पीयूष द्विवेदी। अब 2022 का आगमन हो चुका है। कोरोना से लड़ाई में देश मजबूत स्थिति में बना हुआ है। देश की जो आर्थिक गतिविधियां कोरोना संकट के कारण डांवाडोल हो गई थीं, अब धीरे-धीरे संभलने लगी हैं। ऐसी आपदा में भी अपने कुशल वित्तीय प्रबंधन से मोदी सरकार ने न केवल जनकल्याण की योजनाओं पर भारी-भरकम खर्च किया है तथा मुफ्त टीकाकरण जैसा अभियान चलाया है, अपितु राजकोषीय घाटे को भी नियंत्रण में रखने में कामयाब रही है। आज देश की नब्बे प्रतिशत वयस्क आबादी को टीके की पहली खुराक और साठ प्रतिशत से अधिक आबादी को दोनों खुराक लग गई हैं।

परिणामत: कोरोना को लेकर लोगों में भय का वातावरण कम हुआ है। संक्रमण की रफ्तार भी अपेक्षाकृत रूप से नियंत्रित है। इन सब बातों को देखते हुए यह आशा करना अनुचित नहीं है कि 2022 में देश और तीव्र गति के साथ विकास के पथ पर आगे बढ़ेगा। हालांकि कोरोना के नए रूप ओमिक्रोन ने दुनिया के कई देशों में जिस तरह से तबाही मचाई है, वह डराने वाला है। बहुत से लोग तो इसे भारत में तीसरी लहर की शुरुआत भी मान रहे हैं। वैसे कोरोना की दो-दो लहर झेलेने के बाद अब देश की सरकारें, नागरिक और हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था से इतनी उम्मीद तो की ही जा सकती है कि वे कोरोना के इस नए रूप से निपटने के लिए पूरी तरह से चाक-चौबंद और तैयार होंगे तथा पिछली बार जो समस्याएं दिखाई दी थीं, अबकी बार वे नहीं होंगी।

चूंकि कोरोना अब जीवन का एक अंग बन चुका है और कहा नहीं जा सकता कि अभी कितने समय तक इसके कितने नए रूप आते रहेंगे। अत: हमें उनसे डरकर घर में बैठने के बजाय बचाव के उपायों के साथ इस महामारी का मुकाबला करते हुए जीवन को गतिशील रखने की आदत विकसित करनी होगी। कोरोना से बचने के लिए जो गतिविधियां रोकी जा सकती हैं, उन्हें अवश्य रोका जाए, लेकिन सबकुछ बंद करके बैठ जाने का विकल्प कम से कम भारत के पास नहीं है।

सरकार ने कोरोना संकट के बीच भी उद्योगों और अर्थव्यवस्था को तो यथासंभव गतिशील रख लिया, लेकिन इस संकट ने शिक्षा क्षेत्र का बहुत नुकसान किया है और छात्रों का खूब समय बर्बाद हुआ है। तमाम शैक्षिक एवं प्रतियोगी परीक्षाएं स्थगित होने से भी छात्रों के लिए परेशानी पैदा हुई है। अत: इस वर्ष सरकार का प्रयास होना चाहिए कि किसी भी स्थिति में कम से कम शैक्षिक गतिविधियों में कोई रुकावट न आए। चाहें कोई भी स्थिति हो, शैक्षिक गतिविधियां सतत जारी रहें। आनलाइन या आफलाइन, जहां जिस प्रकार से संभव हो, सभी परीक्षाओं का समय पर आयोजन किया जाए और समय पर उनके परिणाम आएं जिससे छात्र जीवन में आगे बढ़ सकें।

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं)

Edited By: Kamal Verma