[ शैलेश त्रिपाठी ]: जबरदस्त खबर है। एक जानेमाने निर्माता बड़ी जोरदार फिल्म बनाने जा रहे हैं। नाम है ‘प्याज बिना चैन कहां’ जिसे निर्देशित करने के लिए बाहर से किन्हीं विलियम ओनियन को बुलाया जा रहा है। चलिए इसकी कहानी की कुछ परतें खोलते हैं। कहानी नए जमाने की है, लेकिन उसमें एक स्वयंवर भी दिखाया गया है। यह स्वयंवर फिल्म की अहम कड़ी है। अपनी रूपवती राजकुमारी के विवाह के लिए प्याजगढ़ नरेश कांदाकुंवर स्वयंवर की घोषणा करते हैं। इसके मुताबिक जो नौजवान फलां तारीख तक सबसे ज्यादा प्याज लेकर हाजिर होगा तो उसके साथ अपनी पुत्री का विवाह कराने के साथ ही वह अपना आधा राजपाट उसे सौंपकर वनगमन को निकल जाएंगे।

प्याज की कड़ी सुरक्षा

स्वयंवर की मुनादी सुन ढेर सारे नौजवान अपनी अपनी किस्मत आजमाने निकल पड़े। प्याज के लच्छों की तरह ही अपनी लच्छेदार बातों से सबको साधने में सिद्धहस्त नौजवान प्रेमपाल ने सोचा कि अरे ये कौन सी बड़ी बात हुई। वह प्याज लादने के लिए गाड़ी लेकर सब्जी मंडी पहुंचा। वहां जाकर मालूम पड़ा कि महंगे भाव के चलते प्याज मंडी में नहीं, बल्कि सर्राफा बाजार से भी कड़ी सुरक्षा में बेचा जा रहा है। वह वहां से निकलने को ही था कि मंडी में घूम रहे तमाम सांडों में से एक ने उसे जोर से पटक दिया। वहां मौजूद लोग उसे बचाने के बजाय वीडियो बनाने में ही मशगूल रहे। फिर उन्हीं लोगों ने उसे सोशल मीडिया पर वायरल किया कि देखिए आज का समाज कितना संवेदनहीन हो गया है।

प्याज खरीदने के लिए बैंक लोन तो नहीं मिला, पहुंच गए अस्पताल

अब स्वयंवर के दूसरे महारथी से मुलाकात की जाए। यह महाशय हैं छोटेलाल जो जुगाड़ लगाने में उतने ही बड़े उस्ताद माने जाते हैं। उन्होंने भी सोचा कि स्वयंवर में वधू और राजपाट का वरण करने के लिए यहां भी कोई तिकड़म भिड़ा लेंगे। इसी सिलसिले में बैंक से लोन के लिए संपर्क साधा। बैंकों ने उससे आधार, पैन, पिछले बीस साल का आयकर रिटर्न और तमाम तरह की लिखित गारंटी लेने के बावजूद लोन इस बिना पर रद कर दिया गया कि वह बीते महीने क्रेडिट कार्ड का पूरा बिल नहीं चुका पाया था। छोटेलाल भी इतना बड़ा सदमा नहीं झेल पाए और अस्पताल पहुंच गए। खबर यह फैल गई कि प्याज सेहत के लिए हानिकारक है।

मां-बाप की किडनी बेंचकर प्याज खरीदा, किंतु गन प्वांइट पर इसे लूट लिया

अब तीसरे महानुभाव मंगूराम का चरित्र चित्रण भी देख लीजिए। उसने अपनी जमीन-जायदाद और मां-बाप, अड़ोसियों-पड़ोसियों को फंसाकर उनके किडनी इत्यादि का सौदा करके मिली रकम बटोरने के बाद खरीदे गए प्याज को लेकर राजमहल की ओर कूच किया। वह राजमहल से लगी पुलिस चौकी तक पहुंचा ही था कि दो नकाबपोशों ने उसकी कनपटी पर तमंचा सटाकर सारा प्याज छीन लिया। पुलिस वालों ने उसे ही उल्टे प्याज चोर समझकर निपटा दिया। यहीं फिल्म की कहानी निर्णायक करवट लेती है।

पुनर्जन्म के बाद तीनों ने प्याज, लहसुन और टमाटर हाथ पर गोदवाकर बिछड़ गए

पुनर्जन्म के बाद तीनों एक नेता के घर में जन्म लेते हैं जहां उन्हें ‘अमर अकबर एंथोनी’ नाम दिया जाता है। उनके पिता तीनों को कुंभ के मेले में ले जाते हैं। वहां एक गोदने वाले के यहां एक के हाथ पर प्याज, दूसरे के लहसुन और तीसरे के हाथ पर टमाटर गोदवा दिया। वे उस तंबू से निकले ही थे कि बाहर एक हाथी के उत्पात से मची भगदड़ में बिछड़ जाते हैं। एक भाई मंडी के एक बड़े जमाखोर के हाथ लगता है। वह बड़ा होकर बहुत बड़ा जमाखोर बनता है। दूसरा भाई जमाखोरी पर नियंत्रण रखने वाले विभाग का बेहद ईमानदार इंस्पेक्टर बनता है। तीसरा भाई फलों और सब्जियों के मूल्य पर निगरानी रखने वाले मंत्री के मातहत काम करता है।

तुम्हें जितना प्याज चाहिए ले लो, पर मेरी बेटी के रास्ते से हट जाओ

तीनों भाई वक्त-बेवक्त आपस में टकराते रहते हैं। क्या इन तीनों का मिलन हो पाएगा। इनमें कौन किस पर भारी पडता है। पूरी फिल्म का तानाबाना इसी पर बुना गया है। इसमें कई दमदार संवाद भी हैं। मसलन एक दृश्य में हीरोइन का बाप हीरो को बुलाकर कहता है कि तुम्हें जितना प्याज चाहिए ले लो, पर मेरी बेटी के रास्ते से हट जाओ।

कैसे नए प्याज में चिप लगाई जाएगी, जो जमाखोर की पोल खोल देगी

एक सीन में बताया जाता है कि कैसे नए प्याज में चिप लगाई जाएगी, जो खुद जमाखोर की पोल खोल देगी। फिल्म के गाने भी खूब धमाल मचा रहे हैं।

‘प्याज बिना चैन कहां रे’, ‘प्याज मांगा है तुम्हीं से, न यूं इन्कार करो’

‘प्याज बिना चैन कहां रे’ जैसे टाइटल ट्रैक के अलावा ‘प्याज मांगा है तुम्हीं से, न यूं इन्कार करो’ और ‘इक प्याज का नगमा है...’ जैसे गाने लोगों की जुबान पर चढ़ने वाले हैैं। फिल्म के निर्माता का दावा है कि उनकी फिल्म दर्शकों को प्याज के रूप, रंग और रस से सराबोर करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेगी।

[ लेखक हास्य-व्यंग्यकार हैं ]

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