मोदी सरकार के 15 महीने पूरे होने के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति की निष्पक्ष समीक्षा निश्चित तौर पर जरूरी है। वैश्विक अर्थव्यवस्था इस समय एक मिश्रित तस्वीर उपस्थित कर रही है। चीन की अर्थव्यवस्था में गिरावट के साथ वैश्विक शेयर बाजार और मुद्रा बाजार में उथल-पुथल की स्थिति है। इसके उलट तेल और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में तीव्र गिरावट हो रही है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में क्रमिक सुधार और अमेरिकी फेडरल बैंक द्वारा ब्याज दरों में कोई परिवर्तन न किए जाने से राजकोषीय और मौद्रिक नीति के संदर्भ में भारत बेहतर स्थिति में है। भारत अब कमजोर पांच अर्थव्यवस्थाओं में शामिल नहीं है और उसकी जगह मैक्सिको ने ले ली है। आज भारत विदेशी पूंजी प्रवाह की दृष्टि से दुनिया में सबसे आकर्षक बाजार के रूप में उभरा है।

भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ) का प्रवाह अप्रैल-जुलाई 2015 के दौरान पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 48 फीसद बढ़ा है। प्रमुख ताइवानी इलेक्ट्रानिक हार्डवेयर निर्माता कंपनी फॉक्सकॉन ने महाराष्ट्र में 5 अरब डॉलर निवेश करने की घोषणा की है जिससे करीब 50 हजार नौकरियों का सृजन होगा। अमेरिका की एक अन्य बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनी सिस्को (सीआइएससीओ) ने आने वाले साल में अपनी क्षमता का विस्तार करने और नौकरियों में इजाफा करने की बात कही है। चीन में स्मार्टफोन की मांग में गिरावट की स्थिति से दो-चार हो रही मोबाइल कंपनियां भारत में अपनी क्षमता विस्तार की योजनाओं पर काम कर रही हैं। भारत में स्मार्टफोन की मांग हर साल 30 फीसद से भी अधिक की दर से बढ़ रही है। ये सभी चीजें शून्य आयात शुल्क के बावजूद घरेलू इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर बाजार के लिए शुभ संकेत हैं। दरअसल आयात शुल्क के मसले पर भारत सरकार वैश्विक समझौते के तहत बंधी हुई है। इससे एक बात तो साफ है कि कोई भी साहसिक कदम खुले वैश्विक आर्थिक ढांचे में हमें अधिक लाभ दिला सकता है। ऊर्जा और एयरक्राफ्ट इंजन उत्पादक कंपनी जीई ने पुणे में अत्याधुनिक उत्पादक इकाई की शुरुआत की है। रेनॉल्ट ने वैश्विक बाजार में भारतीय डिजाइन वाले और यहां उत्पादित सामान का निर्यात करना शुरू कर दिया है। फोर्ड और डैमलर ने बड़ी निर्यात इकाइयों की स्थापना की है। संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन अथवा अंकटाड ने अपने सर्वेक्षण में कहा है कि बेहतर निवेश वाले बाजार के तौर पर भारत की रैंकिंग सुधरकर इस वर्ष 14वें से 9वें स्थान पर पहुंच गई है।

यदि घरेलू निवेशकों की तरफ देखें तो वे अब भी दुविधा में पड़े दिखते हैं। संभवत: वे घरेलू मांग में सुधार के स्पष्ट संकेत का इंतजार कर रहे हैं। वे लोग लाभ के बजाय अपने लिए अधिकतम राजस्व निवेश का चुनाव करके स्वयं की मदद कर सकते हैं। ये कीमतों में कटौती के माध्यम से मांग बढ़ा सकते हैं और अपने उत्पाद का विस्तार कर सकते हैं। रीयल इस्टेट के क्षेत्र में कीमतों में कटौती से मांग में तेजी आएगी जिससे अन्य तमाम क्षेत्रों में भी मांग बढ़ेगी। सरकारी मदद का इंतजार करने के बजाय अपनी सहायता स्वयं करना अधिक अच्छा है। यदि सरकार की तरफ से जारी किए गए प्रेस नोट को ध्यान से देखें तो पाएंगे कि सरकार ने कई छोटे, लेकिन महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं जिनका संयुक्त प्रभाव अधिक महत्वपूर्ण है। सरकार द्वारा उठाए गए कुछ कदम इस प्रकार हैं। बिजनेस करने में अधिक सहूलियत की दृष्टि से ई-बिज पोर्टल बनाया गया है। इसके माध्यम से न केवल औद्योगिक लाइसेंस और आइईएम (इंडस्ट्रियल एंटरप्रेन्योर मेमोरेंडम) के लिए आवेदन किया जा सकता है, बल्कि चौबीसों घंटे 11 केंद्रीय सेवाओं की सुविधा भी इस पर उपलब्ध है। सबसे अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि राज्य सरकारों को भी इसमें शामिल किया गया है और उन्हें 98 वस्तुओं के लिए अपने मानक तय करने के लिए प्रेरित किया गया है। विश्व बैंक के साथ जब अगले माह रिपोर्ट जारी की जाएगी तो उम्मीद है कि प्रतिस्पर्धी सुशासन और तेज होगा। चालीस से अधिक श्रम कानूनों को चार व्यापक दिशानिर्देशों में शामिल किया गया है और इंस्पेक्टरों के निरीक्षण कार्य को अधिक व्यवस्थित किया गया है। इस क्रम में सार्वजनिक पूंजी खर्च अप्रैल और मई माह में पिछले साल की तुलना में अधिक रहा। अप्रत्यक्ष कर राजस्व में अनपेक्षित ढंग से काफी अच्छी प्रगति हुई और 37 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। भूतल परिवहन मंत्रालय ने 3.5 लाख करोड़ रुपये लागत वाली परियोजनाएं तैयार कर ली हैं जिसमें सरकार की हिस्सेदारी 40 फीसद तक है। कर नीति को अधिक पारदर्शी बनाया गया है और 13 देशों के साथ हुए उन्नत मूल्य समझौते पर हस्ताक्षर के साथ अमेरिकी कंपनियों के साथ लंबित 35 मामलों का निपटारा किया गया।

