प्रदीप शुक्ला, झारखंड। Jharkhand Assembly Election 2019: झारखंड की राजनीति में उथल-पुथल जारी है। एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) लगभग बिखर चुका है। दूसरी तरफ कांग्रेस, झारखंड मुक्ति मोर्चा, राष्ट्रीय जनता दल और वामदलों का महागठबंधन बन जरूर गया है, लेकिन यहां भी दलों में बगावत जारी है। सबसे ज्यादा कांग्रेस में उठा-पटक मची हुई है।

महागठबंधन इस सबसे कैसे निपटता है

बदले हालात में सबसे ज्यादा फायदे में फिलहाल आजसू दिख रही है। सभी दलों के बगावती यहीं शरण पा रहे हैं। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर और उसके बाद राफेल पर भी फैसला सुना दिया है। राहुल का माफीनामा भी स्वीकार कर लिया है। ऐसे में जब दोनों दलों के स्टार प्रचारक मैदान में उतरेंगे तो सत्तापक्ष के तरकश में ये मुद्दे भी होंगे। यह देखना दिलचस्प होगा, महागठबंधन इस सबसे कैसे निपटता है।

महाराष्ट्र में शिवसेना का साथ छूटा तो झारखंड में लोजपा का

पिछले कुछ दिन एनडीए और उसके सहयोगियों के लिए अच्छे नहीं रहे हैं। महाराष्ट्र में शिवसेना का साथ छूटा तो झारखंड में लोजपा का। जदयू पहले से ही अलग से ताल ठोक रही है। झारखंड राज्य गठन के बाद से ही जिस आजसू का साथ बना हुआ था, वह भी लगातार आंखें तरेर रहा है। पहले चरण का नामांकन खत्म हो चुका है और तीन दिन बाद दूसरे चरण का नामांकन भी खत्म हो जाएगा, लेकिन अभी तक दोनों दलों में रार कायम है। आजसू सत्रह सीटें मांग रही है। प्रदेश भाजपा संगठन इसके लिए कतई तैयार नहीं है। कुछ सीटों पर दोनों दलों ने प्रत्याशी उतार दिए हैं।

आजसू ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा के सामने भी प्रत्याशी खड़ा कर दिया है। अब समझौता होने की स्थिति में दोनों दलों को दो से तीन सीटों पर झुकना पड़ेगा। वैसे, इसके लिए दोनों तैयार भी हैं, लेकिन ज्यादा दिक्कतें आजसू के केंद्रीय अध्यक्ष सुदेश महतो के समक्ष खड़ी होंगी। अभी सभी दलों के विक्षुब्ध आजसू की तरफ भाग रहे हैं। यदि समझौता हो जाता है तो ऐसी स्थिति में विभिन्न दलों से टिकट की आस में आए विक्षुब्धों को संभालना आजसू के लिए कठिन चुनौती होगी। अभी फायदे में दिख रही आजसू को यही विक्षुब्ध नुकसान भी पहुंचा सकते हैं।

चौकीदार चोर है

टिकट बंटवारे के बाद कांग्रेस में भी घमासान मचा हुआ है। कांग्रेस की कई जिला इकाइयों ने पार्टी का दामन छोड़ दिया है। ऐसे में पैराशूट प्रत्याशी महागठबंधन की उम्मीदों को बड़ा झटका दे सकते हैं। संगठनात्मक स्तर पर पहले से ही पार्टी का हाल बुरा है। बीते सप्ताह राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भारतीय जनता पार्टी खेमा खुश है। राफेल पर भी सुप्रीम कोर्ट ने क्लीन चिट दे दी है। लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी झारखंड में हर रैली में राफेल डील को मुद्दा बनाते रहे। हर जनसभा में ‘चौकीदार चोर है’ के नारे भी लगवाते रहे, लेकिन अब सब पानी की तरह साफ हो गया है। दरअसल कांग्रेस नेता एक झूठी कहानी गढ़ने की असफल कोशिश करते रहे। ‘चौकीदार चोर है’ नारे में कोर्ट को भी घसीटने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें बेशक माफ कर दिया है, लेकिन सख्त हिदायत भी दी है।

स्टार प्रचारकों की रैलियों के साथ असली घमासान शुरू

झारखंड में आदिवासियों के बीच भी ऐसी ही एक धारणा बनाने की लगातार असफल कोशिश जारी है कि भाजपा जल, जंगल और जमीन को लूटने की साजिश रचने वाली पार्टी है। महागठबंधन की प्रमुख पार्टी झामुमो के नेता हेमंत सोरेन लोकसभा चुनाव से ही इसे मुद्दा बनाए हुए है। अपनी बात को साबित करने के लिए वह कोई ठोस तथ्य जनता के बीच नहीं रख पा रहे हैं, इसके विपरीत मुख्यमंत्री रघुवर दास इस पर काफी आक्रामक हैं। वह लगातार हेमंत सोरेन पर हमलावार हैं और पूछ रहे हैं वह कैसे आदिवासियों की हजारों एकड़ जमीन के मालिक बन गए? चुनाव प्रचार जोर पकड़ने के साथ ही सप्ताह के आखिर तक स्टार प्रचारकों की रैलियों के साथ असली घमासान शुरू हो जाएगा।

[स्थानीय संपादक, झारखंड]

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Posted By: Sanjay Pokhriyal

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