दुनिया की 5 हैरान करने वाली प्रथाएं, जो सुंदरता के नाम पर महिलाओं के शरीर को देती हैं दर्दनाक सजा
दुनिया भर में आज भी कई ऐसी दर्दनाक प्रथाएं प्रचलित हैं, जो महिलाओं के शरीर को नियंत्रित करने के लिए बनाई गई हैं।

हैरान कर देंगी महिलाओं से जुड़ी ये प्रथाएं (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। सदियों से दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में महिलाओं के शरीर को लेकर कई तरह की मान्यताएं और परंपराएं चली आ रही हैं। हालांकि, इनमें से कई रीति-रिवाज सांस्कृतिक पहचान से जुड़े हैं, लेकिन इनका सीधा असर महिलाओं की शारीरिक और मानसिक स्थिति पर पड़ता है।
आइए जानते हैं दुनिया की कुछ ऐसी प्रथाओं के बारे में, जो सुंदरता, मर्यादा और परंपरा के नाम पर महिलाओं के शरीर को नियंत्रित करने के लिए बनाए गए हैं और आज की अस्तित्व में हैं।
ब्रेस्ट आयरनिंग

(Picture Courtesy: United Nations Cameroon)
अफ्रीका के कैमरून, नाइजीरिया, टोगो, गिनी और चाड जैसे देशों के कुछ समुदायों में ब्रेस्ट आयरनिंग की प्रथा प्रचलित है। इसमें बढ़ती उम्र की लड़कियों के स्तनों को गर्म वस्तुओं से दबाया जाता है। इस दर्दनाक प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य प्यूबरटी में देरी करना और पुरुषों का यौन आकर्षण कम करना है। चौंकाने वाली बात यह है कि लगभग 58% मामलों में यह प्रक्रिया परिवार के सदस्यों, खासकर मां करती हैं।
गर्दन लंबी करने की परंपरा

(Picture Courtesy: Facebook)
म्यांमार और उत्तरी थाईलैंड के कायन समुदाय में महिलाओं की लंबी गर्दन को सुंदरता और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक माना जाता है। यहां लड़कियां पांच साल की उम्र से ही गले में पीतल के छल्ले पहनना शुरू कर देती हैं। समय के साथ इन छल्लों की संख्या बढ़ाई जाती है, जो कॉलरबोन और पसलियों को नीचे की ओर धकेल देते हैं। इससे गर्दन लंबी दिखाई देने लगती है। यह परंपरा आज भी वहां के गौरवशाली इतिहास के रूप में जीवित है।
फीमेल जेनिटल म्युटेशन
यह एक बेहद गंभीर और विवादित प्रथा है, जो अफ्रीका, मध्य पूर्व, भारत, मलेशिया और यूरोप के प्रवासी समुदायों में देखी जाती है। गैर-चिकित्सीय कारणों से महिला जननांगों के हिस्सों को हटाने या बदलने की इस प्रक्रिया को शुद्धता, मर्यादा और शादी के योग्य होने के विश्वास से जोड़ा जाता है। इसे समाज में नैतिकता के मानक के रूप में देखा जाता है।
विधवा होने से जुड़े रीति-रिवाज

(Picture Courtesy: UN Women)
अफ्रीका के कुछ हिस्सों में पति की मृत्यु के बाद विधवाओं को बेहद मुश्किल नियमों का पालन करना पड़ता है। इनमें यौन शुद्धिकरण, पुरुष रिश्तेदारों को विरासत में दिया जाना या घर से बेदखल कर देना शामिल है। ये प्रथाएं न केवल मानवाधिकारों का उल्लंघन हैं, बल्कि एचआईवी जैसी गंभीर बीमारियों के फैलने का कारण भी बनती हैं।
जबरदस्ती वजन बढ़ाना
मॉरिटानिया के कुछ हिस्सों में लेब्लौह नाम की एक प्रथा है, जहां छोटी लड़कियों को जबरदस्ती ज्यादा मात्रा में खाना खिलाया जाता है। यहां शरीर का भारी होना सुंदरता और जल्दी शादी के लिए जरूरी माना जाता है। इसके लिए लड़कियों को फैटनिंग फार्म्स भेजा जाता है, जहां बुजुर्ग महिलाएं उन्हें बाजरा, मक्खन और ऊंटनी का दूध भारी मात्रा में पिलाती हैं। अक्सर इस ज्यादा खान-पान के कारण लड़कियां बीमार भी पड़ जाती हैं।