पर्यावरण मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के दायरे में पर्यावरण संवेदनशील सीमाओं को अधिसूचित किया है। इसने परियोजनाओं के लिए पर्यावरणीय मंजूरी को अधिक सरल और कारगर बनाया है। विदेशी संस्थागत निवेशकों के संदर्भ में एपी शाह कमेटी ने विदेशी अप्रत्यक्ष निवेशों पर पूर्व की तिथि से लागू होने वाले मैट के खिलाफ सिफारिश की है। वित्तीय सेवाओं से संबंधित विभाग ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिए अधिक लाभ और सुशासन के लिए सात सूत्रीय कार्यक्रम की घोषणा की है।

वित्तीय सेवाओं से संबंधित विभाग बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में विशेष दिक्कतों वाले मंत्रालय और विभाग की तेजी से पहचान कर रहा है। अब इसके कुछ परिणाम दिखने लगे हैं। पीएमआइ (क्रय प्रबंधन सूचकांक) छह माह में सबसे अधिक है। सीएमआइई (सेंटर फॉर मॉनिर्टंरग इंडियन इकोनॉमी) के अनुसार लगातार पांचवीं तिमाही में रुकी हुई परियोजनाओं की संख्या में कमी आई है और जून 2015 में समाप्त हुई तिमाही में निर्माणाधीन परियोजनाएं सबसे अधिक हैं। आइआइपी (औद्योगिक उत्पादन सूचकांक) के दायरे में मुख्य वस्तु उत्पादन नवंबर, 2014 से 7.4 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है। प्रमुख बाजार संकेतक माने जाने वाली व्यावसायिक वाहनों की बिक्री 30 महीने से भी अधिक समय के बाद अब बढ़ रही हैं। निश्चित तौर पर व्यावसायिक बैंक पिछले 24 महीने की अपनी अभूतपूर्व सतर्कता का त्याग करेंगे और कॉरपोरेट क्षेत्र के लिए कर्ज सुविधा देने की प्रक्रिया को तेज करेंगे।

मोदी सरकार अपनी सफलताओं का प्रचार करके बेहतर कार्य करेगी। इससे प्रगति भी तेज होगी। निवेश प्रक्रिया बहुत कुछ अपेक्षाओं पर निर्भर करती है और बेहतर संवाद के जरिये इसे बदला जा सकता है। नीति आयोग के उपाध्यक्ष और इसके सदस्यों को इस महत्वपूर्ण काम को करना चाहिए। यह महत्वपूर्ण है, क्योंकि सलाहकारों, एजेंटों और मध्यस्थों की तरफ से काफी नकारात्मक चीजें फैलाई जा रही हैं। ऐसा इसलिए है, क्योंकि भ्रष्टाचार पर कोई भी कोताही न बरतने की मोदी सरकार की नीति के कारण इन्हें नुकसान हो रहा है।

[लेखक राजीव कुमार, सेंटर फार पॉलिसी रिसर्च में सीनियर फेलो हैं]

आज़ादी की 72वीं वर्षगाँठ पर भेजें देश भक्ति से जुड़ी कविता, शायरी, कहानी और जीतें फोन, डाउनलोड करें जागरण एप

Posted By: Bhupendra Singh