संजय मिश्र। मध्य प्रदेश में कोरोना की बढ़ती महामारी ने सरकार के सामने कई चुनौतियां पेश की हैं। संक्रमण दर बढ़ने के साथ हर दिन स्थिति विकट होती जा रही है। इस पर नियंत्रण के लिए यद्यपि कड़े कदम उठाए गए हैं, लेकिन बढ़ते संक्रमण की तुलना में हर दिन व्यवस्था नया विस्तार मांगने लगी है। कोरोना के खिलाफ लड़ाई में सबसे बड़ी कमजोरी सामाजिक जागरूकता की कमी है, जो सबसे बड़ी चुनौती बन रही है।

ग्रामीण क्षेत्रों की बात तो दूर शहरी क्षेत्रों में भी बहुतायत लोग कोरोना गाइड लाइन की अवहेलना कर रहे हैं। वे खुद के साथ परिवार एवं समाज को संकट में डाल रहे हैं। लोगों की सुविधा के लिए खोले जा रहे बाजारों में बिना मास्क के घूमती भीड़ कहीं भी देखी जा सकती है। यही कारण है कि राज्य सरकार ने कोरोना के खिलाफ एक साथ कई मोर्चे खोल दिए हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चिकित्सा प्रबंध दुरुस्त करने के साथ प्रशासनिक सक्रियता एवं सामाजिक जागरूकता के अभियान पर जोर दिया है। इसके लिए वह दिन रात जुटे हैं। मंत्री से लेकर संतरी तक को व्यवस्था की निगरानी में लगाया गया है। समाज के जागरूक लोगों को भी कोरोना वालंटियर बनकर सहयोग करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। भोपाल, इंदौर सहित कई शहरों में मुख्यमंत्री ने सड़क पर उतरकर लोगों को मास्क वितरित किए तथा मंत्रियों व शासन-प्रशासन के अधिकारियों को भी इस काम में लगाया। सोमवार की शाम को उन्होंने एक वैन में सवार होकर भोपाल के विभिन्न मार्गो पर लोगों से मास्क पहनने और शारीरिक दूरी का पालन करने की अपील की। शायद वह देश के पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं जो सड़क पर उतरकर आम जन को जागरूक करने के लिए इस तरह का अभियान चला रहे हैं।

महात्मा गांधी के सत्याग्रह की तर्ज पर मुख्यमंत्री ने मंगलवार 12 बजे से बुधवार तक समाज को जगाने के लिए भोपाल के मिंटो हॉल में 24 घंटे का स्वास्थ्य आग्रह (एक तरह से सत्याग्रह जैसा धरना) किया। इसका उद्देश्य लोगों को यह संदेश देना था कि कोरोना से बचाव का सबसे बड़ा उपाय मास्क पहनना और शरीरिक दूरी का पालन करना है। मुख्यमंत्री ने खुलकर अपना दुख भी व्यक्त किया कि लोग अभी भी कोरोना गाइड लाइन की इस अनिवार्यता को नहीं समझ रहे हैं या समझकर लापरवाही कर रहे हैं। इसी वजह से कोरोना लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि मास्क नहीं पहनने वालों से बात न करें, दुकानदार उन्हें सामान न दें, दफ्तरों में उन्हें प्रवेश न दिया जाए और यदि किसी तरह पहुंच गए तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।

मुख्यमंत्री का यह स्वास्थ्य आग्रह न सिर्फ चर्चा में है, बल्कि सबका ध्यान खींचने में सफल हुआ है। पूरे राज्य में उनके समर्थन में विभिन्न्न संगठनों के कार्यकर्ता खुलकर आए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ के बेटे और छिंदवाड़ा से कांग्रेस सांसद नकुल नाथ ने बाकायदा ट्विट कर मुख्यमंत्री के स्वास्थ्य आग्रह के जरिये उठाए मुद्दों का समर्थन किया है। उन्होंने स्वयं भी मास्क के प्रति जागरूकता अभियान चलाने की बात कही है। मुख्यमंत्री ने अपने इस उद्देश्य से समाज को जोड़ने के लिए साधु-संतों एवं विभिन्न धर्मो के विद्वानों से भी मदद मांगी है। बुधवार को उनके साथ कई संत-फकीर उपस्थित हुए। हरिद्वार के स्वामी चिदानंद सरस्वती ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये शिवराज की पहल को सबके लिए अनुकरणीय बताया। उम्मीद की जा रही है कि इससे मास्क और शारीरिक दूरी की अनिवार्यता पर समाज का ध्यान बढ़ेगा और सरकार की चुनौती कुछ कम होगी।

जागरूकता अभियान के साथ-साथ कोरोना के इलाज के लिए प्रशासनिक प्रबंध को लेकर भी सरकार का जोर है। सभी मंत्रियों से कहा गया है कि वे जिलों में जाकर कोरोना नियंत्रण में मदद करें। इलाज के समुचित प्रबंध किए जाएं और निगरानी की जाए। इसके जरिये शिवराज आम आदमी को यह विश्वास दे रहे हैं कि हर मुसीबत में सरकार उनके साथ है।

कोरोना संक्रमितों के इलाज में कई रियायतें : प्रदेश में कोरोना के हर दिन मिलने वाले मरीजों का आंकड़ा बुधवार को चार हजार के पार हो गया। सक्रिय मरीजों की संख्या 26 हजार से ऊपर हो गई है, जो अब तक की सर्वाधिक है। इस भयावह तस्वीर के बीच मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने बुधवार को कई बड़े निर्णय लिए हैं। अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या 24 हजार से बढ़ाकर 36 हजार कर दी गई है। इतना ही नहीं, 720 फीवर क्लीनिकों में हर दिन 40 हजार कोरोना संदिग्धों की जांच की जाएगी। फिलहाल हर दिन करीब 40 हजार सैंपल लिए जा रहे हैं, पर जांचें 33 हजार के करीब ही हो पा रही हैं। इस कमी को दूर किया जाएगा। कोरोना जांच को आसान बनाने के लिए सरकार ने जांच दरों में कमी कर दी है। अब आरटीपीसीआर जांच 700 रुपये में होगी, जबकि रैपिड एंटीजन के लिए 300 रुपये का शुल्क तय किया गया है।

मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की है कि निजी अस्पतालों को अब डी-डाइमर टेस्ट 500 रुपये में तथा सीआरपी टेस्ट 200 रुपये में करना होगा। एबीजी टेस्ट 600 रुपये, आइएल-6 टेस्ट एक हजार रुपये में करने की व्यवस्था भी बनाई गई है। भोपाल में दो निजी मेडिकल कॉलेजों में कोरोना मरीजों के मुफ्त इलाज के लिए सरकार ने 550 बिस्तर आरक्षित किए हैं। हर जिले में एक कोविड केयर सेंटर शुरू किया जाएगा। रेमडेसिविर दवा की कमी को देखते हुए स्पष्ट किया है कि सरकार न सिर्फ इसकी निगरानी करेगी, बल्कि जरूरत पडने पर उपलब्ध भी कराएगी। दुरुपयोग रोकने के लिए गाइडलाइन तैयार की जा रही है।

[स्थानीय संपादक, नवदुनिया, भोपाल]

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