सतीश सिंह। कोरोना महामारी की वजह से विकास का पहिया थम गया था, लेकिन अब विकास की गाड़ी आगे बढ़ने लगी है। सितंबर महीने में निर्यात में 5.27 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक और इंजीनियरिंग वस्तुओं की अहम भूमिका रही। इनमें क्रमश: 0.04 प्रतिशत और 3.73 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि दवाओं एवं दवा के उत्पादों का निर्यात 24.3 प्रतिशत बढ़ा। हालांकि इस अवधि में रत्न एवं आभूषणों के निर्यात में 24.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वर्ष 2020 के पहले छह महीनों में निर्यात 21.43 प्रतिशत कम होकर 125.06 अरब डॉलर हो गया था, पर जून महीने के बाद तस्वीर बदलने लगी। सितंबर महीने में कुल निर्यात 27.65 अरब डॉलर रहा, जबकि विगत वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 26.02 अरब डॉलर रहा था। गौरतलब है कि वर्ष 2020 के फरवरी महीने में निर्यात में सिर्फ 2.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।

सितंबर महीने में आयात 19.6 प्रतिशत कम होकर 30.31 अरब डॉलर रह गया। पिछले साल इसी महीने में यह 37.69 अरब डॉलर रहा था। निर्यात में बढ़ोतरी और आयात में कमी होने से भारत का व्यापार घाटा सितंबर महीने में कम होकर 2.92 अरब डॉलर रह गया, जो विगत तीन महीनों में सबसे कम है। देश में अनलॉक का छठा चरण शुरू होने वाला है। इस चरण में अर्थव्यवस्था के लगभग सभी दरवाजे खुल जाएंगे। अप्रैल महीने की तुलना में सितंबर महीने में जीएसटी वसूली, बिजली खपत, ऑटो बिक्री आदि बढ़ी है। आर्थिक गतिविधियों के बढ़ने से ईंधन की खपत में भी इजाफा हो रहा है। वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल के मुकाबले सितंबर महीने में जीएसटी वसूली में तीन गुणा बढ़ोतरी हुई है। सितंबर में जीएसटी वसूली 95.48 हजार करोड़ रुपये की हुई, जो अगस्त के मुकाबले 10.4 प्रतिशत अधिक रहा।

मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री में काम शुरू हो गया है। फैक्टियों में काम करना शुरू हो गया है। मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री को निर्यात के नए ऑर्डर मिलने लगे हैं। सितंबर महीने में बिजली की खपत 113.54 अरब यूनिट रही, जो अप्रैल के मुकाबले अधिक था। यह पिछले साल की समान अवधि में कुल बिजली खपत 107.51 अरब यूनिट से अधिक है। बिजली की खपत में बढ़ोतरी होने का अर्थ यह है कि औद्योगिक और कारोबारी गतिविधियों में फिर से तेजी आ रही है। पेट्रोल की बिक्री वर्ष 2019 के सितंबर महीने के मुकाबले इस बार ढाई प्रतिशत बढ़ी है।

मासिक आधार पर अगस्त के मुकाबले सितंबर में पेट्रोल की बिक्री में 10.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। सितंबर महीने में 22 लाख टन पेट्रोल की बिक्री हुई। डीजल की बिक्री भी अगस्त के मुकाबले सितंबर में 22 प्रतिशत बढ़ी। अगस्त में डीजल 48.4 लाख टन बिका, जबकि सालाना आधार पर डीजल की बिक्री में सात प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। देखा जाए तो निजी वाहनों का उपयोग बढ़ने से पेट्रोल की बिक्री बढ़ रही है, जबकि डीजल की बिक्री में कमी आने का कारण स्कूल बस और अन्य सार्वजनिक वाहनों के इस्तेमाल में कमी आना है।

