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हरियाणा और यूपी के सहयोग से बढ़ेगा यमुना का 'ई-फ्लो', 500 क्यूसेक गंगा जल से घटेगा प्रदूषण

Published: Fri, 23 Jan 2026 08:20 PM (IST)

यमुना में पानी की कमी से बढ़ रहे प्रदूषण को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने तीन-सूत्रीय फार्मूला तैयार किया ...और पढ़ें

हथिनी कुंड बैराज। फाइल फोटो

हथिनी कुंड बैराज। फाइल फोटो

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संतोष कुमार सिंह, नई दिल्ली। यमुना में पर्याप्त मात्रा में पानी न होने के कारण प्रदूषण बढ़ रहा है। राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान, रुड़की के अध्ययन के अनुसार यमुना में पूरे वर्ष 850 क्यूसेक पर्यावरणीय प्रवाह (ई-फ्लो) होना चाहिए, लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा है।

हरियाणा के हथनी कुंड बैराज से ही हरियाणा, दिल्ली तथा अन्य राज्य अपने हिस्से का पानी आपस में बांट लेते हैं, जिससे यमुना को उसका उचित हिस्सा नहीं मिल पाता। यही कारण है कि मानसून को छोड़कर अन्य मौसमों में नदी में प्रवाह 350 क्यूसेक से भी कम रह जाता है।

इससे नदी में प्रदूषण बढ़ रहा है। इस समस्या के समाधान के लिए तीन सूत्रीय फार्मूला तैयार किया गया है, जिसके तहत हरियाणा और उत्तर प्रदेश के सहयोग से यमुना में पूरे वर्ष पर्याप्त जल उपलब्ध होगा। पर्यावरणीय प्रवाह बढ़ने से प्रदूषण की समस्या भी काफी हद तक दूर हो जाएगी।

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केंद्र सरकार की देखरेख में यमुना की सफाई का कार्य शुरू हो चुका है। वजीराबाद अपस्ट्रीम में नदी का ई-फ्लो बढ़ाने के लिए संबंधित राज्यों के साथ कई बैठकों के बाद तीन प्रमुख प्रस्ताव तैयार किए गए हैं।

इसके अंतर्गत उत्तर प्रदेश द्वारा गंग नहर से 500 क्यूसेक जल दिल्ली के वजीराबाद बैराज के पास उपलब्ध कराने, हरियाणा द्वारा दिल्ली सब-ब्रांच (डीएसबी) नहर को दुरुस्त करके 100 क्यूसेक जल के नुकसान को रोकने के साथ ही हथनी कुंड बैराज से यमुना में ई-फ्लो सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक प्रयास किया जाएगा।

यमुना में डाला जाएगा 500 क्यूसेक गंगाजल

वर्तमान में गंग नहर में आने वाले गंगा जल में से 1800 क्यूसेक पानी हिंडन नदी में छोड़ा जाता है। यह पानी हिंडन नहर से होकर ओखला बैराज पहुंचता है और वहां से आगरा नहर में डाला जाता है। प्रस्ताव के अनुसार अब 1800 की जगह केवल 1300 क्यूसेक पानी हिंडन नदी में डायवर्ट किया जाएगा।

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शेष 500 क्यूसेक पानी मुरादनगर रेगुलेटर से नई पाइपलाइन के माध्यम से दिल्ली के वजीराबाद के पास यमुना में छोड़ा जाएगा। इस तरह ओखला बैराज से आगरा नहर में भी 1800 क्यूसेक पानी पहुंच जाएगा और यमुना का पर्यावरणीय प्रवाह भी बना रहेगा।

इस व्यवस्था के लिए हिंडन नदी और हिंडन नहर में प्रदूषण की समस्या दूर करने के लिए काम होगा। साथ ही मुरादनगर रेगुलेटर से वजीराबाद तक 250 क्यूसेक क्षमता वाली दो पाइपलाइनों का निर्माण करना होगा।

रोकी जाएगी 100 क्यूसेक पानी की बर्बादी

दिल्ली सब-ब्रांच (डीएसबी) नहर के माध्यम से मूनक हेडवर्क्स पर हरियाणा से दिल्ली को 330 क्यूसेक पानी मिलता है। मूनक हेडवर्क्स से हैदरपुर जल शोधन संयंत्र (डब्ल्यूटीपी) तक लगभग 102 किलोमीटर लंबी यह नहर कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त होने के कारण लगभग 30 प्रतिशत पानी बर्बाद हो जाता है।

यदि हरियाणा द्वारा इस नहर को ठीक कर दिल्ली को पेयजल के लिए पूरा 330 क्यूसेक पानी उपलब्ध करा दिया जाए, तो वजीराबाद डब्ल्यूटीपी के लिए यमुना से अतिरिक्त 100 क्यूसेक पानी लेने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इससे गर्मियों के महीनों में यमुना में पर्यावरणीय प्रवाह बनाए रखने में सहायता मिलेगी।

हथनी कुंड से छोड़ना होगा 353 क्यूसेक पानी

यमुना जल के बंटवारे के लिए हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा और दिल्ली के बीच मई 1994 में समझौता हुआ था। इस समझौते के अनुसार हथनी कुंड बैराज और ओखला से कुल 353 क्यूसेक पानी यमुना के लिए निर्धारित किया गया था।

वर्ष 2015 में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने हथनी कुंड बैराज से ही यमुना में 353 क्यूसेक पानी का प्रवाह सुनिश्चित करने का आदेश दिया था। अब इस आदेश के पालन को सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है।

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