वाइ एस बिष्ट। India China Border Tension: पूरी दुनिया आज कोरोना वायरस से लड़ रही है और इस संकट के लिए चीन को जिम्मेदार मान रही है। वहीं चीन इस मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए नए-नए एजेंडे अपना रहा है। एक ओर वह सीमा पर सेना का जमावडा बढ़ाकर भारत को युद्ध के लिए ललकार रहा है, वहीं नेपाल सरकार पर दबाव बनाकर उत्तराखंड से लगी सीमा पर भारत द्वारा सड़क निर्माण में बाधा डालने में लगा हुआ है।

चीन ने अपनी सेना का जमावड़ा बढा दिया : दरअसल चीन शुरू से ही सीमा विस्तार की नीति पर काम करता रहा है। वह अपने देश से लगने वाली सीमा पर लगातार बुनियादी ढांचा विकसित और उसे विस्तारित करता आया है तथा जब भारत भी इस तरह से अपनी सीमा में बुनियादी ढांचे का विकास व विस्तार करने लगा तो यह उसको नागवार गुजर रहा है। यही बात उसको रास नहीं आ रही है और इसी का परिणाम है कि उसने भारत से लगने वाली सीमा पर अपनी सेना का जमावड़ा बढा दिया है। वैसे भारत अभी सीमा पर बुनियादी ढांचा विकास के मामले में चीन के मुकाबले बहुत पीछे है, लेकिन वह लद्दाख से लेकर अरुणाचल तक 3,488 किमी लंबे सीमावर्ती क्षेत्रों में रोड और हवाई संपर्क के मामले में चीन के दबदबे को लगातार चुनौती दे रहा है।

दारबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी रोड : भारत सरकार द्वारा सीमाओं पर सड़कों का जाल बिछाने से चीन चिढ़ा हुआ है। पूर्वी लद्दाख में चीन द्वारा तनाव बढ़ाने वाली हरकतों के पीछे भारत का बॉर्डर इन्फ्रास्ट्रक्चर के मामले में आक्रामक होना है। भारत ने पिछले साल 255 किमी लंबे दारबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी रोड को पूरा किया। कुछ अतिरिक्त लिंड रोड और पुलों को बनाने का काम चल रहा है। भारत द्वारा किए गए ये कार्य चीन को रास नहीं आ रहे हैं और वह भारत को एक चुनौती के रूप में देख रहा है व इसके लिए वह लगातार अपने पड़ोसी देशों की मदद से भारत को परेशान करने में लगा हुआ है।

लद्दाख की पैंगोंग झील तनाव की वजह : भारतीय विशेषज्ञों के अनुसार चीन बोलता कुछ है, करता कुछ है, दिखता कुछ और है। उसकी कथनी-करनी में भारी अंतर है। वर्ष 1962 से ही दोनों देशों के बीच लद्दाख की पैंगोंग झील तनाव की वजह से सुर्खियों में रही है। वर्ष 2017 के अगस्त में पैंगोंग के किनारे भारत और चीन के सैनिक भिड़ गए थे। पैंगोंग लेह के दक्षिणपूर्व में 54 किमी की दूरी पर है। करीब 134 किमी लंबी यह झील 604 वर्ग किमी के दायरे में फैली हुई है। जिस जगह पर इसकी चौड़ाई सबसे ज्यादा है, वहां यह छह किमी चौड़ी है।

भारत और चीनी सैनिकों में तनाव : चीन के नेताओं को समझना होगा कि इस समय भारत का नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों में है और वह किसी भी मुकाबले का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार हैं। भारत और चीनी सैनिकों में तनाव बढ़ने के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने देश के सुरक्षा प्रतिष्ठान के प्रमुख स्तंभों से बातचीत की। यह तय हुआ है कि सीमा पर जो प्रगति के काम चल रहे हैं, वे नहीं रुकेंगे। चीन ने निर्माण रोकने की शर्त रखी है जिसे भारत मानने को तैयार नहीं। भारत ने चीन से साफ कहा है कि वह सीमा पर यथास्थिति बनाए रखे।

भारत सरकार ने भी अपनी सेनाओं को इससे निपटने के लिए तैयार रहने और उसका मुकाबला कैसे करना है, उस पर भी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। चीन के खिलाफ कूटनीतिक व रणनीतिक प्लान भी तैयार है। भारत ने लद्दाख में सीमा से सटे इलाकों में अपनी सेना बढ़ा दी है। चीन ने एलएसी पर तेजी से निर्माण कार्य शुरू किया था। भारत ने भी पैंगोंग झील और गलवन घाटी में चीन को उसी तरह जवाब दिया है। इस समय दौलत बेग ओल्डी में भारतीय सेना की 81 और 114वीं ब्रिगेड तैनात है। भारतीय सेना चीन की किसी भी नापाक स्थिति का मुकाबला करने के लिए तैयार है।

-अडनी

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