उत्तर प्रदेश, आशुतोष शुक्ल। Vikas Dubey News उसके घर में बंकर है। वह जेसीबी से दूसरों के घर तोड़ता था। उसके यहां प्रतिबंधित हथियार थे। जब तब वह पुलिस पर हाथ उठा देता था। उसने तो एक जज को भी धमका दिया था। पुलिस उसकी चेरी थी। पुलिस विभाग में उसके मुखबिर थे। वह यहां भागा, वह वहां भागा। अब छोड़ा नहीं जाएगा। अब उसके दिन गिनती के रह गए हैं। ऐसे कितने ही जुमले पिछले तीन दिनों से हवा में हैं। दुनिया को भले ही आज पता चला है, लेकिन चौबेपुर और कानपुर में हर कोई जानता था विकास दुबे की कहानी।

विकास को रोकने का साहस कोई नहीं दिखा सका: नेताओं का प्रिय शब्द है विकास। जिसको जहां मौका लगा, विकास कराने लग पड़ता है। शिक्षा का विकास, किसान का विकास, राज्य और देश का विकास, लेकिन विकास छलना भी है। जल्दी हाथ नहीं रखने देता अपने ऊपर। कई बार हवा में ही रह जाता है। इसी तरह चौबेपुर के विकास ने भी अपने ऊपर किसी को हाथ नहीं रखने दिया। या अधिक बेहतर होगा यह कहना कि इस विकास को रोकने का साहस कोई नहीं दिखा सका। इसीलिए दो जुलाई की रात की स्याही का अंधेरा अनेक निर्दोष  पुलिस वालों के परिवारों को डस ले गया।

इस हफ्ते उत्तर प्रदेश से बताने के लिए कई और किस्से भी थे, लेकिन चौबेपुर का यह लोमहर्षक कांड सब पर भारी पड़ गया। एक खाकी वर्दी सैकड़ों का भरोसा होती है और इसीलिए उस पर हुआ हमला लोगों को हिला देता है। अपराधी का लालन-पालन राजनीति करती है। डाकू हो या तस्कर, सब राजनीति के आंगन में ही शरण पाते हैं। राजनीति ही अपराधी की इच्छा और महत्वाकांक्षा को बढ़ाती है। विकास दुबे दलों से ऊपर था। कानपुर और उसके पड़ोसी जिलों में हर राजनीतिक दल के नेता उसका इस्तेमाल करते थे। अब सब चुप्पी साधे बैठे हैं। उधर अपने लोगों को खोने के बाद पुलिस ने विकास का घर गिरा दिया। लखनऊ तक धावे मारे गए, लेकिन खुद विकास का अभी तक तो कोई पता नहीं चल सका है।

पिछले 27 वर्षो में 60 मुकदमे जिस अपराधी पर लगे, जिस पर थाने में घुसकर भारतीय जनता पार्टी के एक नेता की हत्या का आरोप लगा, न उस पर कभी रासुका लग सका और ना वह एसटीएफ की प्राथमिकता सूची में जगह बना सका।

कानपुर: चौबेपुर के बिकरू गांव में ध्वस्त किया गया हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे का मकान। 

विकास दुबे ने उत्तर प्रदेश में नेताओं और अपराधियों के गठजोड़ को ऐसा उघाड़ा है कि वर्षो तक इसकी मिसाल दी जाती रहेगी। वैसे इस पूरे प्रकरण में अच्छी बात यह है कि मुख्यमंत्री ने सख्ती की है और माफिया पर टूट पड़ने को कहा है। अब पुलिस के पास मौका है माफिया को धर दबोचने का। यह काम उसे अपने साथियों की शहादत को सम्मान देने के लिए दिल से करना चाहिए।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के कारण बढ़ रही चिंता : बीते सप्ताह कोरोना महामारी से लड़ाई में एक चिंताजनक समाचार यह रहा कि अब लक्षण-रहित मरीजों से कम्युनिटी ट्रांसमिशन यानी सामुदायिक संक्रमण का खतरा उठ खड़ा हुआ है। खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से हुई वीडियो कांफ्रेंसिंग में यह बात उठाई। दरअसल योगी की असल चिंता का कारण राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली से संबंधित है, जहां से कोरोना के नए मामले निकलने की गति एक बार फिर बढ़ गई है।

काशी में बाबा विश्वनाथ मंदिर में नहीं होगी भक्तों की भीड़ : वैसे तो धार्मिक गतिविधियों पर रोक की खबर कोई नई नहीं है, फिर भी सावन सूना जा रहा है। काशी में यह पहला सावन है, जब बाबा विश्वनाथ मंदिर के आगे मीलों लंबी लाइनें नहीं होंगी। सड़कों पर झूमते-गाते कांवड़िए भी नहीं हैं। उत्सवधर्मी देश में संस्कृति का यह सूनापन कचोटता है।

बिना परीक्षा दिए छात्रों को किया जाएगा प्रोन्नत : गत सप्ताह की एक अहम खबर यह भी रही कि विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों की सभी परीक्षाएं रद करके छात्रों को प्रोन्नत करने का फैसला हो गया। इस तरह करीब 48 लाख छात्रों को अगली कक्षा में प्रवेश मिल जाएगा, लेकिन वास्तव में देखा जाए तो यह नुकसान बड़ा है। बच्चों को क्लास तो भले ही मिल जाएगी, पर इस छूटी हुई पढ़ाई की भरपाई तो अब कभी नहीं हो सकेगी। लिहाजा जब सत्र सामान्य होगा तो बच्चों, उनके शिक्षकों और अभिभावकों को अधिक मेहनत करनी होगी।

[संपादक, उत्तर प्रदेश]

Posted By: Sanjay Pokhriyal

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