पूर्व कप्तान रमीज राजा का कहना है कि उनकी टीम रद्दी प्रदर्शन कर रही है। कुल मिलाकर संकट से घिरे पाकिस्तान को अपनी जमीन पर श्रीलंका से मैच खेलने से कोई फायदा नहीं हुआ। सख्त सुरक्षा में हुए मैच और उनके नतीजों, खासकर टी-20 मैचों के नतीजों के चलते वहां की जनता असंतोष के साथ निराशा से घिरती दिख रही है।

[ लेखक खेल पत्रकार हैं ]

Posted By: Bhupendra Singh

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