सितंबर महीने में रेलवे को माल ढुलाई से 13.5 प्रतिशत के राजस्व की बढ़ोतरी हुई, जबकि अप्रैल महीने में इसमें 43.7 प्रतिशत की कमी आई थी। सितंबर महीने में 53.3 करोड़ टन का माल ढुलाई हुआ, जिससे 50.16 हजार करोड़ रुपये के राजस्व की प्राप्ति हुई। हालांकि पहली छमाही में माल ढुलाई के वॉल्यूम में नौ प्रतिशत की कमी आई और कमाई में भी 17 प्रतिशत की कमी आई। वार्षकि आधार पर जून तिमाही में माल ढुलाई में 21 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसी तिमाही में माल ढुलाई से होने वाली कमाई 31 प्रतिशत कम होकर 22.26 हजार करोड़ रुपये के स्तर पर आ गई, लेकिन सितंबर में माल ढुलाई 15 प्रतिशत अधिक रही और वर्ष 2019 के मुकाबले इससे राजस्व 13.61 प्रतिशत बढ़कर 9.9 हजार करोड़ रुपये हो गया। अनलॉक की प्रक्रिया शुरू होने के बाद से ऑटो बिक्री हर महीने बढ़ रही है।

वार्षिक आधार पर सितंबर महीने में टाटा मोटर्स की बिक्री 37 प्रतिशत, मारुति सुजुकी की 30 प्रतिशत, बजाज ऑटो की 10 प्रतिशत और हुंडई इंडिया की बिक्री 23 प्रतिशत बढ़ी है। उल्लेखनीय है कि देश की जीडीपी में ऑटो क्षेत्र की भागीदारी लगभग सात प्रतिशत है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद में 23.9 प्रतिशत गिरावट दर्ज होने के बाद ये आंकड़े उत्साह जगाने वाले हैं।

इस साल उधारी और जमा में 10 लाख करोड़ रुपये ज्यादा अंतर रहा है, क्योंकि तालाबंदी में उधारी की मांग काफी कम रही है, जबकि मार्च से लेकर सितंबर तक बैंकों के पास छह लाख करोड़ रुपये की डिपॉजिट आई थी, लेकिन उधारी में एक लाख करोड़ रुपये की कमी आई। पिछले कुछ पखवाड़ों से क्रेडिट ग्रोथ 5.5 प्रतिशत रही, जबकि जमा वृद्धि दर 10 प्रतिशत से ऊपर रही है। इससे पहले 25 सितंबर के पखवाड़े में बैंकों की कुल क्रेडिट ग्रोथ 5.15 प्रतिशत बढ़ी थी। यह 102.72 लाख करोड़ रुपये हो गई थी, जबकि इसी अवधि में डिपॉजिट 10.51 प्रतिशत बढ़कर 142.64 लाख करोड़ रुपये हो गई थी।

कृषि और संबंधित गतिविधियों में ऋण वृद्धि 4.9 प्रतिशत बढ़ी है। पिछले साल अगस्त में यह 6.8 प्रतिशत बढ़ी थी। सेवा क्षेत्र में क्रेडिट ग्रोथ घटकर 8.6 प्रतिशत रही है, जो एक साल पहले इसी अवधि में 13.3 प्रतिशत रही है। इंडस्ट्री में क्रेडिट ग्रोथ घटकर आधा प्रतिशत रह गई है। एक साल पहले अगस्त में यह 3.9 प्रतिशत थी। हालांकि पर्सनल लोन ने इस दौरान अच्छी ग्रोथ हासिल की है। पर्सनल लोन में क्रेडिट ग्रोथ अगस्त महीने में 10.6 प्रतिशत रही है। एक साल पहले इसी महीने में यह 15.6 प्रतिशत थी। त्योहारी सीजन में पर्सनल लोन में और भी वृद्धि आने की संभावना है। इन तमाम तथ्यों से देश में आíथक गतिविधियों में तेजी आने के स्पष्ट संकेत दिखते हैं।

देश की अर्थव्यवस्था पर छाए संकट के बादल धीरे-धीरे छंट रहे हैं। आर्थिक गतिविधियों में तेजी आ रही है। कई क्षेत्रों में सुधार के संकेत स्पष्ट दिख रहे हैं। इसी माह से त्योहारों की शुरुआत भी हो गई है। उम्मीद है कि सरकार द्वारा दी जा रही राहतों और विकास के पहिये के फिर से गतिशील होने से सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था को पंख लगेंगे। माना जा रहा है कि त्योहार के इस समय में ई-कॉमर्स कंपनियों, बैंक, विनिर्माण क्षेत्र आदि के कारोबार में विशेष तेजी आएगी।

(लेखक आर्थिक मामलों के जानकार हैं) 

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