[शशांक द्विवेदी]। Coronavirus Outbreak: हाल में ही विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना संकट का बेहतरी से सामना करने के लिए चीन के प्रयासों की तारीफ की है। साथ ही कहा है कि दुनिया के बाकी देशों को भी चीन द्वारा वुहान में पैदा संकट से सीखने की जरूरत है। पूरी दुनिया इस समय कोरोना संकट से जूझ रही है, लेकिन आश्चर्य की बात है कि चीन के वुहान शहर से जहां से कोरोना संकट की शुरुआत मानी जाती है, अब वहां के हालात सामान्य हैं, और लॉकडाउन भी लगभग हट गया है। वुहान के बाजारों में कारोबारी गतिविधियां सामान्य हो गई हैं।

कोरोना से बचाएगा क्यूआर कोड : ऐसे समय में जब अभी भी पूरी दुनिया में कोरोना वायरस का खौफ बना हुआ है, चीन इस संकट से निपटने में काफी हद तक कामयाब होता दिख रहा है। पूरी दुनिया खासकर अमेरिका द्वारा चीन के जैविक हथियारों के षडयंत्र की थ्योरी को थोड़ी देर के लिए अगर दरकिनार भी कर दें तो यह तो मानना ही पड़ेगा कि चीन तकनीक की सहायता से कोरोना वायरस पर काबू पाने में कामयाब होता दिख रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना पर काबू पाने के तरीकों पर चीन की तारीफ की है और कहा है कि बाकी देशों को भी चीन के वुहान से यह सीखना चाहिए कि कोरोना वायरस का केंद्र बने रहने और तमाम प्रकार की भयावहताओं के बाद भी वहां लोगों की जिंदगी कैसे सामान्य हो पाई है।

मोबाइल के स्क्रीन पर दिखने वाले रंग से तय : कोरोना से जंग में चीन ने न केवल समय पर लॉकडाउन को लागू किया, बल्कि टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल भी बखूबी किया। कल्पना कीजिए कि आपके जीवन की दैनिक गतिविधियां मसलन आप घर से निकलते हैं, काम पर जाते हैं, दोस्तों के साथ रेस्तरां या शॉपिंग मॉल में जाते हैं, लेकिन आपकी हर गतिविधि मोबाइल के स्क्रीन पर दिखने वाले रंग से तय होती हो। अगर हरा रंग दिखता है तो कुछ भी करने की आजादी है। परंतु जैसे ही मोबाइल की स्क्रीन पर लाल रंग नजर आता है तो हर जगह आपका प्रवेश रोक दिया जाता है।

हेल्थ कोड स्कैनिंग तकनीक का इस्तेमाल : दरअसल चीन ने कोरोना पर निगरानी रखने की एक ऐसी मोबाइल ट्रैकिंग प्रणाली विकसित की जिसकी नजरों से बचकर निकल पाना कोरोना वायरस के लिए नामुमकिन नहीं तो बेहद मुश्किल जरूर है। चीन की सरकार ने कोरोना वायरस को रोकने और लोगों की गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए रंग आधारित ‘हेल्थ कोड’ का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। इसके लिए मोबाइल में मौजूद क्यूआर कोड का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह क्यूआर कोड ही चीन के लोगों को हेल्थ कार्ड के रूप में दिया जा रहा है। हालांकि अभी तक पूरे चीन में इस ‘हेल्थ कोड’ को अनिवार्य नहीं बनाया गया है, लेकिन इस पर तेजी से काम हो रहा है। हेल्थ कोड हासिल करने के लिए लोगों को अपनी निजी जानकारी साझा करनी पड़ती है। मसलन नाम, राष्ट्रीय पहचान नंबर, पासपोर्ट नंबर और फोन नंबर को संबंधित पेज पर भरना होता है। फिर उन्हें अपनी पिछली यात्र के बारे में बताना होता है। इसके साथ ही उनसे बीते 14 दिनों की गतिविधियों के बारे में भी पूछा जाता है कि क्या इस दौरान उनका संपर्क कोविड के मरीजों से तो नहीं हुआ है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रलय ने आरोग्य सेतु एप लांच : वास्तव में चीन ही एकमात्र ऐसा देश नहीं है जो इस तरह के क्यूआर कोड का इस्तेमाल कोरोना वायरस से लड़ाई में इस्तेमाल के लिए कर रहा है। सिंगापुर ने भी पिछले महीने कांटैक्ट ट्रेसिंग स्मार्टफोन एप लांच किया, जिसके जरिये अधिकारी कोरोना मरीजों का आसानी से पता लगा सकते हैं। जापान में इसी तरह की तकनीक को लागू करने की योजना पर काम चल रहा है, जबकि रूस ने लोगों की गतिविधियों का पता लगाने के लिए क्यूआर कोड को लागू कर दिया है। इस कोरोना महामारी से भारत के लिए दो बड़े सबक हैं। पहला यह कि दुनिया के किसी भी देश पर हमारी व्यावसायिक निर्भरता कम हो और सभी मामलों में हम आत्मनिर्भर बनें, जबकि दूसरा स्वदेशी तकनीक पर ज्यादा ध्यान देना। पिछले दिनों कोरोना संक्रमण के खिलाफ लड़ाई में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रलय ने आरोग्य सेतु एप लांच किया। इसके जरिये लोगों को महामारी के लक्षण और बचाव के तरीके जैसी अहम जानकारियां दी जा रही हैं।

आरोग्य सेतु एप के लांच होने के कुछ ही दिनों के बाद पांच करोड़ से अधिक लोगों ने इसे डाउनलोड भी किया। सरकार का यह एप लोगों को कोरोना वायरस संक्रमण के खतरे और जोखिम का आकलन करने में मदद करता है। भारत के लिए आरोग्य सेतु एप कोरोना के खिलाफ लड़ाई में जरूरी हथियार साबित हो सकता है। यात्र के लिए आज यह ई-पास के तौर पर भी इस्तेमाल में लाया जा रहा है। इस एप के माध्यम से ही एक स्थान से दूसरे स्थान की यात्र करने वालों के लिए ई-पास उपलब्ध कराने की संभावना तलाशी जा रही है।

कुल-मिलाकर अगर आरोग्य सेतु के साथ ही क्यूआर स्कैनिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जाए तो काफी अच्छा रहेगा। फिलहाल समय आ गया है जब भारत भी इस तकनीक का प्रयोग शुरू करे, क्योंकि भारत जैसी विशाल आबादी वाले देश में यह तकनीक काफी उपयोगी साबित हो सकती है। ऐसे समय में जब केंद्र और राज्य सरकारें लॉकडाउन को खत्म करते हुए कारोबारी गतिविधियां शुरू करने पर विचार कर रही हैं, तब हेल्थ कोड स्कैनिंग तकनीक भारत के लिए आवश्यक और उपयोगी साबित हो सकती है।

[डायरेक्टर, मेवाड़ यूनिवर्सिटी]

Posted By: Sanjay Pokhriyal

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